Wednesday, 10 January 2024

*राम रक्षा स्तोत्र के 10 रहस्य*

*राम रक्षा स्तोत्र के 10 रहस्य*
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*श्री राम रक्षा स्तोत्र बुध कौशिक ऋषि द्वारा रचित श्रीराम का स्तुति गान है। इसमें प्रभु श्री राम के अनेकों नाम का गुणगान किया है। जानते हैं कि इसका पाठ करने के 10 रहस्य।*

*🚩1.* इसका पाठ करने से प्रभु श्रीराम आपकी हर तरह से रक्षा करते हैं। अपने शरणागत की रक्षा करना उनका धर्म है।
 
*🚩2.* कहते हैं कि इसके नित्य पठन से हनुमानजी प्रसन्न होकर राम भक्तों की हर तरह से रक्षा करते हैं।

*🚩3.* विधिवत रूप से राम रक्षा स्त्रोत का 11 बार पाठ करने के दौरान एक कटोरी में सरसों के कुछ दानें लेकर उन्हें अंगुलियों से घुमाते रहने से वह सिद्ध हो जाते हैं। उक्त दानों को घर में उचित और पवित्र स्थान पर रख दें। यह दानें कोर्ट-कचहरी जाने के दौरान, यात्रा पर जाने के दौरान या किसी एकांत में सोने के दौरान यह दानें आपकी रक्षा करेंगे। यहां पर दिए गए उपाय प्रचलित मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके कारगर होने की पुष्टि हम नहीं करते हैं।
 
*🚩4.* राम रक्षा स्तोत्रम् के 11 बार किए जाने वाले पाठ से पानी को भी सरसों की तरह सिद्ध किया जा सकता है। इस पानी को औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पानी को रोगी को पिलाया जा सकता है। इससे ली जाने वाली औषधि का तेजी से प्रभाव होता है। पानी को सिद्ध करने के लिये राम रक्षा स्तोत्रम का पाठ करते हुए तांबे के बर्तन में पानी भरकर इसे अपने हाथ में पकड़ कर रखें और अपनी दृष्टि पानी में रखें। यहां पर दिए गए उपाय प्रचलित मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके कारगर होने की पुष्टि हम नहीं करते हैं।
 
*🚩5.* जो व्यक्ति नित्य राम रक्षा स्तोत्रम् का पाठ करता रहता है वह आने वाली कई तरह की विपत्तियों से बच जाता है।
 
*🚩6.* इसका प्रतिदिन पाठ करने से व्यक्ति को दीर्घायु, संतान, शांति, विजयी, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।
 
*🚩7.* इसके नित्य पाठ करने से मंगल ग्रह का कुप्रभाव भी समाप्त हो जाता है।
 
*🚩8.* इसका नित्य पाठ करने वाले व्यक्ति के मन में सकारात्मक भाव का संचार होता है और उसके चारों और सुरक्षा का एक घेरा निर्मित हो जाता है।
 
*🚩9.* इसका नित्य पाठ करने से मनुष्य के मन से हर तरह का भय निकल जाता है और वह निर्भिक जीवन जीता है।

*🚩10.* इसका नित्य पाठ करने से भगवान शिव की भी कृपा प्राप्त होती है क्योंकि इस स्त्रोत की रचना बुध कौशिक ऋषि ने भगवान शंकर के कहने पर ही की थी। भगवान शंकर ने उन्हें इस स्त्रोत की रचना की प्रेरणा स्वप्न में दी थी।
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            *राम राम जी*
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🕉️प्रदोष व्रत 2024: पौष कृष्ण का प्रदोष व्रत रखने का महत्व और फायदे🕉️*

*🕉️प्रदोष व्रत 2024: पौष कृष्ण का प्रदोष व्रत रखने का महत्व और फायदे🕉️*

*एकादशी का व्रत श्रीहरि विष्णु जी को समर्पित है तो प्रदोष का व्रत शिवजी को समर्पित है। प्रत्येक माह की त्रयोदशी के दिन प्रदोष का व्रत रखा जाता है। पौष माह के कृष्‍ण का प्रदोष व्रत 09 जनवरी मंगलवार के दिन रखा जाएगा। मंगल प्रदोष का व्रत रखने के कई फायदे हैं।* 
 
*पौष प्रदोष व्रत का महत्व:-*
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शास्त्रों के अनुसार प्रदोष का व्रत करने से अच्छे स्वास्थ और लम्बी आयु की प्राप्ति होती है। 

इस दिन विधिवत रूप से भगवान शिव की अराधना करने से जातक के सारे कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

