Thursday, 10 November 2022

*नवग्रह बीजमंत्र / जप संख्या और जप समय*

*नवग्रह बीजमंत्र / जप संख्या और जप समय*
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कष्ट निवारण और ग्रहपीड़ा शांति हेतु हिन्दू परंपरा में नवग्रहों के बीजमंत्र जप का विधान है. कष्टों और पीड़ा का संबंध जिस ग्रह से हो उसके बीजमंत्र जप बहुत लाभ देते हैं. विधिपूर्वक जप पूर्ण कर लेने पर संबंधित ग्रह की कृपा प्राप्त होती है और कष्टों का निवारण सहज ही हो जाता है.

नवग्रह मंत्र और जप संख्या इस प्रकार से हैं –

सूर्य – ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः
जप संख्या – 7000
जप समय – सूर्योदय काल

चंद्रमा – ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्राय नमः
जप संख्या – 11000
जप समय – संध्याकाल

मंगल – ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नमः
जप संख्या – 10000
जप समय – दिन का प्रथम प्रहर

बुध – ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नमः
जप संख्या – 9000
जप समय – मध्याह्न काल

बृहस्पति – ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नमः
जप संख्या – 19000
जप समय – प्रात:काल

शुक्र – ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नमः
जप संख्या – 18000
जप समय – ब्रह्मवेला

शनि – ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नमः
जप संख्या – 23000
जप समय – संध्याकाल

राहु – ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नमः
जप संख्या – 18000
जप समय – रात्रिकाल

केतु – ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: केतवे नमः
जप संख्या – 17000
जप समय – रात्रिकाल

जप संकल्प करने पर प्रतिदिन कम से कम एक माला (108 बार) जप आवश्यक है।
9971553732 

Sunday, 12 June 2022

Planetary Combinations to Become an Astrologer :-

Planetary Combinations to Become an Astrologer :-
Planetary Combinations in the Birth-chart
(1) To be an Astrologer, Mercury should be in a
strong position in the birth-chart. Because Mercury
is the planet of intelligence. Similarly, Jupiter should
also be strong and placed in the Gajakesari Yoga
with Moon. If this yoga is created in the Ascendant,
ninth, fifth or eighth house, then the person will
have an interest in Astrology.
(2) If Mercury or Jupiter is in conjunction or shares
an aspect relationship in the eighth house, then the
person will be curious to know the mysterious arts
and secrets.
(3) If Moon-Saturn have an aspect relationship in
the birth-chart or Moon is in conjunction with
Mercury and Saturn aspects both the planets or
Saturn-Moon and Mercury are in conjunction. In
addition, if Jupiter forms any kind of relationship
with Mercury or Venus, then the person will be
inclined towards Astrology.
(4) If the lord of the eighth house forms a yoga with
Moon or Saturn through an aspect relationship or
conjunction, or the eighth lord is in conjunction with
the fifth lord, then the person will develop an
interest in Astrology.
(5) If Mercury is located in the sign of Jupiter or
vice versa, even then the person will take enormous
interest in the knowledge of Astrology. In addition, if
the fifth lord or the ninth lord are in conjunction or
share an aspect relationship with Mercury or
Jupiter, then he will be a successful Astrologer.
(6) If Mercury, Jupiter, Ascendant lord, eighth lord,
fifth lord or the ninth lord are located in the tenth
house, the possibilities to become a successful
Astrologer will increase.
(7) The second house is the house of speech. If the
fifth lord, eighth lord, Mercury or Jupiter are in
conjunction, then the person will learn this art to
predict future.
(8) If the second lord, tenth lord, Ascendant lord or
else Mercury or Jupiter are in conjunction with the
fifth house, or the eighth lord aspects on all these
planets and their house lords, the person will
become a successful Astrologer and will earn his
income from the profession in Astrology.
(9) If the lord of the eighth house is located in the
Ascendant with the lord of the fifth house and
shares an aspect relationship or any kind of
relationship with the second lord or the eleventh
lord, then the person will achieve success in the
profession of Astrology.
(10) In the birth-chart of the Scorpio Ascendant, if
Jupiter, which is the kaarak of knowledge, is placed
in the second house in the sign of Sagittarius and
aspects the eighth house. And Ketu aspects the
eighth lord and is located in the fifth house in the
Pisces sign, which is the sign of Jupiter. Sun as the
tenth lord is in the fourth house, which is the house
of fame, and aspects the tenth house, and Saturn as
the lord of the fourth house located in the seventh
house and aspects Moon in the Ascendant. The
person will gain popularity and fame in the
profession of predicting future and will be a
successful Astrologer.
(11) If Mercury is located in the tenth house in the
birth-chart of Gemini Ascendant, Jupiter is aspected
by the fifth lord in the fifth house. The eighth lord
and the ninth lord are placed in the Saturn
Ascendant and aspect Ketu, which is the Kaarak
planet of mysterious arts and studies, and the
second lord is in the Moon Ascendant, then the
person will be proficient in the field of Astrology.
(12) In the birth-chart of Virgo Ascendant, if the fifth
lord, eighth lord, Saturn or Mars is located in the
Ascendant. The second lord or Venus as the ninth
lord is placed in its own sign and aspects the eighth
house. Jupiter in the Kendra of Pisces aspects the
Ascendant or the Ascendant lord i.e. Mercury. And
Ketu is placed in the twelfth house, which is the
house of liberation, and aspects the eighth house,
which is the house of the mysterious method.
Hence, the person who will have these planetary
combinations in his birth-chart, will be an expert i Astrology.

