Saturday, 11 March 2017

मूलांक एक

विशेषताएं

मूलांक एक का स्वामी सूर्य है. इनमें सूर्य जैसा तेज और आत्म-विश्वास रहता है. अपने निर्णय पर अडिग रहने वाले मूलांक एक के जातक परिश्रमी,आत्म-निर्भर,महत्वाकांक्षी,उत्साह से भरे और कला-प्रेमी होते हैं. वे दृढ निश्चयी और अपने मार्ग आने वाली बाधा को दूर करने में सक्षम होते हैं. अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए वे अपनी सारी ऊर्जा लगा देते हैं. ये लोग व्यवसाय, नौकरी, कला, धर्म और समाज के क्षेत्र में नेतृत्व करने वाले होते हैं. 

मूलांक एक के जातक अपने को प्रथम स्थान पर देखना पसंद करते हैं और इनका दृढ संकल्प उनको सफलता प्रदान करता है. कभी कभी इनका यही स्वाभाव अन्य आलसी लोगो के लिए इन्हें कठोर बना देता है. 

कलात्मकता और नवीनता में इनका कोई मुकाबला नहीं कर सकता। ये नए उद्यम और नए कार्य का आरम्भ करने में सफल साबित होते हैं. आत्म-निर्भर और अनुशासित होने के कारण वे खुद का अपना का व्यवसाय करना पसंद करते हैं और सफलता प्राप्त करते हैं. 

मूलांक एक के जातक को कुछ न करते रहना चाहिए, आलस्य इनका स्वाभाव नहीं है इसलिए खली बैठने में अप्रसन्न रहते हैं. मूलांक एक के जातक को कुछ न करते रहना चाहिए, आलस्य इनका स्वाभाव नहीं है इसलिए खाली बैठने में अप्रसन्न रहते हैं. नए उद्यम आरम्भ करने में इनसे अच्छा कोई नहीं है और इन्हें इसी तरह आगे बढ़ते रहना चाहिए.

कमियाँ

मूलांक एक के व्यक्ति कभी कभी स्वार्थी,घमंडी और दूसरों से अधिक अपेक्षा रखने वाले होते हैं. जाने अनजाने में ये लोगों को सताने लगते हैं. 

प्रथम स्थान पर बने रहने के लिए ये कभी कभी अपने से नीचे काम करने वालों के लिए गुस्सैल, कठोर और अप्रिय बन जाते हैं. ऐसा माहौल इन्हे अप्रसन्न रखने लगता है और इसी कारण से ये किसी कार्य को प्रारम्भ तो करते हैं, परन्तु उसे मुकाम तक पहुचने से पहले थकने लगते हैं. 

मूलांक एक के लोग जल्दी लोगों पर भरोसा कर लेते हैं और धोखा खा जाते हैं. 

कभी कभी दिखावा, लोभ, जल्दीबाजी और अहंकार इनको सबका अप्रिय बना देता है. 

अहंकार के व जह से ये लोग किसी की दखल पसंद नहीं करते. इनमें नेतृत्व कर गुण तो है परन्तु ये अच्छे टीम-प्लेयर नहीं साबित होते. 

