Sunday, 23 October 2016

कौडिया

कौडिय़ों के कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं-
1- यदि प्रमोशन नहीं हो रहा है तो 11 कौडिय़ां लेकर किसी लक्ष्मी मंदिर में अर्पित कर दें। आपके
प्रमोशन का रास्ते खुल जाएंगे।
2- यदि दुकान में बरकत नहीं हो रही है तो दुकान के गल्ले में 7 कौडिय़ां रखें और सुबह-शाम
इनकी पूजा करें। निश्चित ही बरकत होने लगेगी।
3- यदि आप नया घर बनवा रहे हैं तो उसकी नींव में 21 कौडिय़ां डाल दें। ऐसा करने से आपके घर
में कभी पैसों की कमी नहीं रहेगी और घर में सुख-शांति भी बनी रहेगी।
4- अगर आपने नया वाहन खरीदा है तो उस पर 7 कौडिय़ां एक काले धागे में पिरोकर बांध दें।
इससे वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना कम हो जाएगी।

Kartik maas

कार्तिक मास में यह बातें करनी चाहिए (बहुत लाभ होता है) -
तुलसीजी की मिट्टी का तिलक, तुलसी के पौधे को सुबह एक- आधा ग्लास पानी देना एक मासा सुवर्ण दान का फल देता है , तुलसी का वन अथवा तुलसी के पौधे लगाना हीतकारी है |
गंगाजी का स्नान, अथवा तो प्रभात का स्नान (सूर्योदय के पूर्व) | ब्रह्मचर्य का पालन, चटोरापन न हो| धरती पर शयन...
उड़द , मसूर आदि भारी चीज़ो का त्याग करना चाहिए, तिल का दान करना चाहिए..कार्तिक मास में सत्संग, साधु संतों का जीवन चरित्र का अध्ययन, मार्गदर्शन का अनुसरण करना चाहिए…मोक्ष प्राप्ति का इरादा बना देना चाहिए…
कार्तिक मास में अपने गुरुदेव का सुमिरन करते हुए जो "ॐ नमो नारायणाय " का जप करता है,उसे बहुत पुण्य होता है |

Lakshmi ashtakam


महालक्ष्मि अष्टकं : नमस्तेऽस्तु   महामाये   श्रीपीठे   सुरपूजिते

Mahalakshmi Ashtakam: Namastestu Mahamaye Sripithe Surapujite

Devi Lakshmi 

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥१॥
Namastestu Mahaa-Maaye Shrii-Piitthe Sura-Puujite |
Shangkha-Cakra-Gadaa-Haste Mahaalakssmi Namostute ||1||

Meaning:
1.1: (Salutations to Devi Mahalakshmi) Salutations to the Mahamaya (the Great Enchantress), Who is Worshipped by the Devas in Sri Pitha (Her Abode).
1.2: Who has the Conch, Disc and Mace in Her Hands; Salutations to that Mahalakshmi.




नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि ।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥२॥
Namaste Garudda-Aaruuddhe Kola-Aasura-Bhayamkari |
Sarva-Paapa-Hare Devi Mahaalakssmi Namostute ||2||

Meaning:
2.1: (Salutations to Devi Mahalakshmi) Salutations to the One Who Rides the Garuda, Who is the Terror to Kolasura,
2.2: The Devi who Removes All Sins; Salutations to that Mahalakshmi.




सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि ।
सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥३॥
Sarvajnye Sarva-Varade Sarva-Dusstta-Bhayamkari |
Sarva-Duhkha-Hare Devi Mahaalakssmi Namostute ||3||

Meaning:
3.1: (Salutations to Devi Mahalakshmi) Who is All-Knowing, Who is the Giver of All Boons, Who is the Terror to All the Wicked,
3.2: The Devi who Removes All Sorrows; Salutations to that Mahalakshmi.




सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि ।
मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥४॥
Siddhi-Buddhi-Prade Devi Bhukti-Mukti-Pradaayini |
Mantra-Muurte Sadaa Devi Mahaalakssmi Namostute ||4||

Meaning:
4.1: (Salutations to Devi Mahalakshmi) The Devi who Gives Success and Intelligence and Gives Wordly Enjoyment and Liberation,
4.2: The Devi who Always abides as the Embodiment of Mantra; Salutations to that Mahalakshmi.




आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि ।
योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥५॥
Aady-Anta-Rahite Devi Aadya-Shakti-Maheshvari |
Yogaje Yoga-Sambhuute Mahaalakssmi Namostute ||5||

Meaning:
5.1: (Salutations to Devi Mahalakshmi) The Devi who is Without Beginning and End, Who is the Primal Energy, and the Great Goddess,
5.2: Who is Born of Yoga, Who is United with Yoga; Salutations to that Mahalakshmi.




स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे ।
महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥६॥
Sthuula-Suukssma-Mahaaroudre Mahaa-Shakti-Mahodare |
Mahaa-Paapa-Hare Devi Mahaalakssmi Namostute ||6||

Meaning:
6.1: (Salutations to Devi Mahalakshmi) Who is both Grossand Subtle and Most Terrible, Who is With Great Power and Prosperity,
6.2: The Devi who Removes All Sins; Salutations to that Mahalakshmi.




पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि ।
परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥७॥
Padma-Aasana-Sthite Devi Para-Brahma-Svaruupinni |
Parameshi Jagan-Maatar-Mahaalakssmi Namostute ||7||

Meaning:
7.1: (Salutations to Devi Mahalakshmi) The Devi Who is Seated on a Lotus, Who is of the Nature of Supreme Brahman,
7.2: Who is the Supreme Lord and the Mother of the Universe; Salutations to that Mahalakshmi.




श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते ।
जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥८॥
Shveta-Ambara-Dhare Devi Naana-Alangkaara-Bhuussite |
Jagatsthite Jagan-Maatar-Mahaalakssmi Namostute ||8||

Meaning:
8.1: (Salutations to Devi Mahalakshmi) The Devi who is Dressed in White Garments, Who is Adorned with Various Ornaments,
8.2: Who Abides in this Universe and is the Mother of the Universe; Salutations to that Mahalakshmi.




महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः ।
सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥९॥
Mahaalakssmy-Assttakam Stotram Yah Patthed-Bhaktimaan-Narah |
Sarva-Siddhim-Avaapnoti Raajyam Praapnoti Sarvadaa ||9||

9.1: Whoever recites this Mahalakshmi Ashtakam Stotramwith Devotion, ...
9.2: ... Will attain all Success and Prosperity, always.




एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् ।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः ॥१०॥
Eka-Kaale Patthen-Nityam Mahaa-Paapa-Vinaashanam |
Dvi-Kaalam Yah Patthen-Nityam Dhana-Dhaanya-Samanvitah ||10||

10.1: Reciting this Once Every Day will Destroy Great Sins,
10.2: Reciting this Twice Every Day will bestow one with Wealth and Foodgrains.




त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् ।
महालक्ष्मिर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥११॥
Tri-Kaalam Yah Patthen-Nityam Mahaa-Shatru-Vinaashanam |
Mahaalakssmir-Bhaven-Nityam Prasannaa Varadaa Shubhaa ||11|| 

11.1: Reciting this Thrice Everyday will Destroy Great Enemies, ...
11.2: ... And Devi Mahalakshmi will be Pleased with him and extend Her Boon-Giving Grace and Auspiciouspresence.

Saturday, 22 October 2016

Diwali

Why we should use earthen pots (Diya etc) during Deewali ?

 Earthen pots are made from earth, using earthen pot in pooja, shows our dedication for mother earth, which gives us positive vibrations.