Tuesday, 22 February 2022

मोरपंख का महत्त्व

*मोरपंख का महत्त्व*
ज्योतिष में मोरपंख को सभी नौ ग्रहों का प्रतिनिधि माना गया है, विशेष तौर पर मोरपंख के कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जिन्हें किसी शुभ मुहूर्त में करने से सभी समस्याओं से तुरंत छुटकारा मिल जाता है।

श्रीकृष्ण का श्रृंगार मोर पंख के बिना अधूरा ही लगता है। वे अपने मुकुट में मोर पंख भी विशेष रूप से धारण करते हैं। 

मोर पंख का संबंध केवल श्रीकृष्ण से नहीं, बल्कि अन्य देवी-देवताओं से भी है। शास्त्रों के अनुसार मोर के पंखों में सभी देवी-देवताओं और सभी नौ ग्रहों का वास होता है। 

प्राचीन काल में एक मोर के माध्यम से देवताओं ने संध्या नाम के असुर का वध किया था। पक्षी शास्त्र में मोर और गरुड़ के पंखों का विशेष महत्व बताया गया है।

आइये जानते हैं मोर पंख आपके जीवन को किस तरह सुख- समृद्धि से भर देता है-
* मोर का शत्रु सर्प है. अत: ज्योतिष में जिन लोगों को राहू की स्थिति शुभ नहीं हो उन्हें मोर पंख सदैव अपने साथ रखना चाहिए।

* आयुर्वेद में मोर पंख से तपेदिक, दमा, लकवा, नजला और बांझपन जैसे दुसाध्य रोगों में सफलता पूर्वक चिकित्सा बताई गई है।

* जीवन में मोर पंख से कई तरह के संकट दूर किये जा सकते हैं. अचानक कष्ट या विपत्ति आने पर घर अथवा शयनकक्ष के अग्नि कोण में मोर पंख लगाना चाहिए. थोड़े ही समय में सकारात्मक असर होगा।

* धन-वैभव में वृद्धि की कामना से निवेदन पूर्वक नित्य पूजित मन्दिर में श्रीराधा-कृष्ण के मुकुट में मोर पंख की स्थापना करके/करवाकर 40वें दिन उस मोर पंख को लाकर अपनी तिजोरी या लॉकर में रख दें. धन-संपत्ति में वृद्धि होना प्रारम्भ हो जायेगी। सभी प्रकार के रुके हुए कार्य भी इस प्रयोग से बन जाते हैं।

* जिन लोगों की कुण्डली में राहू-केतु कालसर्प योग का निर्माण कर रहे हों उन्हें अपने तकिये के खोल में 7 मोर पंख सोमवार की रात्रि में डालकर उस तकिये का उपयोग करना चाहिए साथ ही शयनकक्ष की पश्चिम दिशा की दीवार पर मोर पंखों का पंखा जिसमें कम से कम 11 मोर पंख लगे हों लगा देना चाहिए।