मान्यता अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवनकाल में किए गए सभी पापों का नाश हो जाता है। पुराणों के अनुसार एक प्रदोष व्रत रखने का पुण्य दो गाय दान करने जितना होता है।

*📿प्रदोष व्रत रखने के फायदे:-*
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*🚩1.* मंगलवार को आने वाले प्रदोष व्रत को रखने से कर्ज से मुक्ति मिलती है।

*🚩2.* प्रदोष का व्रत करने से सेहत में सुधार होता है।

*🚩3.* निरंतर प्रदोष व्रत रखने से लम्बी आयु की प्राप्ति होती है।

*🚩4.* प्रदोष का व्रत रखने से सभी तरह के चंद्रदोष दूर होते हैं।

*🚩5.* मानसिक बैचेनी है तो प्रदोष का व्रत रखने से मानसिक शांति मिलती है।

*🚩6.* इस व्रत को अच्छे से रखने से भाग्य जागृत हो जाता है।

*🚩7.* इस व्रत से आप अशुभ संस्कारों को भी नष्ट कर सकते हैं।

*🚩8.* प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति जीवन में कभी भी संकटों से नहीं घिरता और उनके जीवन में धन और समृद्धि बनी रहती है।
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*हरहर_महादेव_शिव_शंभू*
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Monday, 20 November 2023

आंवला नवमी आज******************

आंवला नवमी आज
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धार्मिक मान्यता के अनुसार, आंवला नवमी से ही द्वापर युग का प्रारंभ हुआ था। आंवला नवमी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को होती है। आंवला नवमी के दिन व्रत रखकर आंवले के पेड़ और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंवला नवमी से आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है और कार्तिक पूर्णिमा तक उसमें श्रीहरि का वास रहता है। आंवला नवमी को अक्षय नवमी और कूष्मांड नवमी भी कहते हैं। आंवला नवमी के दिन व्रत और पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, इसलिए यह अक्षय नवमी कहलाती है।

आंवला नवमी की तिथि
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वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 21 नवंबर दिन मंगलवार को तड़के 03 बजकर 16 एएम पर शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन 22 नवंबर दिन बुधवार को 01 बजकर 09 एएम पर होगा। उदयातिथि के आधार पर इस साल आंवला नवमी 21 नवंबर को मनाई जाएगी।

आंवला नवमी का पूजा मुहूर्त
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21 नवंबर को आंवला नवमी की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 07 मिनट तक है। इस दिन पूजा के लिए आपको 05 घंटे से अधिक का समय प्राप्त होगा। उस दिन का शुभ मुहूर्त या अभिजित मुहूर्त दिन में 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक है।

आंवला नवमी के दिन रवि योग और पंचक
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इस बार आंवला नवमी वाले दिन रवि योग बन रहा है। रवि योग रात में 08 बजकर 01 मिनट से बन रहा है, जो अगले दिन सुबह 06 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। वहीं पूरे दिन पंचक लगा है।

आंवला नवमी के 4 महत्व
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1. आंवला नवमी से आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है, इस वजह से आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं और आंवले का भोग लगाते हैं। आंवले को ही प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं। विष्णु कृपा से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।

2. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंवला नवमी के दिन आंवले के पेड़ से अमृत की बूंदें टपकती हैं, इसलिए इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठने और भोजन करने की परंपरा है। ऐसा करने से सेहत अच्छी रहती है।

3. आंवला नवमी को भगवान विष्णु ने कूष्मांड राक्षस का वध किया था, इसलिए इसे कूष्मांड नवमी कहते हैं। आंवला नवमी पर कूष्मांड यानि कद्दू का दान करते हैं।

4. धार्मिक मान्यता के अनुसार, आंवला नवमी से ही द्वापर युग का प्रारंभ हुआ था।

कैसे करें आंवला नवमी की पूजा
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इस बार अक्षय नवमी 21 नवंबर मंगलवार को होगी। इस दिन प्रातःकाल जागने के बाद स्नानादि से निवृत्त होकर आंवले के वृक्ष के नीचे पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजन करके पेड़ की जड़ में दूध की धारा गिरा कर तने में चारो तरफ सूत लपेटना चाहिए। इसके बाद कपूर या घी की बाती से आरती करके 108 परिक्रमाएं करना चाहिए। आंवला नवमी के पूजन में जल, रोली, अक्षत, गुड़, बताशा, आंवला और दीपक घर से लेकर ही जाना चाहिए। ब्राह्मण और ब्राह्मणी को भोजन कराकर वस्त्र तथा दक्षिणा आदि दान देकर स्वयं भोजन करना चाहिए। एक बात जरूर ध्यान रखें कि इस दिन के भोजन में आंवला अवश्य ही होना चाहिए। इस दिन आंवले का दान करने का भी विशेष महत्व है।

