Thursday, 8 September 2016

Meenakshi strotram


उद्यद्भानुसहस्रकोटिसदृशां केयूरहारोज्ज्वलां
विम्बोष्ठीं स्मितदन्तपङ्क्तिरुचिरांपीताम्बरालङ्कृताम् ।
विष्णुब्रह्मसुरेन्द्रसेवितपदां तत्त्वस्वरूपां शिवां
मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥१॥
Udyad-Bhaanu-Sahasra-Kotti-Sadrshaam Keyuura-Haaro[a-U]jjvalaam
Vimbo[a-O]sstthiim Smita-Danta-Pangkti-Ruciiraam Piita-Ambara-Alangkrtaam |
Vissnnu-Brahma-Surendra-Sevita-Padaam Tattva-Svaruupaam Shivaam
Miinaakssiim Prannato-[A]smi Santatam-Aham Kaarunnya-Vaaraam-Nidhim ||1||

Meaning:
1.1: (Salutations to Devi Meenakshi) Who shines like Thousand Million rising Suns, and is adorned withbracelets and garlands,
1.2: Who has beautiful Lips like Bimba Fruits, and beautiful rows of Teeth; Who smiles gently and is adorned with shining Yellow Garments,
1.3: Whose Lotus Feet is served by Vishnu, Brahma and theking of Suras (i.e. Indra Deva); Who is Auspicious and theembodiment of the essence of Existence,
1.4: I always bow down to Devi Meenakshi Who is anocean of Compassion.




मुक्ताहारलसत्किरीटरुचिरां पूर्णेन्दुवक्त्रप्रभां
शिञ्जन्नूपुरकिङ्किणीमणिधरां पद्मप्रभाभासुराम् ।
सर्वाभीष्टफलप्रदां गिरिसुतां वाणीरमासेवितां ।
मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥२॥
Muktaa-Haara-Lasat-Kiriitta-Ruciraam Puurnne[a-I]ndu-Vaktra-Prabhaam
Shin.jan-Nuupura-Kingkinnii-Manni-Dharaam Padma-Prabhaa-Bhaasuraam |
Sarva-Abhiisstta-Phala-Pradaam Giri-Sutaam Vaannii-Ramaa-Sevitaam |
Miinaakssiim Prannato-[A]smi Santatam-Aham Kaarunnya-Vaaraam-Nidhim ||2||

Meaning:
2.1: (Salutations to Devi Meenakshi) Whose crown is adorned with shining Garlands of Pearls, and Whose Faceshines with the splendour of Full Moon,
2.2: Whose Feet is adorned with jingling Anklets decorated with small Bells and Gems, and Who radiates thesplendour of Pure Lotus,
2.3: Who grants all Wishes (of Her Devotees), Who is thedaughter of the Mountain, and Who is accompanied byVaani (Devi Saraswati) and Ramaa (Devi Lakshmi),
2.4: I always bow down to Devi Meenakshi Who is anocean of Compassion.




श्रीविद्यां शिववामभागनिलयां ह्रीङ्कारमन्त्रोज्ज्वलां
श्रीचक्राङ्कितबिन्दुमध्यवसतिं श्रीमत्सभानायिकाम्।
श्रीमत्षण्मुखविघ्नराजजननीं श्रीमज्जगन्मोहिनीं ।
मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥३॥
Shriividyaam Shiva-Vaama-Bhaaga-Nilayaam Hriingkaara-Mantro[a-U]jjvalaam
Shriicakra-Angkita-Bindu-Madhya-Vasatim Shriimat-Sabhaa-Naayikaam |
Shriimat-Ssannmukha-Vighnaraaja-Jananiim Shriimaj-Jagan-Mohiniim |
Miinaakssiim Prannato-[A]smi Santatam-Aham Kaarunnya-Vaaraam-Nidhim ||3||

Meaning:
3.1: (Salutations to Devi Meenakshi) Who is the embodiment of Sri Vidya and resides as the left-half ofShiva; Whose form shines with the Hrimkara Mantra,
3.2: Who resides in the center of Sri Chakra as the Bindu, and Who is the venerable presiding Goddess of theassembly of Devas,
3.3: Who is the revered Mother of Shanmukha (Kartikeya) and Vighnaraja (Ganesha), and Who is the great Enchantress of the World,
3.4: I always bow down to Devi Meenakshi Who is anocean of Compassion.