 इससे कुण्डली में अच्छे ग्रह अपनी शुभ प्रभाव देने लगेंगे और राहू-केतु का अशुभत्व कम हो जायेगा।

* अगर बच्चा जिद्दी होता जा रहा हो तो उसे नित्य मोर पंखों से बने पंखे से हवा करनी चाहिए या अपने सीलिंग फैन पर ही मोर पंख पंखुड़ियों पर चिपका देना चाहिए।

* नवजात शिशु के सिरहाने चांदी के तावीज में एक मोर पंख भरकर रखने शिशु को डर नहीं लगेगा नजर इत्यादि का डर भी नहीं रहेगा।

* कोई शत्रु ज्यादा तंग कर रहा हो मोर के पंख पर हनुमान जी के मस्तक के सिंदूर से मंगलवार या शनिवार रात्रि में उस शत्रु का नाम लिखकर के अपने घर के मन्दिर में रात भर रखें।

 प्रात:काल उठकर बिना नहाये-धोये बहते पानी में बहा देने से शत्रु-शत्रुता छोड़कर मित्रवत् व्यवहार करने लगता है. इस तरह मोर पंख से हम अपने जीवन के अमंगलों को हटाकर मंगलमय स्थिति को ला सकते हैं।

Sunday, 20 February 2022

सात दिन के सात लकी कलर

सात दिन के सात लकी कलर
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रंग व्यक्तित्व को निखारते हैं। खुशी का अहसास कराते हैं। रंगों का अपना एक विशेष महत्व है। मन की भावनाएं भी दर्शाते हैं तो क्या रंग हमारे भाग्य को तय करने में भी कोई भूमिका निभाते हैं? कुछ रंगों से हमारा अच्छा तालमेल होता है, जो हमें 'पॉजीटिव एनर्जी' देते हैं। इसलिए कुछ खास रंग हमें ज्यादा आकर्षित करते हैं। लेकिन ज्योतिष पर यकीन करने वाले भी दिन के लिहाज से रंगों का चयन करने लगे हैं।

रविवार -इस दिन गुलाबी, सुनहरे और संतरी रंग का विशेष महत्व है। लेकिन खिले-खिले रंगों के पुराने परिधानों को रविवार के दिन पहनने से सप्ताह भर की थकान दूर हो जाती है।
इस दिन नए कपड़े नहीं पहनने की सलाह दी जाती है।

सोमवार - सोमवार यानी चंद्रमा का दिन । इसलिए इस दिन का रंग है सफेद, चमकीला या सिल्वर कलर। इस दिन क्रीम, आसमानी और हल्का पीला भी पहना जा सकता है। लेकिन निर्विवाद रूप से सफेद पहनना शुभ होता है। दिन को खुशनुमा व शांतिपूर्ण चाहते हैं तो सफेद के सिवा कोई दूसरा रंग मत सोचिए।

मंगलवार - मंगलवार हनुमान जी का दिन है। इसलिए इस दिन का विशेष रंग है भगवा, जिसे ऑरेंज कलर कहते हैं। इस दिन के ग्रह 'मंगल' के हिसाब से चैरी रेड या लाल के मिलते-जुलते शेड्स भी सौभाग्य के द्वार खोल सकते हैं।

बुधवार - बुधवार देव गणपति का, जिन्हें सबसे ज्यादा प्रिय है दूर्वा। इसलिए इस दिन हरे कलर का महत्व है। बुध ग्रह स्वयं भी हरे रंग का होता है। अत: जिन लोगों की वाणी में अवरोध हो या जिनकी वाणी कर्कश हो उन्हें हल्का हरा रंग सूट करेगा। लेकिन जो लोग उग्र वाणी के हैं उन्हें श्वेत रंग पहनना चाहिए।