आंवला नवमी व्रत की कथा
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किसी समय में एक साहूकार था। वह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में नवमी के दिन आंवला के पेड़ के नीचे ब्राह्मणों को भोजन कराता और सोने का दान करता था। उसके लड़कों को यह सब करना अच्छा नहीं लगता था क्योंकि उन्हें लगता था कि वह धन लुटा रहे हैं। तंग आकर साहूकार दूसरे गांव में जाकर एक दुकान करने लगा। दुकान के आगे आंवले का पेड़ लगाया और उसे सींच कर बड़ा करने लगा। उसकी दुकान खूब चलने लगी और बेटों का कारोबार बंदी की स्थिति में पहुंच गया। वह सब भागकर अपने पिता के पास पहुंचे और क्षमा मांगी। तो पिता ने उन्हें क्षमा कर आंवले के वृक्ष की पूजा करने का कहा। उनका काम धंधा पहले की तरह चलने लगा।



Friday, 10 November 2023

धनतेरस से शुरू कर दिपावली तक अपनी राशि अनुसार करे लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का उपाय*

*धनतेरस से शुरू कर दिपावली  तक अपनी राशि अनुसार करे लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का उपाय* 

*(1) मेष राशि  
गणेशजी को बूंदी के लड्डू चढ़ाएं। रंगीन कंबल या गर्म कपड़े दान करें। कुत्तों को इमरती खिलाएं। नैऋत्य कोण में सरसों का दीपक रातभर जलाएं। दीपावली की रात लाल चंदन और केसर घिसकर उससे रंगा हुआ सफेद कपड़ा अपने गल्ले अथवा तिजोरी में रखें। रंगीन कम्बल या गर्म कपड़े दान करें। कुत्तों को इमरती खिलाएं। 
 
*(2) वृषभ राशि 
हनुमानजी को गुड़-चना चढ़ाएं। बच्चों को रेवड़ियां बांटें। दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक जलाएं। दीपावली पर कमल के फूल की पूजा करें और इसे लाल कपड़े में बांधकर अपने धन स्थान यानी तिजोरी या लॉकर में रखें।बच्चों को रेवड़ियां बांटें। दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक जलाएं। 

*(3) मिथुन राशि  
पानी वाला नारियल तथा बादाम दुर्गाजी को या काली मंदिर में दक्षिणा सहित चढ़ाएं (रात्रि में)। पक्षियों को दाना चुगाएं। घर के बड़ों-बुजुर्गों को वस्त्रादि भेंट करें। घर के नैऋत्य कोण में सरसों के तेल का दीपक जलाएं। दक्षिणावर्ती शंख की भी पूजा करें और इसे अपना पूजा स्थान पर रखकर प्रतिदिन इसके दर्शन करें।
 
*(4) कर्क राशि  
हनुमानजी को बेसन के लड्डू चढ़ाएं। काली उड़द दान करें। तेल लगी रोटी कु्तों को खिलाएं। पश्चिम दिशा में घी का दीपक लगाएं। दिवाली की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे तेल का पंचमुखी दीपक जलाएं।
 
*(5) सिंह राशि 
सप्तधान दान करें। उड़द का सामान बांटें। घर के नैऋत्य कोण में सरसों के तेल का दीपक लगाएं। दीपावली की रात घर के मेन गेट पर गाय के घी का दीपक जलाये। 
 
*(6) कन्या राशि 
शनि मंदिर में तेल का दीपक लगाकर तेल दान करें। गरीबों को भोजन दान करें। नैऋत्य कोण में सरसों के तेल का दीपक लगाएं। दीपावली कमलगट्टे की दो माला माता लक्ष्मी के मंदिर में अर्पित करें और दीपावली से शुरू प्रत्येक अमावस्या पर मीठे चावल कौओं को खिलाएं।
 
*(7) तुला राशि 
पीपल में मीठा जल चढ़ाकर तेल का दीपक लगाएं रात्रि में। घर के पश्चिम में घी का दीपक तथा नैऋत्य में तेल का दीपक लगाएं। दीपावली पर बड़ के पेड़ के पत्ते पर सिंदूर व घी से ऊं श्रीं श्रियै नम: मंत्र लिखें और इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।
 
*(8) वृश्चिक राशि:
रंगीन कंबल दान करें। घर के ब्रह्मस्थल पर घी का दीपक रातभर जलाएं। हनुमानजी को लड्डू का नैवेद्य लगाएं।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः" मंत्र का जाप 18 बार करें।दीपावली के मौके पर पर अपने घर के बगीचे या आस-पास कहीं केले के दो पेड़ लगाएं तथा इनकी देखभाल करें। इसके फल स्वयं न खाएं, दूसरों को दान करें।