 We light Diya , which contains oil (Shani) or Ghee ( Venus) with Fire (Mars), remember Mars and Saturn have enmity with each other , so here we are mixing the both like lighting oil with fire, so we involve Mercury here (Earthly planet) in form of earthen pots, which is comfortable with almost every planets . we know that Fire can be controlled in earthen pot easily. So this is a type of remedy too to get positive vibrations from planets.

 Those people who make earthen pots , it involves hard work, these people come under Saturn department, so using earthen items, is type of help to those people, so this is a nice remedy for Saturn.

 Purchasing earthen pots from poor people and helping them is already a super-duper remedy and blessings.

Thursday, 20 October 2016

पूजा

प्रायः हिन्दूओं में पूजा करते समय हम देखते हैं कि कुछ मान्यताओं का अनिवार्य रूप से पालन किया जाता है यथा मौली बांधना, तिलक लगाना, नारियल फोडऩा आदि। इन सभी का पूजा में प्रतीकात्मक महत्व है, जिन्हें हम सभी को जानना चाहिए।

धार्मिक कार्यों में मौली बांधना

शास्त्रों के अनुसार मौली बांधने से त्रिदेव-ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश और तीन देवियों-लक्ष्मी, पार्वती व सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है। ब्रह्मा की कृपा से कीर्ति व विष्णु की अनुकंपा से रक्षा बल मिलता है। शिव दुर्गुणों के विनाशक हैं। इसी प्रकार लक्ष्मी से धन, दुर्गा से शक्ति व सरस्वती की कृपा से बुद्धि मिलती है। मौली बांधने की प्रथा तब से है जब दानवीर राजा बलि के लिए माता लक्ष्मी ने उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था।

पूजा में कर्पूर का महत्त्व

मान्यता है कि कर्पूर जलाने से देवदोष व पितृदोष का शमन होता है। कर्पूर अति सुगंधित पदार्थ है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार इसकी सुगंध से जीवाणु और विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव नष्ट होते हैं जिससे वातावरण शुद्ध होकर रोगों का भय नहीं रहता। इसलिए धार्मिक कार्यों में कर्पूर का विशेष महत्त्व बताया गया है।

माथे पर क्यों लगाते हैं तिलक

ललाट पर दोनों आंखों के बीच आज्ञाचक्र (या तीसरी आंख) का स्थान माना जाता है। सामान्य तौर पर यह निष्क्रिय ही रहता है। व्यक्ति में अतीन्द्रिय ज्ञान, असाधारण क्षमताएं सभी का नियंत्रण इसी चक्र से होता है। इसी को सक्रिय करने के लिए हिन्दुओं में तिलक लगाया जाता है। सुहागिन स्त्रियां इस स्थान पर बिंदी लगाती हैं।

धूप, अगरबत्ती जलाना

धूप विशेष औषधियों तथा जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनाई जाती हैं। इससे इसमें औषधियों के गुण आ जाते हैं। इसी कारण जहां भी धूप जलाई जाती है वहां आस-पास के माहौल में मक्खी, मच्छर, पिस्सू तथा अन्य किसी भी तरह के बैक्टीरिया का नाश होता है।

नारियल फोडना

पुराणों तथा स्मृतियों के अनुसार ऋषि विश्वामित्र ने एक बार इन्द्र से नाराज होकर दूसरे स्वर्ग की रचना करने की ठान ली परन्तु वह दूसरे स्वर्ग की रचना से असंतुष्ट थे। अत: पूरी सृष्टि ही दूसरी बनाने लगे। दूसरी सृष्टि बनाने के क्रम में उन्होंने मानव के प्रतीक के रूप में नारियल बनाया। इसी कारण से नारियल के खोल पर बाहर से दो आंखें तथा एक मुख की सी संरचना दिखाई पड़ती है। पूजा में नारियल फोडऩे का अर्थ भी यही है व्यक्ति ने स्वयं को अपने इष्ट देवता के चरणों में समर्पित कर दिया है। अब उसने अपने आपको भगवान को समर्पित कर दिया है, उसका स्वयं का कोई भी किसी भी तरह का अस्तित्व नहीं रहा है।