गुरुवार - बृहस्पति देव और साईं बाबा का है। बृहस्पति देव स्वयं पीले हैं, तो इस दिन का रंग है पीला।इस दिन पीले के अलावा सुनहरा, गुलाबी, नारंगी और पर्पल भी ट्राय कर सकते हैं। लेकिन पीले के सभी शेड उत्तम है। दिन विजयी होगा।

शुक्रवार - मां का दिन होता है, जो सर्वव्यापी जगत जननी हैं।। इस दिन हमेशा साफ-सुथरे उजले कपड़े पहनना चाहिए। इसलिए यह दिन सभी रंगों का मिक्स या प्रिंटेड कपड़ों का होता है। इस दिन विशेष रूप से गुलाबी के सारे शेड्स और रंगबिरंगे फ्लोरल प्रिंटेड परिधान पहने जा सकते हैं। लंबी धारी वाले, चैक्स और छोटी प्रिंट के कपड़े इस दिन पहनिए और सफलता हासिल कीजिए

शनिवार - इस दिन नीला कलर पहना जाता है। यह रंग मन के उतार-चढ़ाव का होता है। आत्मविश्वास में वृद्धि के लिए जामुनी, बैंगनी, गहरा नीला और व्यवस्थित दिनचर्या के लिए नेवी ब्लू, स्काय ब्लू उचित रहेंगे। शनि अगर अनुकूल हो तो स्थिरता देते हैं। अत: इस दिन नीले के सारे शेड आपको सफलता देंगे।

जिन्न/आत्मा / खबिस/तांत्रिक क्रिया/किया-कराया आदि होने के लक्षण :-

जिन्न/आत्मा / खबिस/तांत्रिक क्रिया/किया-कराया आदि होने के लक्षण :-

1. रात को नीद नही आती होगी ।  
2.सुबह उठा नही जायेगा ।  
3.कमर और बदन मे दर्द रहेगा ।  
4.सीने पर भारीपन रहेगा ।  
5.गुस्सा बहुत तेज आयेगा ।  
6.थाई पे काले वा नीले निशान बन जाते होगे ।  
7.अपने साथ कुछ साया सा लगता होगा ।  
8अचानक से खुसबू / बदबू लगती होगी ।  
9.विपरीत लिंग से कम ही बनती होगी (पति पत्नी मे)।  
10.सपने गंदे आते होगे या डरावने आते होगे।  
11. सेहत दिन पे दिन गिर रही होगी ।
12. स्वास्थ्य खराब होने पर डॉक्टर की दवाई असर नहीं करती और जाँच भी नॉर्मल आती है।
13. अर्थिक स्थिति का अचानक खराब होना और घर के सभी सदस्यों में आपस में मतभेद होना।
14. बहुत ज्यादा चिड़चिड़ापन व मानसिक तनाव का होना।
15. सभी प्रकार के कार्यो में स्थायी रूप से रुकावट का होना और सभी कार्यो के रास्ते बंद होना।

ज्योतिष अनुसार सरकारी नौकरी के योग एवं उपाय

ज्योतिष अनुसार सरकारी नौकरी के योग एवं उपाय
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हमारे देश में कितने ही बेरोजगार व्यक्ति रोजगार की तलाश में इधर-भटक रहे हैं। युवावर्ग में अधिकांश युवा तो सरकारी नौकरी की कामना करते हैं और कामना इतनी तीव्र होती है, की हम भगवान् से भी केवल सरकारी नौकरी दिलवाने की प्रार्थना करते हैं। कुछ लोग तो इस हद तक पागल हो जाते हैं की टोटकों के चक्कर में भी फंस जाते हैं।

ऊपर वाले ने हमें दिमाग, एक स्वस्थ्य शरीर और साथ में इच्छा शक्ति दी है, तो अब क्या नौकरी दिलवाना भी इ।श्वर का ही कर्तव्य है? हम अपने दिमाग का केवल 13 प्रतिशत प्रयोग करते हैं और उसी से सारी जिन्दगी गुजार देते हैं, ऐसा नहीं है की हम इस प्रतिशत को बढ़ा नहीं सकते, अवश्य ही बढ़ा सकते हैं, पर उसके लिए दिमाग का प्रयोग करना पड़ता है।