श्रीमत्सुन्दरनायिकां भयहरां ज्ञानप्रदां निर्मलां
श्यामाभां कमलासनार्चितपदां नारायणस्यानुजाम् ।
वीणावेणुमृदङ्गवाद्यरसिकां नानाविधामम्बिकां ।
मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥४॥
Shriimat-Sundara-Naayikaam Bhaya-Haraam Jnyaana-Pradaam Nirmalaam
Shyaama-[A]abhaam Kamala-[A]asana-Arcita-Padaam Naaraayannasya-Anujaam |
Viinnaa-Vennu-Mrdangga-Vaadya-Rasikaam Naanaa-Vidhaam-Ambikaam |
Miinaakssiim Prannato-[A]smi Santatam-Aham Kaarunnya-Vaaraam-Nidhim ||4||

Meaning:
4.1: (Salutations to Devi Meenakshi) Who is the beautiful Presiding Goddess, Who takes away Fear, Who bestows Knowledge and Who is Stainless and Pure,
4.2: Who has a dark splendour, Whose Feet is worshippedby the one seated on Lotus (i.e. Brahmadeva), and Who is the younger sister of Sri Narayana,
4.3: Who takes delight in musical instruments like Veena,Venu (Flute) and Mridanga, and Who is the Motherassuming various Forms,
4.4: I always bow down to Devi Meenakshi Who is anocean of Compassion.




नानायोगिमुनीन्द्रहृत्सुवसतिं नानार्थसिद्धिप्रदां
नानापुष्पविराजिताङ्घ्रियुगलां नारायणेनार्चिताम् ।
नादब्रह्ममयीं परात्परतरां नानार्थतत्त्वात्मिकां ।
मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥५॥
Naanaa-Yogi-Munii-[I]ndra-Hrtsu-Vasatim Naanaa-[A]rtha-Siddhi-Pradaam
Naanaa-Pusspa-Viraajita-Angghri-Yugalaam Naaraayannena-Arcitaam |
Naadabrahmamayiim Paraatpara-Taraam Naanaa-[A]rtha-Tattva-Atmikaam |
Miinaakssiim Prannato-[A]smi Santatam-Aham Kaarunnya-Vaaraam-Nidhim ||5||

Meaning:
5.1: (Salutations to Devi Meenakshi) Who resides within the Heart of the great Yogis and Munis (Sages) and Whobestows various Siddhis (supernatural powers),
5.2: Whose pair of Feet is adorned with various Flowers, and Who is adored by Lord Narayana,
5.3: Who is the embodiment of Nada Brahma, Who isbeyond all Existences, and Who pervades everything as their innermost Soul (i.e. innermost Essence),
5.4: I always bow down to Devi Meenakshi Who is anocean of Compassion.

Monday, 5 September 2016

महिलाएँ और नौ ग्रह

महिलाएं और उनको प्रभावित करने वाले नौ ग्रह
जय मां राजराजेश्वरी आज हम बात करेंगे महिलाएं और उनको प्रभावित करने वाले नौ ग्रहों के विषय मे 

वैसे तो सौरमंडल के सभी ग्रह धरती पर सभी प्राणियों पर एक जैसा ही प्रभाव डालते हैं। लेकिन सभी प्राणियों का रहन सहन और प्रवृत्ति या प्रकृति एक दूसरे से भिन्न होती है इसलिए ग्रहों का प्रभाव कुछ कम -ज्यादा तो होता ही है। यहाँ सिर्फ महिलाओं पर सभी ग्रहों के प्रभाव का ही जिक्र किया जा रहा है। कई बार महिलाएं असामान्य व्यवहार करती हैं तो उन्हें बहुत झेलना पड़ता है कि उसे किसी ने कुछ सिखा दिया है या बहाने बना रही है जबकि कई बार ग्रहों की अच्छी (उग्र) या बुरी ( कुपित ) स्थिति भी कारण होती है।

जन्म -कुंडली में विभिन्न ग्रहों के साथ युति का अलग-अलग प्रभाव हो सकता है।

♐सूर्य

सूर्य एक उष्ण और सतोगुणी ग्रह है,यह आत्मा और पिता का कारक हो कर राज योग भी देता है। अगर जन्म कुंडली में यह अच्छी स्थिति में हो तो इंसान को स्फूर्तिवान,प्रभावशाली व्यक्तित्व, महत्वाकांक्षी और उदार बनाता है।