*(9) धनु राशि 
गणेशजी को लड्डू चढ़ाएं। गाय को रोटी पर घी तथा गुड़ रखकर खिलाएं। शिवजी को जल में काले तिल मिलाकर चढ़ाएं। घर के नैऋत्य कोण में तेल का दीपक लगाएं। श्रीसूक्त का पाठ अवश्य करें।पान के पत्ते पर कुमकुम से ‘श्रीं’ लिख कर अपने पूजा स्थान पर रखें तथा रोज इसकी पूजा करें। जब ये पत्ता खराब हो जाए तो पुन: दूसरा बना लें।
 
*(10) मकर राशि 
साबुत मसूर दान करें। घर के बड़ों को भेंट दें। घर की दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक लगाएं। दीपावली की रात आक की रुई का दीपक घर के ईशान कोण में जलाएं।
 
*(11) कुंभ राशि 
दुर्गाजी को नारियल चढ़ाएं। पक्षियों को दाना चुगाएं। घर के नैऋत्य कोण में सरसों के तेल का दीपक लगाएं। सुगंधित जल से रुद्राभिषेक करें।कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जाप करें- ऊं ह्रीं ऐं क्लीं श्रीं।
 
*(12) मीन राशि 
शनि मंदिर में दीपक, तेल तथा काली उड़द दान करें। तेल लगी रोटी कुत्तों को खिलाएं। पश्चिम दिशा में घी का दीपक लगाएं। दीपावली पर किसी लक्ष्मी मंदिर में जाकर कमल के फूल, नारियल अर्पित करें तथा सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
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धनतेरस पर वास्तु के 10 टिप्स, जानिए किस द्वार पर दीपक में* *क्या डालें*

*धनतेरस पर वास्तु के 10 टिप्स, जानिए किस द्वार पर दीपक में* 
*क्या डालें*
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*आपका घर या मकान किस दिशा में है और उसका मुख्य द्वार किस दिशा में है यह जानकर आप क्या खरीदे और द्वार पर कौनसा दीपक जलाएं इसके लिए आप जानिए सामान्य वास्तु टिप्स जिससे आपका धनतेरस पर लाभ मिल सकता है। निम्नलिखित टिप्स मान्यता पर आधारित हैं।*
 
*1.* यदि आपके घर का मुख्‍य द्वार आग्नेय कोण में है तो आप चांदी का सामान जरूर खरीदें। क्षमता है तो हीरा भी खरीद सकते हैं और फिर द्वार पर दीपक जलाएं तो उसमें कौड़ी जरूर डालें।
 
*2.* यदि आपके घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में है तो सोने या तांबे से बना सामान खरीदें। मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं तो उसमें राईं अवश्य डालें।

*3.* यदि आपके घर का मुख्‍य द्वार नैऋत्य दिशा में है तो चांदी या तांबे से बनी वस्तु खरीदें और द्वार पर दीपक जलाएं तो उसमें लौंग जरूर डालें।

*4.* यदि आपके घर का मुख्‍य द्वार पश्चिम दिशा में है तो आप चांदी की वस्तुएं खरीदें और घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं तो उनमें एक किशमिश जरूर डालें।
 
*5.* यदि आपके घर का मुख्‍य द्वार वायव्य कोण की दिशा में है तो चांदी या मोती खरीदें और दीपक में थोड़ी मिश्री जरूर डालें।
 
*6.* यदि आपके घर का मुख्‍य द्वार उत्तर दिशा में है तो सोना खरीदें, पीतल खरीदें या लक्ष्मी की तस्वीर जरूर खरीदें और अपने मुख्य द्वार पर जब दीपक जलाएं तो उनमें एक इलायची जरूर डालें।

*7.* यदि आपके घर का मुख्‍य द्वार ईशान दिशा में है तो सोना, पीतल खरीदें या लक्ष्मी की प्रतिमा जरूर खरीदें और जब भी मुख्‍य द्वार पर दीपक जलाएं तो उनमें एक चुटकी हल्दी जरूर डाल दें।
 
*8.* यदि आपके घर का मुख्‍य द्वार पूर्व दिशा में है तो आपको सोना या तांबा खरीदना चाहिए और मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं तो उनमें थोड़ा कुमुकुम जरूर डाल दें।
 