कुंडली मे सरकारी नौकरी के योग
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व्यक्ति के जीवन में हो रहीं, छोटी या बड़ी हर प्रकार की घटनाओं के लिए कुंडली के ग्रहों की बहुत बड़ी भूमिका होती है। व्यक्ति को परिणाम भी उसी प्रकार के प्राप्त होते हैं, जिस प्रकार के कुंडली में ग्रहों की स्थिति होती है। अनेक बार ऐसा भी देखा गया है कि अथक मेहनत और परिश्रम के बाद भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी प्राप्ति में सफलता नहीं मिल पाती।  सरकारी नौकरी के निर्धारण में व्यक्ति की योग्यता, शिक्षा, अनुभव के साथ ही उसकी जन्मकुंडली में बैठे ग्रह योगों का हाथ भी होता है। आइये जानते हैं कि वह कौन-से ग्रह योग होते हैं जो सरकारी नौकरी प्राप्ति में सहायता करते हैं। –

ज्योतिषीय सिद्धांत के अनुसार, दसवें भाव के स्वामी की नवें भाव के स्वामी के साथ दृष्टि अथवा क्षेत्र और राशि स्थानांतर संबंध उसके लिए विशिष्ट राजयोग का निर्माण करते हैं।कुंडली में यदि केंद्र में चन्द्रमा, ब्रहस्पति एक साथ हैं तो उस स्थिति में भी सरकारी नौकरी के लिए शुभ योग बनता है। इसी प्रकार चन्द्रमा और मंगल भी अगर केंद्र में स्थित हैं तो सरकारी नौकरी की आशा बढ़ जाती हैं।यदि व्यक्ति का लग्न मेष, मिथुन, सिंह, वृश्चिक, वृष या तुला है तो ऐसे में शनि ग्रह और गुरु(ब्रहस्पति) का एक-दूसरे से केंद्र या त्रिकोण में होना, सरकारी नौकरी के लिए अच्छा योग बनाते हैं।कुंडली में दसवां स्थान को कार्यक्षेत्र के लिए जाना जाता है। सरकारी नौकरी के योग को जानने के लिए इसी घर का विश्लेषण किया जाता है। दसवें स्थान में यदि सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति की दृष्टि पड़ रही होती है तो सरकारी नौकरी का प्रबल योग बनता है। अपवादस्वरूप यह भी देखने में आता है कि जातक की कुंडली में दसवें स्थान में तो यह ग्रह होते हैं किंतु फिर भी जातक को नौकरी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा होता है तो ऐसे में अगर सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति पर किसी पाप ग्रह (अशुभ ग्रह) की दृष्टि पड़ रही होती है, तो जातक को सरकारी नौकरी प्राप्ति में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

नौकरी प्राप्त करने के कुछ सरल उपाय 
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नियमित चालीस दिनों तक सुबह नंगे पैर हनुमान जी के मंदिर में जाकर उन्हें लाल गुलाब का फूल चढ़ाएं। यह अचूक वैदिक उपाय शीध्र ही अच्छी नौकरी दिलवाने में सहायक होता है।

प्रतिदिन चन्दन की माला से 11 बार ओम् वक्रतंण्डाय हूं मंत्र का जाप करें। इससे उपाय से भी सरकारी नौकरी मिलने में सहायता प्राप्त होती है।

प्रत्येक सोमवार के दिन शिवजी के मंदिर में जाकर शिवलिंग पर एक थैली कच्चा दूध तथा साबुत चावल चढ़ाएं और सच्चे मन प्रार्थना करें। ऐसा करने से नौकरी मिलने में आ रही हर तरह की बाधा का नाश होता है।

रोजाना सुबह पक्षियों को दाना देने से रोजगार और नौकरी की संभावना बढ़ जाती है। आप बाजरा या सात प्रकार के अनाजों का मिश्रण भी पक्षियों को दे सकते हैं। ऐसा करने से मनचाही नौकरी प्राप्त होती है।

नौकरी के लिए इंटरव्यू देने से पहले सुबह स्नान करते समय बाल्टी या टब में हल्दी मिलाकर स्नान करें और प्रभु के सामने 11 अगरबत्ती जलाकर अपनी सफलता की कामना करें।

