Sunday, 20 February 2022

क्या आप अस्थमा पेशेंट हैं तो यह करके भी देखें.

क्या आप अस्थमा पेशेंट हैं तो यह करके भी देखें.

सांस की बीमारी (दमा या अस्थमा) एक आम रोग है। वर्तमान समय में अधिकांश लोग इससे पीडि़त हैं। आमतौर पर यह रोग अनुवांशिक होता है तो कुछ लोगों को मौसम के कारण हो जाता है। इसके कारण रोगी कोई भी काम ठीक से नहीं कर पाते और जल्दी थक जाते हैं। मेडिकल साइंस द्वारा इस रोग का संपूर्ण उपचार संभव है। साथ ही यदि नीचे लिखे उपायों को भी किया जाए तो इस रोग में जल्दी आराम मिलता है।

1- शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से लगातार तीन सोमवार तक एक सफेद रूमाल में मिश्री एवं चांदी का एक चौकोर टुकड़ा बांधकर बहते जल में प्रवाहित करें तथा शिवजी को चावल के आटे का दीपक कपूर मिश्रित घी के साथ अर्पित करें। श्वास रोग दूर हो जाएंगे।

2- रविवार को एक बर्तन में जल भरकर उसमें चांदी की अंगूठी डालकर सोमवार को खाली पेट उस जल का सेवन करें। दमा रोग दूर हो जाएगा।

3- किसी भी मास के प्रथम सोमवार को विधि-विधानपूर्वक चमेली की जड़ को अभिमंत्रित करके सफेद रेशमी धागे में बांधकर गले में धारण करें और प्रत्येक सोमवार को बार-बार आइने में अपना चेहरा देंखे। सांस की सभी बीमारियां दूर हो जाएंगी।

4- सांस की नली में सूजन, सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों में सूजन के कारण कफ जमने अथवा खांसी से मुक्ति पाने के लिए किसी शुभ समय में केसर की स्याही और तुलसी की कलम द्वारा भोजपत्र पर चंद्र यंत्र का निर्माण करवाकर गले में धारण करें। श्वास संबंधी सभी रोग दूर हो जाएंगे।

Saturday And saturn

From Eating Brinjal To Buying Iron Items, Avoid Purchasing These Common Items On A Saturday, For It May Bring Shani Related Problem & Money Loss
Indian and western astrologers believe that the nine planets of solar system affect a peson's life in different ways owing to the radiations they emit. These radiations are associated with different colours and influencing specific body parts.
So if you have heard an astrologer say that Saturn or Shani is bringing trouble in your horoscope, then you would like to do some remedies for it. And those who have experienced Shani's blessings, you can strengthen it even more.
There are certain items related to Shani Dev or planet Saturn, which according to astrology, a person should not bring home or buy on a Saturday. Otherwise it may lead to bad health or financial losses.
Brinjal
Refrain from both buying and consuming brinjal on Saturday. Also avoid buying black pepper on this day to keep Shani's wrath at bay.Yes! You may not know but astrologers say that buying salt on a Saturday attracts financial trouble. You should donate salt on this day to a temple or any place of worship.This metal is realted to Shani. Don't buy iron items, even a new vehicle on a Saturday. Chances of accidents would be reduced, claim astrologers.This is one of the major things related to Lord Shani. Don't consume this daal on a Saturday. Rather cook and donate it to the poor. You may also feed the raw cereal grains to a crow.Black may be your favourite colour, but avoid buying black clothes on Saturday if your Shani is malefic. It may attract bad luck.Do not buy mustard oil this day. Rather donate it to the poor. Also, pour some of it on Shani's idol. This brings auspicious results.If you are buying a wooden furniture, don't make its delivery on a Saturday.

