Tuesday, 25 November 2025

राहु के लिए :

राहु के लिए : 
=========
समय रात्रिकाल 

भैरव पूजन या शिव पूजन करें। काल भैरव अष्टक का पाठ करें। 

astroshaliini.wordpress.com

राहु के मूल मंत्र का जप रात्रि में 18,000 बार 40 दिन में करें। 

मंत्र : 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:'। 

astroshaliini.blogspot.com

दान-द्रव्य : गोमेद, सोना, सीसा, तिल, सरसों का तेल, नीला कपड़ा, काला फूल, तलवार, कंबल । 

शनिवार का व्रत करना चाहिए। भैरव, शिव या चंडी की पूजा करें। 

8 मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

www.astroshaliini.com

Sunday, 23 November 2025

कैसे करे जप माला से ये जाने

कैसे करे जप माला से ये जाने :- 
=^=^=^=^^=^=^=^=^=^=^==

 
 🌹🌹जप करने वाले व्यक्ति को एक बार में 108 जाप पूरे करने चाहिए। इसके बाद सुमेरु से माला पलटकर पुनः जाप आरंभ करना चाहिए।

* किसी भी स्थिति में माला का सुमेरु लांघना नहीं चाहिए।माला को अंगूठे और अनामिका से दबाकर रखना चाहिए और मध्यमा उंगली से एक मंत्र जपकर एक दाना हथेली के अंदर खींच लेना चाहिए।

* तर्जनी उंगली से माला का छूना वर्जित माना गया है।

* माला के दाने कभी-कभी 54 भी होते हैं। ऐसे में माला फेर कर सुमेरु से पुनः लौटकर एक बार फिर एक माला अर्थात् 54 जप पूरे कर लेना चाहिए।

* मानसिक रूप से पवित्र होने के बाद किसी भी सरल मुद्रा में बैठें जिससे गर्दन और सिर एक सीधी रेखा में रहे।

* मंत्र जप पूरे करने के बाद अंत में माला का सुमेरु माथे से छुआकर माला को किसी पवित्र स्थान में रख देना चाहिए।

* मंत्र जप में कर-माला का प्रयोग भी किया जाता है।

* जिनके पास कोई माला नहीं है वह कर-माला से विधि पूर्वक जप करें। कर-माला से मंत्र जप करने से भी माला के बराबर जप का फल मिलता है।

भगवान सूर्य के लिए :
============

माणिक्य, गारनेट, बिल की लकड़ी की माला का उपयोग करे |www.astroshaliini.com

भगवान शिव शंकर के लिए :
===============
इनके लिए रुद्राक्ष की माला काम में ले |पढ़े : रुद्राक्ष की उत्पति की कहानी

माँ दुर्गा के लिए :
========
माँ शेरोवाली के लिए लाल चन्दन की माला से जप करे |

माँ लक्ष्मी के लिए :
===========
कमलट्टे की माला माँ लक्ष्मी की की गयी आराधना जल्दी सफल होती है |

भगवान हरि विष्णु के लिए :
==============
तुलसी या चन्दन की माला का प्रयोग करे |

माँ अम्बिका की पूजा में :
==============

स्फटिक माला काम में ले |

माँ काली के मंत्र जप :
============

नील कमल या काली हल्दी की माला से मंत्र जाप करे |
astroshaliini.blogspot.com
बगलामुखी :
========

पीली हल्दी की माला माँ बगलामुखी को प्रिय है |

9 zones vastu sidhanta :-

9 zones vastu sidhanta :-

9 zones vastu sidhanta divides the plot/property in nine zones.
They are East, Southeast, South, Southwest, West, Northwest, North and East .The central part is called Space or Bhrahmasthana.

Theoretically main directions (E, S, W, N) effect more but practically the sub-directions (Se, Sw, Nw, Ne) affect more.

Significance of directions are as follows:-

East (E):-The energy generated by East Zone facilitates the Social Connectivity. It is the ideal Zone for a Drawing Room.

South-East (SE):- Also known as the Fire Zone, it is the Zone of Money.

South-West (SW):- It is the Zone of Skill, Marriage, Family Harmony, Bonding, Stability in life and Relationships.

West 
The energy of this Zone ensures that no action or effort made by you goes waste.

North-West (NW):- The North-West Zone generates the energy that attracts Supportive and Helpful people for any cause you pursue.