परन्तु निर्बल सूर्य या दूषित सूर्य होने पर इंसान को चिड़चिड़ा, क्रोधी, घमंडी, आक्रामक और अविश्वसनीय बना देता है।

अगर किसी महिला कि कुंडली में सूर्य अच्छा हो तो वह हमेशा अग्रणी ही रहती है और निष्पक्ष न्याय में विश्वास करती है चाहे वो शिक्षित हो या नहीं पर अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देती है।

परन्तु जब यही सूर्य उसकी कुंडली में नीच का हो या दूषित हो जाये तो महिला अपने दिल पर एक बोझ सा लिए फिरती है। अन्दर से कभी भी खुश नहीं रहती और आस -पास का माहौल भी तनाव पूर्ण बनाये रखती है। जो घटना अभी घटी ही ना हो उसके लिए पहले ही परेशान हो कर दूसरों को भी परेशान किये रहती है।

बात-बात पर शिकायतें, उलाहने उसकी जुबान पर तो रहते ही हैं, धीरे -धीरे दिल पर बोझ लिए वह एक दिन रक्त चाप की मरीज बन जाती है और न केवल वह बल्कि उसके साथ रहने वाले भी इस बीमारी के शिकार हो जाते है।

दूषित सूर्य वाली महिलायें अपनी ही मर्जी से दुनिया को चलाने में यकीन रखती हैं सिर्फ अपने नजरिये को ही सही मानती हैं दूसरा चाहे कितना ही सही हो उसे विश्वास नहीं होगा।

सूर्य का आत्मा से सीधा सम्बन्ध होने के कारण यह अगर दूषित या नीच का हो तो दिल डूबा-डूबा सा रहता है जिस कारण चेहरा निस्तेज सा होने लगता है।
♐उपाय♏
सूर्य को जल देना ,सुबह उगते हुए सूर्य को कम से कम पंद्रह -मिनट देखते हुए गायत्री मन्त्र का जाप ,आदित्य-हृदय का पाठ और अधिक परेशानी हो तो रविवार का व्रत भी किया जा सकता है।

संतरी रंग (उगते हुए सूरज) का प्रयोग अधिक करें .

चन्द्र

किसी भी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। स्त्री की कुंडली में इसका महत्व और भी अधिक है।

चन्द्र राशि से स्त्री का स्वभाव, प्रकृति, गुण -अवगुण आदि निर्धारित होते है।

चंद्रमा माता, मन, मस्तिष्क, बुद्धिमत्ता, स्वभाव, जननेन्द्रियाँ, प्रजनन सम्बंधी रोगों, गर्भाशय अंडाशय, मूत्र -संस्थान, छाती और स्तन का कारक है..इसके साथ ही स्त्री के मासिक -धर्म ,गर्भाधान एवं प्रजनन आदि महत्वपूर्ण क्षेत्र भी इसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

चंद्रमा मन का कारक है ,इसका निर्बल और दूषित होना मन एवं मति को भ्रमित कर किसी भी इंसान को पागल तक बना सकता है।

कुंडली में चंद्रमा की कैसी स्थिति होगी यह किसी भी महिला के आचार -व्यवहार से जाना जा सकता है।

अच्छे चंद्रमा की स्थिति में कोई भी महिला खुश -मिजाज होती है। चेहरे पर चंद्रमा की तरह ही उजाला होता है। यहाँ गोरे रंग की बात नहीं की गयी है क्योंकि चंद्रमा की विभिन्न ग्रहों के साथ युति का अलग -अलग प्रभाव हो सकता है।

कुंडली का अच्छा चंद्रमा किसी भी महिला को सुहृदय ,कल्पनाशील और एक सटीक विचारधारा युक्त करता है।

अच्छा चन्द्र महिला को धार्मिक और जनसेवी भी बनाता है।

लेकिन किसी महिला की कुंडली में यही चन्द्र नीच का हो जाये या किसी पापी ग्रह के साथ या अमावस्या का जन्म को या फिर क्षीण हो तो महिला सदैव भ्रमित ही रहेगी। हर पल एक भय सा सताता रहेगा या उसको लगता रहेगा कोई उसका पीछा कर रहा है या कोई भूत -प्रेत का साया उसको परेशान कर रहा है। कमजोर या नीच का चन्द्र किसी भी महिला को भीड़ भरे स्थानों से दूर रहने को उकसाएगा और एकांतवासी कर देता है धीरे-धीरे।