Saturday, 19 February 2022

प्रमुख 9 श्राप (दोष) जिसके कारण नहीं होती संतान की प्राप्ति*

*प्रमुख 9 श्राप (दोष) जिसके कारण नहीं होती संतान की प्राप्ति*
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*ज्योतिष मान्यता के अनुसार वैसे तो कई तरह के श्राप या योग बताए गए हैं जिसके चलते पहले तो संतान नहीं होती है, संतान हो जाती है तो संतान को कष्ट होता है या संतान की मृत्यु भी हो सकती है। पराशर संहिता में भी कुछ इसी तरह के शापों का वर्णन किया गया है।*
 
*⚜️1. सर्प शाप :–* इस शाप के प्रमुख आठ योग या प्रकार बताए गए हैं। यह योग राहु के कारण बनता है। इसके लिए नाग प्रतिमा बनाकर विधिपूर्वक पूजा की जाए और अंत में हवन कर दान किया जाए तो इस शाप का प्रभाव नष्ट हो जाता है। इससे नागराज प्रसन्न होकर कुल की वृद्धि करते हैं।
 
*⚜️2. पितृ शाप :–* कहते हैं कि यदि किसी जातक ने गतजन्म में अपने पिता के प्रति कोई अपराध किया है तो उसे इस जन्म संतान कष्ट होता है। यह कुल मिलाकर 11 योग या दोष है। यह दोष या योग सूर्य से संबंधित है। इसके अलावा अष्टम स्थान में राहु या अष्टमेश राहु से पापाक्रांत हो तो इसको पितृ दोष या पितर शाप भी कहा गया है। इसके उपाय हेतु पितृश्राद्ध करना चाहिए।
 
*⚜️3. मातृ शाप :–* ज्योतिष मान्यता अनुसार पंचमेश और चंद्रमा के संबंधों पर आधारित यह योग बनता है। मंगल, शनि और राहु से बनने वाले ये कुल 13 प्रकार के योग है। गत जन्म में किसी जातक ने यदि माता को किसी भी प्रकार से कष्ट दिया है तो यह योग बनता है। इसके उपाय के लिए माता की सेवा करना जरूरी है। इसके अलावा उक्त ग्रहों की शांति कराएं।

*⚜️4. भ्रातृ शाप :–* यह योग भी कुल 13 प्रकार का है जो कि पंचम भाव, मंगल और राहु के चलते बनता है। यदि किसी जातक ने गतजन्म में अपने भाई के प्रति कोई अपराध किया है तो यह शाप बनता है। इसके उपाय हेतु हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करें, हरिवंश पुराण का श्रवण करें, चान्द्रायण व्रत करें, पवित्र नदियों के किनारे शालिग्राम के सामने पीपल वृक्ष लगाएं तथा पूजन करें।
 
*⚜️5. मामा का शाप :–* यह योग पंचम भाव में बुध, गुरु, मंगल एवं राहु और लग्न में शनि के चलते बनता है। इस योग में शनि-बुध का विशेष योगदान होता है। कहते हैं कि‍ पिछले जन्म में जातक ने अपने मामा को किसी भी प्रकार से घोर कष्ट दिया होगा तो यह कुंडली में योग बना। इसके उपाय हेतु तालाब, बावड़ी, कुआं आदि बनवाने का विधान है। उसे बनवाकर वहां भगवान विष्णु की मूर्ति की स्थापना करें। 
 
*⚜️6. ब्रह्म शाप :–* यह योग या दोष कुल 7 प्रकार का होता है। नवें भाव में गुरु, राहु या पाप ग्रहों से यह योग बनता हैं। कहते हैं कि गत जन्म में किसी भी जातक ने यदि किसी ब्राह्मण को घोर कष्ट दिया है तो यह शाप बनता है। इसकी शांति हेतु पितृ शांति करें और फिर प्रायश्चित स्वरूप ब्राह्मणों को भोज कराकर उन्हें दक्षिणा दें।

*⚜️7. पत्नी का शाप :–* यह कुल 11 प्रकार का दोष या योग है जो सप्तम भाव में पाप ग्रहों के चलते बनता है। कहते हैं कि यदि किसी जातक ने गत जन्म में अपनी पत्नी को मृत्यु तुल्य कष्ट दिया होगा तो ही यह योग बना। इसके उपाय हेतु कन्याओं को भोज कराएं और किसी कन्या का विवाह कराएं। इसका उपाय किसी ज्योतिष से पूछें।
 
*⚜️8. प्रेत शाप :–* यह कुल 9 योग बताए गए हैं। खासकर यह दोष सूर्य और नवें भाव से संबंधित हैं। कहते हैं कि जो जातक अपने पितरों का श्राद्ध नहीं करता है वह अगले जन्म में अपुत्र हो जाता है। इस दोष की निवृत्ति के लिए पितृश्राद्ध करें।
 