क्या कहती है हाथों की रेखा

हमारी हथेली में कई प्रकार की रेखाएं होती हैं, जैसे- जीवन रेखा, हृदय रेखा, मस्तिष्क रेखा, विवाह रेखा, सूर्य रेखा, बुध रेखा, भाग्य रेखा आदि। हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार भाग्य रेखा बताती है कि व्यक्ति भाग्यशाली है या नहीं।

कहां होती है भाग्य रेखा

भाग्य रेखा सामान्यत: जीवन रेखा, मणिबंध, मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा या चंद्र पर्वत से प्रारंभ होकर शनि पर्वत (मध्यमा उंगली के नीचे वाला भाग शनि पर्वत कहलाता है) की ओर जाती है।

भाग्य रेखा का फलादेश

यदि किसी व्यक्ति की हथेली में भाग्य रेखा मणिबंध से प्रारंभ होकर शनि पर्वत तक गई हो और दोष रहित है तो व्यक्ति भाग्यशाली होता है। ऐसे लोग जीवन में सफलताएं प्राप्त करते हैं।
यदि हथेली में भाग्य रेखा जीवन रेखा से प्रारंभ हो तो व्यक्ति खुद की मेहनत से काफी अधिक धन प्राप्त करता है।
जिन लोगों की हथेली में भाग्य रेखा चंद्र क्षेत्र से प्रारंभ हुई है, वे दूसरों की मदद या प्रोत्साहन से सफलता प्राप्त करने वाले हो सकते हैं।
यदि चंद्र पर्वत से निकलकर कोई अन्य रेखा भाग्य रेखा के साथ-साथ चले तो व्यक्ति की शादी अत्यंत धनी परिवार में होती है। वह व्यक्ति किसी स्त्री की मदद से सफलताएं प्राप्त करता है।
यदि भाग्य रेखा हथेली को पार करते हुए मध्यमा उंगली (मिडिल फिंगर) तक जा पहुंचे तो यह अशुभ योग दर्शाती है। ऐसा व्यक्ति खुद की गलतियों से हानि उठाता है।
यदि भाग्य रेखा किसी स्थान पर जीवन रेखा को काट दे तो उस आयु में व्यक्ति को कोई अपमान या कलंक झेलना पड़ सकता है।
भाग्य रेखा हथेली के प्रारंभ से जितनी अधिक दूरी से शुरू होती है, व्यक्ति का भाग्योदय उतने ही विलंब से होता है।
भाग्य रेखा टूटी हुई या अन्य रेखाओं से कटी हुई हो तो यह भाग्यहीनता का संकेत है।
भाग्य रेखा हृदय रेखा पर रुक जाए तो व्यक्ति प्रेम संबंध के कारण असफलताएं प्राप्त करता है, लेकिन यह रेखा हृदय रेखा के साथ गुरु पर्वत तक जा पहुंचे तो वह व्यक्ति प्रेम संबंध से सफलताएं प्राप्त करता है।
हथेली में दो भाग्य रेखाएं बहुत शुभ होती है।
यदि भाग्य रेखा मस्तिष्क रेखा पर रुक जाए तो व्यक्ति खुद की गलती से असफलताएं प्राप्त करता है।