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महिला को एक चिंता सी सताती रहती है जैसे कोई अनहोनी होने वाली है। बात-बात पर रोना या हिस्टीरिया जैसी बीमारी से भी ग्रसित हो सकती है। बहुत चुप रहने लगती है या बहुत ज्यादा बोलना शुरू कर देती है। ऐसे में तो घर-परिवार और आस पास का माहौल खराब होता ही है।

बार-बार हाथ धोना, अपने बिस्तर पर किसी को हाथ नहीं लगाने देना और देर तक नहाना भी कमजोर चन्द्र की निशानी है।

ऐसे में जन्म-कुंडली का अच्छी तरह से विश्लेषण करवाकर उपाय करवाना चाहिए।

♐उपाय♐
अगर किसी महिला के पास कुंडली नहीं हो तो ये सामान्य उपाय किये जा सकते हैं, जैसे शिव आराधाना,अच्छा मधुर संगीत सुनें, कमरे में अँधेरा न रखें,हल्के रंगों का प्रयोग करें।

पानी में केवड़े का एसेंस डाल कर पियें, सोमवार को एक गिलास ढूध और एक मुट्ठी चावल का दान मंदिर में दं, और घर में बड़ी उम्र की महिलाओं के रोज चरण -स्पर्श करते हुए उनका आशीर्वाद अवश्य लें। छोटे बच्चों के साथ बैठने से भी चंद्रमा अनुकूल होता है।
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♐मंगल⏬

ग्रहों का सेनापति मंगल, अग्नितत्व प्रधान तेजस ग्रह है। इसका रंग लाल है और यह रक्त-संबंधो का प्रतिनिधित्व करता है। जिस किसी भी स्त्री की जन्म कुंडली में मंगल शुभ और मजबूत स्थिति में होता है उसे वह प्रबल राज योग प्रदान करता है। शुभ मंगल से स्त्री अनुशासित, न्यायप्रिय,समाज में प्रिय और सम्मानित होती है।

जब मंगल ग्रह का पापी और क्रूर ग्रहों का साथ हो जाता है तो स्त्री को मान -मर्यादा भूलने वाली ,क्रूर और हृदय हीन भी बना देता है।

मंगल रक्त और स्वभाव में उत्तेजना, उग्रता और आक्रामकता लाता है इसीलिए जन्म-कुंडली में विवाह से संबंधित भावों--जैसे द्वादश, लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम व अष्टम भाव में मंगल की स्थिति को विवाह और दांपत्य जीवन के लिए अशुभ माना जाता है।

ऐसी कन्या मांगलिक कहलाती है।

लेकिन जिन स्त्रियों की जन्म कुंडली में मंगल कमजोर स्थिति में हो तो वह आलसी और बुजदिल होती है,थोड़ी सी डरपोक भी होती है।

मन ही मन सोचती है पर प्रकट रूप से कह नहीं पाती और मानसिक अवसाद में घिरती चली जाती है।

⏬उपाय⏬
कमजोर मंगल वाली स्त्रियाँ हाथ में लाल रंग का धागा बांध कर रखे और भोजन करने के बाद थोड़ा सा गुड़ जरुर खा लें। ताम्बे के गिलास में पानी पियें और अनामिका में ताम्बे का छल्ला पहन लें।

जिन स्त्रियों की जन्म कुंडली में मंगल उग्र स्थिति में होता है उनको लाल रंग कम धारण करना चाहिए और मसूर की दाल का दान करना चाहिए। रक्त-सम्बन्धियों का सम्मान करना चाहिए जैसे बुआ, मौसी, बहन,भाई और अगर शादी शुदा है तो पति के रक्त सम्बन्धियों का भी सम्मान करें .