North (N):- As North Zone represents Money or Treasure, its energy helps you to generate New Opportunities to earn money
.
North-East (NE):-It is the Zone of Wisdom, Meditation and Inspiration. In Vastu, this Zone is ideal for Meditation.

astroshaliini.wordpress.com

Sunday, 27 July 2025

पाशुपतास्त्र-मन्त्र

अग्नि पुराण का अध्याय 322, पाशुपतास्त्र-मन्त्र द्वारा शान्ति और पूजा का वर्णन करता है। इसमें महादेव (शिव) द्वारा स्कन्द को पाशुपतास्त्र-मन्त्र के उपयोग से शांति प्राप्त करने की विधि बताई गई है, जिसमें जप और हवन शामिल हैं। अध्याय 322 में, पाशुपतास्त्र-मन्त्र के जप और हवन के माध्यम से शांति प्राप्त करने की प्रक्रिया का वर्णन है। मुख्य बातें:
  • पाशुपतास्त्र-मन्त्र:
    यह एक शक्तिशाली मंत्र है जिसका उपयोग शांति और सुरक्षा के लिए किया जाता है।
  • जप और हवन:
    अध्याय में जप और हवन की विधि बताई गई है, जिसमें मंत्रों का पाठ और घी और गुग्गुल से आहुति देना शामिल है।
  • पूर्वकृत पुण्य का नाश:
    अध्याय में यह भी बताया गया है कि इस मन्त्र के आंशिक पाठ से पूर्वकृत पुण्य का नाश हो सकता है, लेकिन फडन्त सम्पूर्ण मन्त्र का जप आपत्ति आदि का नाश करता है।
  • असाध्य कार्यों की सिद्धि:
    घी और गुग्गुल से हवन करने से असाध्य कार्य भी पूरे किए जा सकते हैं। यह अध्याय अग्नि पुराण के महत्वपूर्ण भागों में से एक है जो शांति, सुरक्षा और आध्यात्मिक उन्नति के लिए पाशुपतास्त्र-मन्त्र के उपयोग पर प्रकाश डालता है। 

Wednesday, 23 July 2025

हरियाली अमावस आज ********************

हरियाली अमावस आज 
********************
सावन महीने का खास महत्व है। यह महीना बेहद पावन होता है। इस महीने में रोजाना देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही सावन सोमवार समेत विशेष शुभ अवसर पर साधक शिव-पार्वती के निमित्त व्रत रखते हैं।
सावन महीने में कई प्रमुख व्रत एवं त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें सावन शिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इसके अगले दिन हरियाली अमावस्या मनाई जाती है। इसे सावन अमावस्या भी कहा जाता है। 

कब है हरियाली अमावस्या?
======================
पंचांग के अनुसार, 24 जुलाई को देर रात 02 बजकर 28 मिनट पर सावन माह की अमावस्या तिथि शुरू होगी। वहीं, 25 जुलाई को देर रात 12 बजकर 40 मिनट पर सावन अमावस्या तिथि समाप्त होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। इस प्रकार 24 जुलाई को सावन अमावस्या मनाई जाएगी। सावन अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है।

सावन अमावस्या शुभ योग 
======================
ज्योतिषियों की मानें तो हरियाली अमावस्या पर हर्षण योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इनमें गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और शिववास योग प्रमुख हैं। इन योग में देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा करने से साधक की हर एक मनोकामना पूरी होगी। साथ ही सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलेगी।

शिववास योग
==============
हरियाली अमावस्या पर दुर्लभ शिववास योग का संयोग है। इस योग का निर्माण सुबह से हो रहा है। वहीं, शिववास योग देर रात 12 बजकर 40 मिनट तक है। इस दौरान भगवान शिव कैलाश पर जगत जननी देवी मां गौरी के साथ रहेंगे। इस समय में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी। साथ ही सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।

शुभ योग 
=========
हरियाली अमावस्या पर कई मंगलकारी शुभ योग बन रहे हैं। इनमें रवि पुष्य योग शाम 04 बजकर 43 मिनट से लेकर 25 जुलाई को सुबह 05 बजकर 39 मिनट तक है। सर्वार्थ सिद्धि योग और शिववास योग भी दिन भर है। साथ ही हर्षण योग सुबह 09 बजकर 51 मिनट तक है। वही, अमृत सिद्धि योग शाम 04 बजकर 43 मिनट से लेकर 25 जुलाई को सुबह 05 बजकर 39 मिनट तक है। वहीं, पुनर्वसु नक्षत्र शाम 04 बजकर 43 मिनट तक है। इसके बाद पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इन योग में देवों के देव महादेव की पूजा करने से साधक को पृथ्वी लोक पर स्वर्ग समान सुखों की प्राप्ति होगी।

हरियाली अमावस्या का महत्व
=======================
पुराणों में उल्लेख है कि श्रावण मास में किया गया दान, स्नान, पूजन और तप विशेष पुण्यफल देने वाला होता है। हरियाली अमावस्या के दिन किया गया व्रत, पूजा-पाठ और तर्पण व्यक्ति को पूर्व जन्मों और वर्तमान जीवन में अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति दिलाता है। साथ ही यह दिन जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला माना जाता है।