*⚜️9. ग्रह दोष :–* यह योग कई प्रकार का होता है। यदि बुध और शुक्र के दोष में संतान हानि हो रही है तो इसके लिए भगवान शंकर का पूजन, गुरु और चंद्र के दोष में संतान गोपाल का पाठ, यंत्र और औषधि का सेवन, राहु के दोष से कन्या दान, सूर्य के दोष से भगवान विष्णु की आराधना, मंगल और शनि के दोष से षडंग शतरुद्रीय जप कराने चाहिए।
 
*⚜️संतान में रुकावट के कारण :–* जब पंचम भाव का स्वामी सप्तम में तथा सप्तमेश सभी क्रूर ग्रह से युक्त हो तो वह स्त्री मां नहीं बन पाती। पंचम भाव यदि बुध से पीड़ित हो या स्त्री का सप्तम भाव में शत्रु राशि या नीच का बुध हो, तो स्त्री संतान उत्पन्न नहीं कर पाती। पंचम भाव में राहु हो और उस पर शनि की दृष्टि हो तो, सप्तम भाव पर मंगल और केतु की नजर हो, तथा शुक्र अष्टमेश हो तो संतान पैदा करने में समस्या उत्पन्न होती हैं। सप्तम भाव में सूर्य नीच का हो अथवा शनि नीच का हो तो संतानोत्पत्ति में समस्या आती है।

Saturday, 29 May 2021

मयूरेश स्तोत्रं

|| अथ श्री मयूरेश स्तोत्रं || 
ब्रह्मोवाच 
पुराणपुरुषं देवं नानाक्रीडाकरं मुदा | 
मायाविनं दुर्विभाव्यं मयूरेशं नमाम्यहम् || 

परात्परं चिदानन्दं निर्विकारं ह्रदि स्थितम् | 
गुणातीतं गुणमयं मयूरेशं नमाम्यहम् || 

सृजन्तं पालयन्तं च संहरन्तं निजेच्छया | 
सर्वविघ्नहरं देवं मयूरेशं नमाम्यहम् || 

नानादैत्यनिहन्तारं नानारूपाणि बिभ्रतम् | 
नानायुधधरं भक्त्या मयूरेशं नमाम्यहम् || 

इन्द्रादिदेवतावृन्दैरभिष्टुतमहर्निशम् | 
सदसद्व्यक्तमव्यक्तं मयूरेशं नमाम्यहम् || 

सर्वशक्तिमयं देवं सर्वरूपधरं विभुम् | 
सर्वविद्याप्रवक्तारं मयूरेशं नमाम्यहम् || 

पार्वतीनन्दनं शम्भोरानन्दपरिवर्धनम् | 
भक्तानंदकरं नित्यं मयूरेशं नमाम्यहम् || 

मुनिध्येयं मुनिनुतं मुनिकामप्रपूरकम् | 
समष्टिव्यष्टिरूपं त्वां मयूरेशं नमाम्यहम् || 

सर्वज्ञाननिहन्तारं सर्वज्ञानकरं शुचिम् | 
सत्यज्ञानमयं सत्यं मयूरेशं नमाम्यहम् || 

अनेककोटिब्रह्माण्डनायकं जगदीश्वरम् | 
अनन्तविभवं विष्णुं मयूरेशं नमाम्यहम् || 

मयूरेश उवाच 
इदं ब्रह्मकरं स्तोत्रं सर्वपापप्रणाशनम् | 
सर्वकामप्रदं नृणां सर्वोपद्रवनाशनम् || 
कारागृहगतानां च मोचनं दिनसप्तकात् | 
आधिव्याधिहरं चैव भुक्तिमुक्तिप्रदं शुभम् || 

|| श्री मयूरेश स्तोत्रं सम्पूर्णं ||

Saturday, 23 January 2021

।श्री नीलकंठ स्तोत्रम।।

।श्री नीलकंठ स्तोत्रम।।


विनियोग -

ॐ अस्य श्री भगवान नीलकंठ सदा-शिव-स्तोत्र मंत्रस्य श्री ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्ठुप छन्दः, श्री नीलकंठ सदाशिवो देवता, ब्रह्म बीजं, पार्वती शक्तिः, मम समस्त पाप क्षयार्थंक्षे म-स्थै-आर्यु-आरोग्य-अभिवृद्धयर्थं मोक्षादि-चतुर्वर्ग-साधनार्थं च श्री नीलकंठ-सदाशिव-प्रसाद-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः।