यदि आप सरकारी नौकरी ही चाहते हैं, तो हिंदी  महीने के प्रथम सोमवार के दिन सूर्य के ढ़लते समय सफेद कपड़े में काले चावल और कुछ दक्षिणा को बांध कर काली माता के मंदिर में चढ़ाएँ। 11 महिने तक लगातार ऐसा करने से आपको मनचाही नौकरी व सरकारी नौकरी के अवसर प्राप्त हो जाएगें।

सरकारी नौकरी और अच्छे कारोबार की प्राप्ति के लिए घर में उड़ते हुए हनुमान जी की फोटो लगाएं।

कोई भी उपाय करने से नौकरी न मिल रही हो तो शुक्ल पक्ष में लगातार 21 दिनों तक कुंए में दूध डालें। कुंआ खाली या सूखा हुआ नहीं होना चाहिए।

नौकरी के प्राप्त करने के लिए घर से निकलते समय एक नींबू पर चार लौंग वारकर चारों दिशाओं में गाड़ दें और 108  बार ‘‘ओम् श्री हनुमते नमः’’ का जाप करें। और उस नींबू को अपने साथ ले जाएं। आपको नौकरी मिलने की संभावना प्रबल हो जाएगी।

नौकरी पाने के लिए घर से निकलते समय चना और गुड़ खाकर निकलें और रास्ते में किसी गाय को भी अपने हाथों से गुड-चना खिला दें। आपका काम अवश्य बन जाएगा।

प्रत्येक शनिवार को 108 बारी ‘‘ओम् शं शनैश्चराय नमः’’ का मंत्र जाप करें। इस उपाय से नौकरी मिलने में आ रही बाधा दूर हो जाती है।

नौकरी के लिए इंटरव्यू देने के लिए घर से निकलते समय एक चम्मच दही और चम्मच चीनी मिलाकर और उसे खाकर घर से बाहर निकलें। ध्यान रहे कि घर से बाहर जाते समय सबसे पहले दायां पैर ही बाहर निकालें।

सरकारी नौकरी प्राप्त करने के लिए गंगाजल को एक पीतल के लोटे में डालें और इसमें चांदी की धातु को डाल दें। फिर इस लोटे को अपने सिर के उपर से सात बार वार दें और इसे ईशान कोण में रख दें। इसके पश्चात 21 बार ओम् गंगाधराय नमः मंत्र का जाप करें।

यदि नौकरी की आशा धूमिल पड़ रही हो या नौकरी मिलते-मिलते रह जाती हो। तो किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष में गुड़ की 7 डलियां और 7 हल्दी की साबुत गांठे को एक रूपये के सिक्के के साथ किसी पीले वस्त्र यानि कपड़े में बांधकर सड़क या रेल लाइन के पार फेक दें। और मन में नौकरी की सच्ची प्रार्थना करें। इस उपाय से नौकरी मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
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तुलसी