विवेचना

स्वामी ग्रह : सूर्यविशेष प्रभावी : 21 जुलाई से 28 अगस्त के मध्यशुभ तारीखें : 1, 10, 19, 28सहायक तारीखें : 2, 11, 20, 29 एवं 4, 13, 22, 31 तथा 7, 16, 25सहायक शुभ वर्ष : 2, 11, 20, 29, 38, 47, 56, 65, 74 एवं 4, 13, 22, 31, 40, 49, 58, 67 तथा 7, 16, 25, 34, 43, 52, 61, 70सर्वोत्तम वर्ष : 1, 10, 19, 28, 37, 46, 56, 64, 73उत्तम दिन : रविवार, सोमवारशुभ रंग : हरा, भूरा, पीला, सुनहराशुभ रत्न : माणिक्यराशि : सिंहधातु : स्वर्ण, तांबादिशा : पूर्वमित्र अंक : 2, 7, 5सम अंक : 3, 9, 4शत्रु अंक : 6, 8तत्व : अग्निरोग : हृदय की कमजोरी, रक्तदोष, रक्तचाप, स्नायु निर्बलता, नेत्र दोषपाठ : आदित्य हृदय स्तोत्रउपासना : सूर्य कीव्रत : रविवारदान पदार्थ : माणिक्य, स्वर्ण, ताम्र, गुड़, घी, लाल वस्त्र, लाल पुष्प, रक्त चंदन एवं गायविवाह करना उत्तम : 14 जून से 15 जुलाई, 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर, 15 नवम्बर से 18 दिसम्बर, 18 मार्च से 15 अप्रैल के मध्य जन्मे जातक सेव्यवसाय : आभूषण, जौहरी कार्य, स्वर्णकारिता, विद्युत, चिकित्सा, नेतृत्व, स्पोर्टस वस्तु, अग्नि, सेवा कार्य, सैन्य विभाग व प्रशासनअनुकूल दिशा : उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम, पश्चिमप्रतिकूल दिशा : दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिमशुभ मास : जनवरी, मार्च, मई, जुलाई, अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर व दिसम्बर

Tuesday, 7 March 2017

दशरथ द्वारा लिखा गया शनि  स्तोत्र का पाठ करें

दशरथ द्वारा लिखा गया शनि  स्तोत्र का पाठ करें

इनमें सबसे आसान उपाय है प्रत्येक शनिवार को 11 बार महाराज दशरथ द्वारा लिखा गया दशरथ स्तोत्र का पाठ। शनि महाराज ने स्वयं दशरथ जी को वरदान दिया था कि जो व्यक्ति आपके द्वारा लिखे गये स्तोत्र का पाठ करेगा उसे मेरी दशा के दौरान कष्ट का सामना नहीं करना होगा। शनि महाराज प्रत्येक शनिवार के दिन के दिन पीपल के वृक्ष में निवास करते हैं। इसदिन जल में चीनी एवं काला तिल मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करके तीन परिक्रमा करने से शनि प्रसन्न होते हैं। 

Monday, 6 March 2017

दैनिक राशिफल 07-03-2017

दैनिक राशिफल

राशि फलादेश मेष
वाहन-मशीनरी का प्रयोग सावधानी से करें। व्यापार से लाभ, निवेश-नौकरी में लाभ, शत्रु शांत रहेंगे। जीवनसाथी की चिंता रहेगी। यात्रा होगी।


राशि फलादेश वृष
यात्रा से लाभ, लाभ के अवसर अचानक उपस्थित होंगे। व्यापार-निवेश, नौकरी लाभ देंगे। विद्यार्थी वर्ग सफलता के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करेगा।

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राशि फलादेश मिथुन
कुसंगति हानिकारक होगी। शरीर अस्वस्थ होगा। व्यय बढ़ने से कर्ज लेना पड़ सकता है। व्यापार ठीक चलेगा। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा।


राशि फलादेश कर्क
शत्रु सक्रिय होंगे। माता का स्वास्थ्य बिगड़ेगा। चोरी-दुर्घटना से हानि संभव है। रुका हुआ धन वापस आ सकता है। अत्यधिक परिश्रम व लाभ कम होगा।


राशि फलादेश सिंह
पुरानी योजनाएं फलीभूत होंगी। नई योजनाएं बनेंगी। मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। शत्रु भी आपके कार्य की प्रशंसा करेंगे। घर-परिवार की चिंता रहेगी।

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राशि फलादेश कन्या
चोरी-दुर्घटना आदि से हानि संभव है। धार्मिक यात्रा हो सकती है। तंत्र-मंत्र में रुचि बढ़ेगी। व्यापार ठीक चलेगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। धन प्राप्ति होगी।


राशि फलादेश तुला
वाहन-मशीनरी का प्रयोग सावधानी से करें। जोखिमभरे कार्यों से दूर रहें। समय अनुकूल नहीं है, धैर्य रखें। शरीर कष्ट रहेगा।