ऋष्यादि-न्यास -

श्री ब्रह्मा ऋषये नमः शिरसि। अनुष्टुप छन्दसेनमः मुखे। श्री नीलकंठ सदाशिव देवतायै नमः हृदि। ब्रह्म बीजाय नमः लिंगे। पार्वती शक्त्यैनमः नाभौ। मम समस्त पाप क्षयार्थंक्षेम-स्थै-आर्यु-आरोग्य-अभिवृद्धयर्थं मोक्षादि-चतुर्वर्ग-साधनार्थंच श्री नीलकंठ-सदाशिव-प्रसाद-सिद्धयर्थे जविनियोगाय नमः सर्वांगे।

स्तोत्रम्

ॐ नमो नीलकंठाय, श्वेत-शरीराय, सर्पा लंकार भूषिताय, भुजंग परिकराय, नागयज्ञो पवीताय, अनेक मृत्यु विनाशाय नमः। युग युगांत काल प्रलय-प्रचंडाय, प्र ज्वाल-मुखाय नमः। दंष्ट्राकराल घोर रूपाय हूं हूं फट् स्वाहा। ज्वालामुखाय, मंत्र करालाय, प्रचंडार्क सहस्त्रांशु चंडाय नमः। कर्पूर मोद परिमलांगाय नमः।

ॐ इंद्र नील महानील वज्र वैलक्ष्य मणि माणिक्य मुकुट भूषणाय हन हन हन दहन दहनाय ह्रीं स्फुर स्फुर प्रस्फुर प्रस्फुर घोर घोर तनुरूप चट चट प्रचट प्रचट कह कह वम वम बंध बंध घातय घातय हूं फट् जरा मरण भय हूं हूं फट्‍ स्वाहा। आत्म मंत्र संरक्षणाय नम:।

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रीं स्फुर अघोर रूपाय रथ रथ तंत्र तंत्र चट् चट् कह कह मद मद दहन दाहनाय ह्रीं स्फुर स्फुर प्रस्फुर प्रस्फुर घोर घोर तनुरूप चट चट प्रचट प्रचट कह कह वम वम बंध बंध घातय घातय हूं फट् जरा मरण भय हूं हूं फट् स्वाहा।

अनंताघोर ज्वर मरण भय क्षय कुष्ठ व्याधि विनाशाय, शाकिनी डाकिनी ब्रह्मराक्षस दैत्य दानव बंधनाय, अपस्मार भूत बैताल डाकिनी शाकिनी सर्व ग्रह विनाशाय, मंत्र कोटि प्रकटाय पर विद्योच्छेदनाय, हूं हूं फट् स्वाहा। आत्म मंत्र सरंक्षणाय नमः।

ॐ ह्रां ह्रीं हौं नमो भूत डामरी ज्वालवश भूतानां द्वादश भू तानांत्रयो दश षोडश प्रेतानां पंच दश डाकिनी शाकिनीनां हन हन। दहन दारनाथ! एकाहिक द्वयाहिक त्र्याहिक चातुर्थिक पंचाहिक व्याघ्य पादांत वातादि वात सरिक कफ पित्तक काश श्वास श्लेष्मादिकं दह दह छिन्धि छिन्धि श्रीमहादेव निर्मित स्तंभन मोहन वश्याकर्षणोच्चाटन कीलना द्वेषण इति षट् कर्माणि वृत्य हूं हूं फट् स्वाहा।

वात-ज्वर मरण-भय छिन्न छिन्न नेह नेह भूतज्वर प्रेतज्वर पिशाचज्वर रात्रिज्वर शीतज्वर तापज्वर बालज्वर कुमारज्वर अमितज्वर दहनज्वर ब्रह्मज्वर विष्णुज्वर रूद्रज्वर मारीज्वर प्रवेशज्वर कामादि विषमज्वर मारी ज्वर प्रचण्ड घराय प्रमथेश्वर! शीघ्रं हूं हूं फट् स्वाहा।