हनुमान जी की शरण में रहना कैसे भी मंगल दोष को शांत रखता है।
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बुध♐

बुध ग्रह एक शुभ और रजोगुणी प्रवृत्ति का है। यह किसी भी स्त्री में बुद्धि, निपुणता, वाणी ..वाकशक्ति, व्यापार, विद्या में बुद्धि का उपयोग तथा मातुल पक्ष का नैसर्गिक कारक है। यह द्विस्वभाव, अस्थिर और नपुंसक ग्रह होने के साथ-साथ शुभ होते हुए भी जिस ग्रह के साथ स्थित होता है, उसी प्रकार के फल देने लगता है। अगर शुभ ग्रह के साथ हो तो शुभ, अशुभ ग्रह के अशुभ प्रभाव देता है।

अगर यह पाप ग्रहों के दुष्प्रभाव में हो तो स्त्री कटु भाषी, अपनी बुद्धि से काम न लेने वाली यानि दूसरों की बातों में आने वाली या हम कह सकते हैं कि कानाें की कच्ची होती है। जो घटना घटित भी न हुई उसके लिए पहले से ही चिंता करने वाली और चर्मरोगों से ग्रसित हो जाती है।

बुध बुद्धि का परिचायक भी है अगर यह दूषित चंद्रमा के प्रभाव में आ जाता है तो स्त्री को आत्मघाती कदम की तरफ भी ले जा सकता है।

जिस किसी भी स्त्री का बुध शुभ प्रभाव में होता है वे अपनी वाणी के द्वारा जीवन की सभी ऊँचाइयों को छूती हैं, अत्यंत बुद्धिमान, विद्वान् और चतुर और एक अच्छी सलाहकार साबित होती है। व्यापार में भी अग्रणी तथा कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी समस्याओं का हल निकाल लेती हैं।

उपाय♓
हरे मूंग (साबुत), हरी पत्तेदार सब्जी का सेवन और दान, हरे वस्त्र को धारण और दान देना उपुयक्त है। तांबे के गिलास में जल पीना चाहिए। अगर कुंडली न हो और मानसिक अवसाद ज्यादा रहता हो तो सफेद और हरे रंग के धागे को आपस में मिला कर अपनी कलाई में बाँध लेना चाहिए।
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बृहस्पति♐

बृहस्पति एक शुभ और सतोगुणी ग्रह है। इसे गुरु की संज्ञा भी दी गयी है और बृहस्पति देवताओं के गुरु भी हैं।

बृहस्पति बुद्धि, विद्वत्ता, ज्ञान, सदगुणों, सत्यता, सच्चरित्रता, नैतिकता, श्रद्धा, समृद्धि, सम्मान, दया एवं न्याय का नैसर्गिक कारक होता है। किसी भी स्त्री के लिए यह पति, दाम्पत्य,पुत्र और घर-गृहस्थी का कारक होता है।

अशुभ ग्रहों के साथ या दूषित बृहस्पति स्त्री को स्वार्थी, लोभी और क्रूर विचारधारा की बना देता है।दाम्पत्य-जीवन भी दुखी होता है और पुत्र-संतान की भी कमी होती है। पेट और आँतों से सम्बन्धित रोग भी पीड़ा दे सकते है।

जन्म- कुंडली में शुभ बृहस्पति किसी भी स्त्री को धार्मिक,न्याय प्रिय और ज्ञानवान, पति -प्रिय और उत्तम संतान वती बनाता है। स्त्री विद्वान होने के साथ -साथ बेहद विनम्र भी होती है।
उपाय♐
कमजोर बृहस्पति हो तो पुखराज रत्न धारण किया जा सकता है पर किसी ज्योतिष अाचार्य  की राय ले कर ही। गुरुवार का व्रत रखा जा सकता है। स्वर्णाभूषण धारण, पीले रंग का वस्त्र धारण और पीले भोजन का सेवन किया जा सकता है। एक चपाती पर एक चुटकी हल्दी लगाकर खाने से भी बृहस्पति अनुकूल हो सकते हैं।

उग्र बृहस्पति को शांत करने के लिए बृहस्पति वार का व्रत करना, पीले रंग और पीले रंग के भोजन से परहेज करना चाहिए बल्कि उसका दान करना चाहिए ,केले के वृक्ष की पूजा करनी चाहिए और विष्णुभगवान् को केले अर्पण करना चाहिए और छोटे बच्चों ,मंदिर में केले का दान और गाय को केला खिलाना चाहिए।