राशि फलादेश वृश्चिक
शुभ समाचार मिलेंगे। गृहस्‍थी प्रसन्नता से चलेगी। राजकीय कार्यों में अनुकूलता मिलेगी। निवेश-व्यापार से लाभ होगा। धनार्जन होगा।
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राशि फलादेश धनु
संपत्ति के कार्य मनोनुकूल होंगे। निवेश लाभ देगा। नौकरी-इंटरव्यू में सफलता मिलेगी। शत्रु शांत रहेंगे। धार्मिक यात्रा हो सकती है।


राशि फलादेश मकर
मौज-मस्ती से दिन बीतेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। व्यापार-निवेश, नौकरी से लाभ होगा। शत्रु शांत रहेंगे। प्रसन्नता रहेगी।


राशि फलादेश कुंभ
कुसंगति व विवाद से बचें। शरीर पीड़ा होगी। यात्रा में चोरी-दुर्घटना संभव है। शत्रु सक्रिय रहेंगे। अतिविश्वास हानि देगा। धीरज रखें।


राशि फलादेश मीन
पुराना रोग उभर सकता है। विरोध होगा। पराक्रम से लाभ तथा विजय मिलेगी। व्यापार धीमा चलेगा। बुद्धि का प्रयोग लाभ का प्रतिशत बढ़ाएगा।

Astro Shaliini

शीघ्र विवाह होने के लिये

शीघ्र विवाह होने के लिये

सात केले सात सौ ग्राम गुड और एक नारियल लेकर माता को अर्पित करें, नवमी को नारियल छ: बार, एक बार सीधा और एक बार उल्टा कन्या के सर पर वार कर नदी में प्रवाहित कर दें, केला और गुड का भोग चन्द्रमा व सूर्य भगवान के लिये निकाल दें और उसी में से थोड़ा सा प्रसाद कन्या ग्रहण करे बचे हुये पांच केले व गुड गाय को खिला दें शीघ्र विवाह होगा | 