।।ॐ नमो नीलकंठाय, दक्षज्वर ध्वंसनाय श्री नीलकंठाय नमः।।


।।इतिश्री नीलकंठ स्तोत्रम संपूर्ण:।।

Tuesday, 19 January 2021

गणाधिपस्तोत्रं

गणाधिपस्तोत्रम् 
 सरागिलोकदुर्लभं विरागिलोकपूजितम् । 
सुरासुरैर्नमस्कृतं जरादिमृत्युनाशकम् । 
गिरागुरुं श्रिया हरिं जयन्ति यत्पदार्चकाः । 
नमामि तं गणाधिपं कृपापयःपयोनिधिम् ॥ १ ॥ 
गिरीन्द्रजामुखाम्बुजप्रमोददानभास्करम् । 
करीन्द्रवक्त्रमानताघसंघवारणोद्यतम् । 
सरीसृपेशबद्धकुक्षिमाश्रयामि सन्ततम् । 
शरीरकान्तिनिर्जिताब्जबन्धुबालसन्ततिम् ॥ २ ॥ 
शुकादिमौनिवन्दितमं गकारवाच्यमक्षरम् । 
प्रकाशमिष्टदायिनं सकामनभ्रपङकये । 
चकासनं चतुर्भुजैर्विकासिपद्मपूजितम् । 
प्रकाशितात्मतत्त्वकं नमाम्यहं गणाधिपम् ॥ ३ ॥ 
नटाधिपत्वदायकं स्वरादिलोकदायकम् । 
जरादिरोगवारकं निराकृतासुरव्रजम् । 
कराम्बुजैरनसृणीन्विकारशून्यमानसैः । 
हृदा सदा विभावितं मुदा नमामि विघ्नपम् ॥ ४ ॥ 
श्रमापनोदनक्षमं समादितान्तरात्मना । 
 समादिभिः सदार्चितं क्षमाविधिं गणाधिपम् । 
रमाधवादिपूजितं यमान्तकात्मसम्भवम् । 
शमादिषड्गुणप्रदं नमामि तं विभुतये ॥ ५ ॥ 
गणाधिपस्य पंचकं नृणामभीष्टदायकम् । 
प्रणामपूर्वकं जनाः पठन्ति ये मुदायताः । 
भवन्ति ते विदाम्पुरः प्रगतिवैभवाः जना । 
चिरायुषोऽधिकाः श्रियाः सुसूनवो न संशयः ॥ ६ ॥ 
॥ इति श्रीमच्छंकराचार्यकृतं गणाधिपस्तोत्रं संपूर्णम् ॥

Tuesday, 30 June 2020

तुलसी नामाष्टक

तुलसी विष्णु प्रिया हैं। कार्तिक में तो तुलसी पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। अगर कोई अपने मन की बात, भगवान को सीधे न कह सके, तो वह तुलसी के माध्यम से अपनी बात, भगवान तक पहुंचा सकता है। भगवान कृष्ण भी किसी की बात सुनें या न सुनें, लेकिन तुलसी जी की बात, हर हाल में सुनते हैं। तो अगर आपको सुख, दु:ख भगवान से शेयर करना हो तो उसके लिये पुराणों में बताई गई विधि से, तुलसी माता की पूजा करनी होगी। इसी विधि से भगवान श्रीहरि विष्णु ने भी तुलसी को प्रसन्न किया थाभगवान श्रीकृष्ण को तुलसी महारानी अत्यधिक प्रिय है । श्रीकृष्ण की सभी पूजाओं में तुलसी अर्पित की जाती है । तुलसी पूजा करने के कई विधान दिए गए हैं । उनमें से एक तुलसी नामाष्टक का पाठ करने का विधान दिया गया है । जो व्यक्ति तुलसी नामाष्टक का नियमित पाठ करता है उसे अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है । इस नामाष्टक का पाठ पूरे विधान से करना चाहिए, विशेष रुप से कार्तिक माह में इस पाठ को अवश्य ही करना चाहिए !!

तुलसी नामाष्टक मंत्र : 
 
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
 
एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।


अर्थात् हे वृंदा! आप वृंदावनी, विश्वपूजिता, विश्वपावनी, पुष्पसारा, नंदनीय, तुलसी, कृष्ण जीवनी हो।आपको नमस्कार है। श्री तुलसी के पूजन के समय जो इन 8 नामों का पाठ करता है। वह अश्वमेघ यज्ञ के फल को प्राप्त करता है।