अगर दाम्पत्य जीवन कष्टमय हो तो हर बृहस्पति वार को एक चपाती पर आटे की लोई में थोड़ी सी हल्दी, देशी घी और चने की दाल ( सभी एक चुटकी मात्र ही ) रख कर गाय को खिलायें।

कई बार पति-पत्नी अलग-अलग जगह नौकरी करते हैं और चाह कर भी एक जगह नहीं रह पाते तो पति -पत्नी दोनों को ही गुरुवार को चपाती पर गुड़ की डली रख कर गाय को खिलाना चाहिए। और सबसे बड़ी बात यह है कि झूठ से जितना परहेज किया जाय, बुजुर्गों और अपने गुरु, शिक्षकों के प्रति जितना सम्मान किया जाये उतना ही बृहस्पति अनुकूल होते जायेंगे।
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शुक्र♐

शुक्र एक शुभ एवं रजोगुणी ग्रह है। यह विवाह, वैवाहिक जीवन, प्यार, रोमांस, जीवन साथी तथा यौन सम्बन्धों का नैसर्गिक कारक है। यह सौंदर्य, जीवन का सुख, वाहन, सुगंध और सौन्दर्य प्रसाधन का कारक भी है।

किसी भी स्त्री की कुंडली में जैसे बृहस्पति ग्रह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, वैसे ही शुक्र भी दाम्पत्य जीवन में प्रमुख भूमिका निभाता है।

कुंडली का अच्छा शुक्र चेहरा देखने से ही प्रतीत हो जाता है। यह स्त्री के चेहरे को आकर्षण का केंद्र बनाता है। यहाँ यह जरुरी नहीं कि स्त्री का रंग गोरा है या सांवला। सुन्दर -नेत्र और सुंदर केशराशि से पहचाना जा सकता है। स्त्री का शुक्र शुभ ग्रहों के सान्निध्य में है तो वह सौंदर्य-प्रिय भी होती है। अच्छे शुक्र के प्रभाव से स्त्री को हर सुख सुविधा प्राप्त होती है। वाहन, घर, ज्वेलरी, वस्त्र सभी उच्च कोटि के। किसी भी वर्ग की औरत हो, उच्च, मध्यम या निम्न उसे अच्छा शुक्र सभी वैभव प्रदान करता ही है। यहाँ यह कहना भी जरुरी है कि अगर आय के साधन सीमित भी हाे तो भी वह ऐशो आराम से ही रहती है।

अच्छा शुक्र किसी भी स्त्री को गायन, अभिनय, काव्य-लेखन की ओर प्रेरित करता है। चन्द्र के साथ शुक्र हो तो स्त्री भावुक होती है और अगर साथ में बुध का साथ भी मिल जाये तो स्त्री लेखन के क्षेत्र में पारंगत होती है और साथ ही वाक्पटु भी, बातों में उससे शायद ही कोई जीत पाता हो।

अच्छा शुक्र स्त्री में मोटापा भी देता है। जहाँ बृहस्पति स्त्री को थुलथुला मोटापा देकर अनाकर्षक बनाता है वहीं शुक्र से आने वाला मोटापा स्त्री को और भी सुन्दर दिखाता है। यहाँ हम शुभा मुद्गल और किरण खेर, फरीदा जलाल का उदाहरण दे सकते हैं।

कुंडली का बुरा शुक्र या पापी ग्रहों का सान्निध्य या कुंडली के दूषित भावों का साथ स्त्री में चारित्रिक दोष भी उत्पन्न करवा सकता है। यह विलम्ब से विवाह, कष्टप्रद दाम्पत्य जीवन, बहु विवाह, तलाक की ओर भी इशारा करता है। अगर ऐसा हो तो स्त्री को हीरा पहनने से परहेज करना चाहिए।

कमजोर शुक्र स्त्री में मधुमेह, थाइराईड, यौन रोग, अवसाद और वैभव हीनता लाता है।
उपाय♐
शुक्र को अनुकूल करने के लिए शुक्रवार का व्रत और माँ लक्ष्मी जी की आराधना करनी चाहिए। चावल, दही, कपूर, सफेद-वस्त्र, सफेद पुष्प का दान देना अनुकूल रहता है। छोटी कन्याओं को इलायची डाल कर खीर भी खिलानी चाहिए।