Sunday, 5 March 2017

ज्योतिष में कब-क्या निषेध है*

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*ज्योतिष में कब-क्या निषेध है*
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*प्रतिपदा तिथि* :
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प्रतिपदा तिथि में गृह निर्माण, गृह प्रवेश, वास्तुकर्म, विवाह, यात्रा, प्रतिष्ठा, शान्तिक तथा पौष्टिक कार्य आदि सभी मंगल कार्य किए जाते हैं. कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा में चन्द्रमा को बली माना गया है और शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में चन्द्रमा को निर्बल माना गया है. इसलिए शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में विवाह, यात्रा, व्रत, प्रतिष्ठा, सीमन्त, चूडा़कर्म, वास्तुकर्म तथा गृहप्रवेश आदि कार्य नहीं करने चाहिए.
*द्वित्तीया तिथि* :
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विवाह मुहूर्त, यात्रा करना, आभूषण खरीदना, शिलान्यास, देश अथवा राज्य संबंधी कार्य, वास्तुकर्म, उपनयन आदि कार्य करना शुभ माना होता है परंतु इस तिथि में तेल लगाना वर्जित है.
*तृतीया तिथि* :
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तृतीया तिथि में शिल्पकला अथवा शिल्प संबंधी अन्य कार्यों में, सीमन्तोनयन, चूडा़कर्म, अन्नप्राशन, गृह प्रवेश, विवाह, राज-संबंधी कार्य, उपनयन आदि शुभ कार्य सम्पन्न किए जा सकते हैं.
*चतुर्थी तिथि* :
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सभी प्रकार के बिजली के कार्य, शत्रुओं का हटाने का कार्य, अग्नि संबंधी कार्य, शस्त्रों का प्रयोग करना आदि के लिए यह तिथि अच्छी मानी गई है. क्रूर प्रवृति के कार्यों के लिए यह तिथि अच्छी मानी गई है..
*पंचमी तिथि* :
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पंचमी तिथि सभी प्रवृतियों के लिए यह तिथि उपयुक्त मानी गई है. इस तिथि में किसी को ऋण देना वर्जित माना गया है.
*षष्ठी तिथि* :
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षष्ठी तिथि षष्ठी तिथि में युद्ध में उपयोग में लाए जाने वाले शिल्प कार्यों का आरम्भ, वास्तुकर्म, गृहारम्भ, नवीन वस्त्र पहनने जैसे शुभ कार्य इस तिथि में किए जा सकते हैं. इस तिथि में तैलाभ्यंग, अभ्यंग, पितृकर्म, दातुन, आवागमन, काष्ठकर्म आदि कार्य वर्जित हैं.
*सप्तमी तिथि* :
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विवाह मुहुर्त, संगीत संबंधी कार्य, आभूषणों का निर्माण और नवीन आभूषणों को धारण किया जा सकता है. यात्रा, वधु-प्रवेश, गृह-प्रवेश, राज्य संबंधी कार्य, वास्तुकर्म, चूडा़कर्म, अन्नप्राशन, उपनयन संस्कार, आदि सभी शुभ कार्य किए जा सकते हैं.
*अष्टमी तिथि* :
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इस तिथि में लेखन कार्य, युद्ध में उपयोग आने वाले कार्य, वास्तुकार्य, शिल्प संबंधी कार्य, रत्नों से संबंधित कार्य, आमोद-प्रमोद से जुडे़ कार्य, अस्त्र-शस्त्र धारण करने वाले कार्यों का आरम्भ इस तिथि में किया जा सकता है.
*नवमी तिथि* :
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नवमी तिथि में शिकार करने का आरम्भ करना, झगड़ा करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण करना, मद्यपान तथा निर्माण कार्य तथा सभी प्रकार के क्रूर कर्म इस तिथि में किए जाते हैं.
*दशमी तिथि* :
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दशमी तिथि में राजकार्य अर्थात वर्तमान समय में सरकार से संबंधी कार्यों का आरम्भ किया जा सकता है. हाथी, घोड़ों से संबंधित कार्य, विवाह, संगीत, वस्त्र, आभूषण, यात्रा आदि इस तिथि में की जा सकती है. गृह-प्रवेश, वधु-प्रवेश, शिल्प, अन्न प्राशन, चूडा़कर्म, उपनयन संस्कार आदि कार्य इस तिथि में किए जा सकते हैं.
*एकादशी तिथि* :
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एकादशी तिथि में व्रत, सभी प्रकार के धार्मिक कार्य, देवताओं का उत्सव, सभी प्रकार के उद्यापन, वास्तुकर्म, युद्ध से जुडे़ कर्म, शिल्प, यज्ञोपवीत, गृह आरम्भ करना और यात्रा संबंधी कार्य किए जा सकते हैं.
*द्वादशी तिथि* :
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इस तिथि में विवाह, तथा अन्य शुभ कर्म किए जा सकते हैं. इस तिथि में तैलमर्दन, नए घर का निर्माण करना तथा नए घर में प्रवेश तथा यात्रा का त्याग करना चाहिए.
*त्रयोदशी तिथि* :
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संग्राम से जुडे़ कार्य, सेना के उपयोगी अस्त्र-शस्त्र, ध्वज, पताका के निर्माण संबंधी कार्य, राज-संबंधी कार्य, वास्तु कार्य, संगीत विद्या से जुडे़ काम इस दिन किए जा सकते हैं. इस दिन यात्रा, गृह प्रवेश, नवीन वस्त्राभूषण तथा यज्ञोपवीत जैसे शुभ कार्यों का त्याग करना चाहिए.
*चतुर्दशी* :
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चतुर्दशी तिथि में सभी प्रकार के क्रूर तथा उग्र कर्म किए जा सकते हैं. शस्त्र निर्माण इत्यादि का प्रयोग किया जा सकता है. इस तिथि में यात्रा करना वर्जित है. चतुर्थी तिथि में किए जाने वाले कार्य इस तिथि में किए जा सकते हैं.
*पूर्णमासी* :
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पूर्णमासी जिसे पूर्णिमा भी कहते हैं, इस तिथि में शिल्प, आभूषणों से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं. संग्राम, विवाह, यज्ञ, जलाशय, यात्रा, शांति तथा पोषण करने वाले सभी मंगल कार्य किए जा सकतेज हैं.
*अमावस्या*:
इस तिथि में पितृकर्म मुख्य रुप  से किए जाते हैं. महादान तथा उग्र कर्म किए जा सकते हैं. इस तिथि में शुभ कर्म तथा स्त्री का संग नहीं करना चाहिए.

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