तुलसी जी , पौधा नहीं जीवन का अंग है

1. तुलसी जी को नाखूनों से कभी नहीं तोडना चाहिए,।
2.सांयकाल के बाद तुलसी जी को स्पर्श भी नहीं करना चाहिए ।
3. रविवार को तुलसी पत्र नहीं
तोड़ने चाहिए ।
4. जो स्त्री तुलसी जी की पूजा करती है। उनका सौभाग्य अखण्ड रहता है । उनके घर
सुख शांति व समृद्धि का वास रहता है घर का आबोहवा हमेशा ठीक रहता है।
5. द्वादशी के दिन तुलसी को नहीं तोडना चाहिए ।
6. सांयकाल के बाद तुलसी जी लीला करने जाती है।
7. तुलसी जी वृक्ष नहीं है! साक्षात् राधा जी का स्वरूप  है ।
8. तुलसी के पत्तो को कभी  चबाना नहीं चाहिए।
तुलसी के पौधे का महत्व धर्मशास्त्रों में भी बखूबी बताया गया है. तुलसी के पौधे को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है.। हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे से कई आध्यात्मिक बातें जुड़ी हैं.। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु को तुसली अत्यधिक प्रिय है.। तुलसी के पत्तों के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है. । क्योंकि भगवान विष्णु का प्रसाद बिना तुलसी दल के पूर्ण नहीं होता है. । तुलसी की प्रतिदिन का पूजा करना और पौधे में जल अर्पित करना हमारी प्राचीन परंपरा है.। मान्यता है कि जिस घर में प्रतिदिन तुलसी की पूजा होती है, वहां सुख-समृद्धि, सौभाग्य बना रहता है. कभी कोई कमी महसूस नहीं होती.।
- जिस घर में तुलसी का पौधा होता है उस घर की कलह और अशांति दूर हो जाती है. घर-परिवार पर मां की विशेष कृपा बनी रहती है.
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के पत्तों के सेवन से भी देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है. जो व्यक्ति प्रतिदिन तुलसी का सेवन करता है, उसका शरीर अनेक चंद्रायण व्रतों के फल के समान पवित्रता प्राप्त कर लेता है.
- तुलसी के पत्ते पानी में डालकर स्नान करना तीर्थों में स्नान कर पवित्र होने जैसा है. मान्यता है कि जो भी व्यक्ति ऐसा करता है वह सभी यज्ञों में बैठने का अधिकारी होता है.
- भगवान विष्णु का भोग तुलसी के बिना अधूरा माना जाता है. इसका कारण यह बताया जाता है कि तुलसी भगवान विष्णु को बहुत प्रिय हैं.
- कार्तिक महीने में तुलसी जी और शालीग्राम का विवाह किया जाता है. कार्तिक माह में तुलसी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 
 शास्त्रों में कहा गया है कि तुलसी पूजन और उसके पत्तों को तोड़ने के लिए नियमों का पालन करना अति आवश्यक है.
तुलसी पूजन के नियम
- तुलसी का पौधा हमेशा घर के आंगन में लगाना चाहिए. आज के दौर में में जगह का अभाव होने की वजह तुलसी का पौधा बालकनी में लगा सकते है.
- रोज सुबह स्वच्छ होकर तुलसी के पौधे में जल दें और एवं उसकी परिक्रमा करें.
- सांय काल में तुलसी के पौधे के नीचे घी का दीपक जलाएं, शुभ होता है.
- भगवान गणेश, मां दुर्गा और भगवान शिव को तुलसी न चढ़ाएं.
- आप कभी भी तुलसी का पौधा लगा सकते हैं लेकिन कार्तिक माह में तुलसी लगाना सबसे उत्तम होता है.
- तुलसी ऐसी जगह पर लगाएं जहां पूरी तरह से स्वच्छता हो.
- तुलसी के पौधे को कांटेदार पौधों के साथ न रखें
तुलसी की पत्तियां तोड़ने के भी कुछ विशेष नियम हैं-
- तुलसी की पत्तियों को सदैव सुबह के समय तोड़ना चाहिए. अगर आपको तुलसी का उपयोग करना है तो सुबह के समय ही पत्ते तोड़ कर रख लें, क्योंकि तुलसी के पत्ते कभी बासी नहीं होते हैं.
- बिना जरुरत के तुलसी को की पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए, यह उसका अपमान होता है.

- तुलसी की पत्तियां तोड़ते समय स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें.

- तुलसी के पौधे को कभी गंदे हाथों से न छूएं.
- तुलसी की पत्तियां तोड़ने से पहले उसे प्रणाम करेना चाहिए और इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए- महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते.
- बिना जरुरत के तुलसी को की पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए, यह उसका अपमान होता है.
- रविवार, चंद्रग्रहण और एकादशी के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिए.
"तुलसी वृक्ष ना जानिये।
गाय ना जानिये ढोर।।
गुरू मनुज ना जानिये।
ये तीनों नन्दकिशोर।।
अर्थात-
तुलसी को कभी पेड़ ना समझें
गाय को पशु समझने की गलती ना करें और गुरू को कोई साधारण मनुष्य समझने की भूल ना करें, क्योंकि ये तीनों ही साक्षात भगवान रूप हैं।
   !!     ॐ नमः भगवते वासुदेवाय नमः  ।।