कनक - धारा, श्री सूक्त, लक्ष्मी स्तोत्र, लक्ष्मी चालीसा का पाठ और लक्ष्मी मन्त्रों का जाप भी शुक्र को बलवान करता है। माँ लक्ष्मी को गुलाब का इत्र अर्पण करना विशेष फलदायी है।
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शनि♐

शनि ग्रह तमोगुणी और पाप प्रवृत्ति का है। यह सबसे धीमा चलने वाला, शीतल, निस्तेज, शुष्क, उदास और शिथिल ग्रह है। इसे वृद्ध ग्रह माना गया है। इसलिए इसे दीर्घायु प्रदायक या आयुष्कारक ग्रह कहा गया है।

यह कुंडली में कान, दांत, अस्थियों, स्नायु, चर्म, शरीर में लौह तत्व व वायु तत्व, आयु, जीवन, मृत्यु , जीवन शक्ति, उदारता, विपत्ति, भूमिगत साधनों और अंग्रेजी शिक्षा का कारक है।

किसी भी स्त्री की कुंडली में अच्छा शनि उसे उदार, लोकप्रिय बनाता है और तकनीकी ज्ञान में अग्रणी रखता है। वह हर क्षेत्र में अग्रणी हो कर प्रतिनिधित्व करती है। राजनीति में भी उच्च पद प्राप्त करती है। दूषित शनि विवाह में विलम्ब कारक भी है और निम्न स्तर के जीवन साथी की प्राप्ति की ओर भी संकेत करता है।

दूषित शनि स्त्री को ईष्र्यालु और हिंसक भी बना देता है। यह स्त्री में निराशा, उदासीनता और नीरसता का समावेश कर उसके दाम्पत्य जीवन को कष्टमय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता और धीरे-धीरे स्त्री अवसाद की तरफ बढ़ने लग जाती है।

स्त्रियों में कमर-दर्द, घुटनों का दर्द या किसी भी तरह का मांसपेशियों का दर्द दूषित शनि का ही परिणाम है। चंद्रमा के साथ शनि स्त्री को पागलपन का रोग तक दे सकता है। इसके लिए स्त्री को काले रंग का परहेज और अधिक से अधिक हल्के और श्वेत रंगों का प्रयोग करना चाहिए।
उपाय♐
शनि को अनुकूल बनाने के लिए स्त्री को न केवल अपने परिवार के ही बल्कि सभी वृद्धजनों का सम्मान करना चाहिए। अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और सेवकों के प्रति स्नेह और उनके हक और हितों की रक्षा भी करें। देश के प्रति सम्मान की भावना रखे। शनि ईमानदारी और सच्चाई से प्रसन्न रहता है।

शनि को न्यायाधीश भी माना गया है तो यह अपनी दशा-अंतर दशा में अपना सुफल या कुफल जरुर देता है कर्मों के अनुसार।

शनि अगर प्रतिकूल फल दे रहा हो तो हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए। मंगलवार को चमेली के तेल का दीपक हनुमान जी के आगे जलाना चाहिए। शनि चालीसा, हनुमान चालीसा का पाठ विशेष लाभ देगा। अगर शनि के कारण हृदय रोग परेशान करता हो तो सूर्य को जल और आदित्य-हृदय स्तोत्र का पाठ लाभ देगा और अगर मानसिक रोग के साथ सर्वाइकल का दर्द हो तो शिव आराधना विशेष लाभ देगी। काले और गहरे नीले रंग का परित्याग शनि को अनुकूल बना सकता है।

नीलम का धारण भी शनि को अनुकूल बनाता है पर किसी अच्छे ज्योतिषी से पूछ कर ही।
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राहु♐

राहु एक तमोगुणी म्लेच्छ और छाया ग्रह माना गया है। इसका प्रभाव शनि की भांति ही होता है।

यह तीक्ष्ण बुद्धि, वाकपटुता, आत्मकेंद्रिता, स्वार्थ, विघटन और अलगाव, रहस्य, मति भ्रम, आलस्य छल - कपट ( राजनीति ) , तस्करी ( चोरी ), अचानक घटित होने वाली घटनाओं, जुआ और झूठ का कारक है।