Wednesday, 2 April 2025

अष्टकम (Ashtakam) का पाठ

अष्टकम (Ashtakam) का पाठ करने से मन को शांति मिलती है, जीवन के कष्ट कम होते हैं, और भगवान की कृपा प्राप्त होती है. 
विभिन्न अष्टकमों के लाभ:
नारायण अष्टकम:
नियमित पाठ से मन को शांति, आध्यात्मिक संतुष्टि मिलती है, जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है, पापों का नाश होता है, और धन-समृद्धि आती है. 
महालक्ष्मी अष्टकम:
भक्तिपूर्वक पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, पाप नष्ट होते हैं, और धन-अन्न की प्राप्ति होती है. 
श्री कृष्ण अष्टकम:
भगवान कृष्ण जल्दी प्रसन्न होते हैं, कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं, और सभी कार्यों में सफलता मिलती है. 
हनुमान अष्टक:
हनुमान जी को प्रसन्न करने से हर तरह के संकट दूर होते हैं, जीवन में खुशियां आती हैं. 
गोपाल अष्टकम:
संतान प्राप्ति के लिए नियमित पाठ करने से संतान योग बनते हैं. 
भवानी अष्टकम:
यह अष्टकम भक्तों को भगवान की शरण में रहने और उनसे सब कुछ पाने का संदेश देता है. 
अष्टकम पाठ के सामान्य लाभ:
मानसिक शांति:
नियमित पाठ से मन शांत और स्थिर होता है. 
कष्टों से मुक्ति:
अष्टकम पाठ जीवन के कष्टों और समस्याओं से मुक्ति दिलाने में सहायक है. 
पाप नाश:
अष्टकम पाठ से पापों का नाश होता है. 
भक्ति और भाव में वृद्धि:
अष्टकम पाठ से भगवान के प्रति भक्ति और भाव में बढ़ोतरी होती है. 
सफलता:
अष्टकम पाठ से सभी कार्यों में सफलता मिलती है. 
रोग और कष्टों से राहत:
अष्टकम पाठ से रोग और कष्टों से राहत मिलती है. 
साहस और आत्मविश्वास:
अष्टकम पाठ भय और चिंता को दूर कर साहस और आत्मविश्वास प्रदान करता है. 
धन-समृद्धि:
अष्टकम पाठ से जीवन में धन और समृद्धि का आगमन होता है.

अष्टकम (Ashtakam) का पाठ

अष्टकम (Ashtakam) का पाठ करने से मन को शांति मिलती है, जीवन के कष्ट कम होते हैं, और भगवान की कृपा प्राप्त होती है. 
विभिन्न अष्टकमों के लाभ:
नारायण अष्टकम:
नियमित पाठ से मन को शांति, आध्यात्मिक संतुष्टि मिलती है, जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है, पापों का नाश होता है, और धन-समृद्धि आती है. 
महालक्ष्मी अष्टकम:
भक्तिपूर्वक पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, पाप नष्ट होते हैं, और धन-अन्न की प्राप्ति होती है. 
श्री कृष्ण अष्टकम:
भगवान कृष्ण जल्दी प्रसन्न होते हैं, कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं, और सभी कार्यों में सफलता मिलती है. 
हनुमान अष्टक:
हनुमान जी को प्रसन्न करने से हर तरह के संकट दूर होते हैं, जीवन में खुशियां आती हैं. 
गोपाल अष्टकम:
संतान प्राप्ति के लिए नियमित पाठ करने से संतान योग बनते हैं. 
भवानी अष्टकम:
यह अष्टकम भक्तों को भगवान की शरण में रहने और उनसे सब कुछ पाने का संदेश देता है. 
अष्टकम पाठ के सामान्य लाभ:
मानसिक शांति:
नियमित पाठ से मन शांत और स्थिर होता है. 
कष्टों से मुक्ति:
अष्टकम पाठ जीवन के कष्टों और समस्याओं से मुक्ति दिलाने में सहायक है. 
पाप नाश:
अष्टकम पाठ से पापों का नाश होता है. 
भक्ति और भाव में वृद्धि:
अष्टकम पाठ से भगवान के प्रति भक्ति और भाव में बढ़ोतरी होती है. 
सफलता:
अष्टकम पाठ से सभी कार्यों में सफलता मिलती है. 
रोग और कष्टों से राहत:
अष्टकम पाठ से रोग और कष्टों से राहत मिलती है. 
साहस और आत्मविश्वास:
अष्टकम पाठ भय और चिंता को दूर कर साहस और आत्मविश्वास प्रदान करता है. 
धन-समृद्धि:
अष्टकम पाठ से जीवन में धन और समृद्धि का आगमन होता है.