*9.* इसके अलावा इस दिन नवीन झाडू एवं सूपड़ा खरीदकर उनका पूजन करें। यथाशक्ति तांबे, पीतल, चांदी के गृह-उपयोगी नवीन बर्तन व आभूषण क्रय करें। शुभ मुहूर्त में अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान में नई गादी बिछाएं अथवा पुरानी गादी को ही साफ कर पुनः स्थापित करें। पश्चात नवीन वस्त्र बिछाएं। 
 
*10.* इसके अलावा मंदिर, गौशाला, नदी के घाट, कुओं, तालाब, बगीचों में भी दीपक लगाएं। तेरस के सायंकाल किसी पात्र में तिल के तेल से युक्त दीपक प्रज्वलित करें। सायंकाल पश्चात तेरह दीपक प्रज्वलित कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करें।

Wednesday, 8 November 2023

लगन के अनुसार भाग्य उदय

कुंडली में 12 भाव होते हैं। इन भावों के नाम 12 राशियों के नाम पर ही हैं। ये 12 राशियां हैं मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला , वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन। कुंडली का प्रथम यानी पहला भाव जिस राशि का होता है उसी राशि के अनुसार कुंडली का लग्न निर्धारित होता है। लग्न के आधार पर कुंडलियां भी बारह प्रकार की होती हैं। इस आधार पर मेष लग्न की कुंडली वालों का भाग्योदय सामान्यत: 16, 22, 28, 32 और 36 वर्ष की आयु में, वृष लग्न की कुंडली का भाग्योदय 25, 28, 36 और 42 वर्ष की आयु में, मिथुन लग्न की कुंडली वालों का भाग्योदय 22, 32, 35, 36, 42 वर्ष की आयु में, कर्क लग्न की कुंडली वालों का भाग्योदय 16, 22, 24, 25, 28 या 32 वर्ष की आयु में और  सिंह लग्न की कुंडली का भाग्योदय 16, 22, 24, 26, 28 या 32 वर्ष की आयु में हो सकता है। जबकि कन्या लग्न की कुंडली वालों का भाग्योदय 16, 22, 25, 32, 33, 34 एवं 36 आयु वर्ष में और जिनकी कुंडली तुला लग्न की है, उनका भाग्योदय 24, 25, 32, 33, 35 वर्ष की आयु में हो सकता है।

वृश्चिक लग्न की कुंडली वालों का भाग्योदय 22, 24, 28 और 32 वर्ष की आयु में तो धनु  लग्न की कुंडली का भाग्योदय 16, 22 या 32 वर्ष की आयु में हो सकता है। इसी तरह मकर लग्न की कुंडली वालों का भाग्योदय 25, 33, 35 या 36 वर्ष की आयु में, कुंभ लग्न की कुंडली का भाग्योदय 25, 28, 36 या 42 वर्ष की आयु में और मीन लग्न की कुंडली वालों का भाग्योदय 16, 22, 28 या 33 वर्ष की आयु में हो सकता है। 

Tuesday, 24 October 2023

कार्तिक मास में दीपदान से करें ग्रहों को प्रसन्न

कार्तिक मास में दीपदान से करें ग्रहों को प्रसन्न

सूर्य: सूर्य ग्रह को प्रसन्न करने के लिए हर रविवार तथा सप्तमी तिथि को तांबे का दीपक जलाए सरसों के तेल का प्रयोग करें। 

चंद्र: चंद्र ग्रह को प्रसन्न करने के लिए हर सोमवार चांदी का दीपक जलाएं । घी का प्रयोग करें। 

मंगल: मंगल ग्रह को मजबूत करने के लिए तांबे का दीपक जलाना चाहिए। इसके अतिरिक्त चुकंदर को दीपक के आकार में बनाकर उसमें घी, बत्ती डालकर जलाने से मंगल ग्रह शांत होता है। 

बुध: बुध ग्रह पूजन के लिए मिट्टी का दीपक जलाना चाहिए। घी का प्रयोग करें। 

गुरु: गुरु ग्रह को प्रसन्न करने के लिए पीतल का दीपक जलाना चाहिए (सोने का दीपक भी जला सकते हैं) । गाय घी का प्रयोग करें।

शुक्र: शुक्र ग्रह को प्रसन्न करने के लिए चावल के आटे का दीपक तथा नारियल के सख्त छिलके में शुद्ध घी व बत्ती डालकर दीप जलाना अत्यंत कल्याणकारी होता है। इससे शुक्र ग्रह की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। 

शनि: शनि ग्रह की शांति के लिए लोहे का दीपक प्रज्ज्वलित किया जाता है। तिल के तेल का प्रयोग करें।

राहु-केतु: राहु के लिए लोहे तथा केतु के लिए मिश्रित धातु का दिया जलाना चाहिए। अलसी के तेल का प्रयोग करें।