राहु से प्रभावित स्त्री एक अच्छी जासूस या वकील, अच्छी राजनीतिज्ञ हो सकती है। वह आने वाली बात को पहले ही भांप लेती है। विदेश यात्राएं बहुत करती है।

कुंडली में राहु जिस राशि में स्थित होता है वैसे ही परिणाम देने लगता है। अगर बृहस्पति के साथ या उसकी राशि में हो तो स्त्री को ज्योतिष में रूचि होगी। शनि के प्रभाव में हो तो तांत्रिक-विद्या में निपुण होगी। चंद्रमा के साथ हो तो वह कई सारे वहमों में उलझी रहेगी, जैसे उसे कुछ दिखाई दे रहा है (भूत-प्रेत आदि)...., या भयभीत रहती है। अगर वह ऐसा कहती है तो गलत नहीं कह रही होती क्योंकि अगर स्त्री के लग्न में राहु हो या राहु की दशा-अन्तर्दशा में ऐसी भ्रम की स्थिति हो जाया करती है।

राहु से प्रभावित स्त्री की वाणी में कटुता आ जाती है। वह थोड़ी घमंडी भी हो जाया करती है। भ्रमित रहने के कारण वह कई बार सही गलत की पहचान भी नहीं कर पाती जिसके फलस्वरूप उसका दाम्पत्य जीवन भी नष्ट होते देखा गया है। राहु के दूषित प्रभाव के कारण स्त्री चर्म -रोग, मति-भ्रम, अवसाद रोग से ग्रस्त हो सकती है।

उपाय♐

राहु को शांत करने के लिए दुर्गा माँ की आराधना करनी चाहिए। खुल कर हँसना चाहिए। मलिन और फटे वस्त्र नहीं पहनना चाहिए। गहरे नीले रंग से परहेज करना चाहिए। काले रंग की गाय की सेवा करनी चाहिए। मधुर संगीत सुनना चाहिए। रामरक्षा स्तोत्र का पाठ भी लाभदायक रहेगा। इसकी शांति के लिए गोमेद रत्न धारण किया जा सकता है लेकिन किसी अच्छे ज्योतिषीय की राय ले कर ही।
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केतु♒♒

केतु ग्रह उष्ण, तमोगुणी पाप ग्रह है।केतु का अर्थ ध्वजा भी होता है। किसी स्वगृही ग्रह के साथ यह हो तो उस ग्रह का फल चैगुना कर देता है।यह नाना, ज्वर, घाव, दर्द, भूत-प्रेत, आंतों के रोग, बहरापन और हकलाने का कारक है। यह मोक्ष का कारक भी माना जाता है।

केतु मंगल की भांति कार्य करता है। यदि दोनों की युति हो तो मंगल का प्रभाव दुगुना हो जाता है। राहु की भांति केतु भी छाया ग्रह है इसलिए इसका अपना कोई फल नहीं होता है। जिस राशि में या जिस ग्रह के साथ युति करता है वैसा ही फल देता है।

केतु से प्रभावित महिला कुछ भ्रमित सी रहती है। शीघ्र निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती क्योंकि यह ग्रह मात्र धड़ का ही प्रतीक होता है और राहु इस देह का कटा सिर होता है।

अच्छा केतु महिला को उच्च पद, समाज में सम्मानित, तंत्र-मन्त्र और ज्योतिष का ज्ञाता बनाता है।

बुरा केतु महिला की बुद्धि भ्रमित कर उसे सही निर्णय लेने में बाधित करता है। चर्म रोग से ग्रसित कर देता है। काम-वासना की अधिकता भी कर देता है जिसके फलस्वरूप कई बार दाम्पत्य -जीवन कष्टमय हो जाता है। वाणी भी कटु कर देता है। केतु का प्रभाव अलग-अलग ग्रहों के साथ युति और अलग-अलग भावों में स्थिति होने के कारण ज्यादा या कम हो सकता है।
उपाय♐♐♐♐
केतु के लिए लहसुनिया नग उपयुक्त माना गया है। मंगल वार का व्रत और हनुमान जी की आराधना विशेष फलदायी होती है।गणेश चालीसा का पाठ भी विशेष फलदायी हो सकता है। चिड़ियों को बाजरी के दाने खिलाना और भूरे-चितकबरे वस्त्र का दान तथा इन्हीं रंगों के पशुओं की सेवा करना उचित रहेगा।

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