जीवन रेखा: जीवन रेखा शुक्र पर्वत (अंगूठे के नीचे वाला भाग) को घेरे रहती है। यह रेखा तर्जनी उंगली (इंडेक्स फिंगर) और अंगूठे के मध्य से शुरू होती है और मणिबंध तक जाती है।
मस्तिष्क रेखा: यह रेखा हथेली के मध्य भाग में आड़ी स्थिति में रहती है। मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा के प्रारंभिक स्थान के पास से ही शुरू होती है। मस्तिष्क रेखा यहां से प्रारंभ होकर हथेली की दूसरी ओर जाती है।
हृदय रेखा: यह रेखा मस्तिष्क रेखा के बराबर चलती है। हृदय रेखा की शुरुआत हथेली पर बुध पर्वत (सबसे छोटी उंगली के नीचे वाला भाग) के नीचे से आरंभ होकर गुरु पर्वत (इंडेक्स फिंगर के नीचे वाले भाग को गुरु पर्वत कहते हैं।) की ओर जाती है।
मणिबंध: हथेली जिस स्थान से प्रारंभ होती है, वहां आड़ी अवस्था में कुछ रेखाएं होती हैं, इन्हीं रेखाओं को मणिबंध कहा जाता है।
सूर्य रेखा: यह रेखा सामान्यत: हथेली के मध्यभाग में रहती हैं। सूर्य रेखा मणिबंध (हथेली के अंतिम छोर के नीचे स्थित आड़ी रेखाओं को मणिबंध कहते हैं।) से ऊपर रिंग फिंगर के नीचे वाले सूर्य पर्वत की ओर जाती है।
स्वास्थ्य या बुध रेखा: यह बुध पर्वत (सबसे छोटी उंगली के नीचे वाले भाग को बुध पर्वत कहते हैं।) से आरंभ होकर शुक्र पर्वत (अंगूठे के नीचे वाले भाग को शुक्र पर्वत कहते हैं) की ओर जाती है।

हथेली में पर्वतों की स्थिति

– तर्जनी उंगली के नीचे गुरु पर्वत होता है।
– मध्यमा उंगली के नीचे शनि पर्वत होता है।
– अनामिका उंगली के नीचे सूर्य पर्वत होता है।
– सबसे छोटी उंगली के नीचे बुध पर्वत होता है।
– अंगूठे के नीचे शुक्र पर्वत होता है।
– शुक्र पर्वत के सामने हथेली के दूसरी ओर चंद्र पर्वत होता है।
– चंद्र पर्वत और बुध पर्वत के मध्य मंगल पर्वत रहता है।

यह उप्ताद डाइटिंग करने बगैर आपके वज़न को कम करेगा !
फ़ौरन से वज़न कम हो जायेगा ! एक हफ्ते में ७ किलो और दो हफ़्तों में १४ किलो कम हो जा
वज़न कम करना बिलकुल आसान है ! इस को घटा सकता है यह उपाय ...
आपका वज़न कम नहीं हो जाता है ? एक काम कीजिये, पानी की गिलास मं ...
ध्यान रखें यहां सिर्फ भाग्य रेखा के आधार पर भविष्य से संबंधित जानकारी दी गई है। अन्य रेखाओं के शुभ-अशुभ प्रभाव से यहां बताया गया फलादेश बदल भी सकता है। एकदम सही भविष्यवाणी के लिए दोनों हथेलियों की सभी रेखाओं का गहन अध्ययन किया जाना चाहिए।

आर्थिक तंगी है तो करे ये उपाय

शास्त्रों के अनुसार हनुमानजी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवी-देवताओं में से एक हैं। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस के अनुसार माता सीता द्वारा पवनपुत्र हनुमानजी को अमरता का वरदान दिया गया है। इसी वरदान के प्रभाव से इन्हें भी अष्टचिरंजीवी में शामिल किया जाता है। कलयुग में हनुमानजी भक्तों की सभी मनोकामनाएं तुरंत ही पूर्ण करते हैं।

बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय बताए गए हैं। इन्हीं उपायों में से एक उपाय यहां बताया जा रहा है। इस उपाय को विधिवत किया जाए तो बहुत जल्दी सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं। यह उपाय पीपल के पत्तों से किया जाता है।

श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमानजी की कृपा प्राप्त होते ही भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं। पैसों से जुड़ी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। कोई रोग हो तो वह भी नष्ट हो जाता है। इसके साथ ही यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह दोष हो तो पवनपुत्र की पूजा से वह भी दूर हो जाता है। हनुमानजी की पूजा में पवित्र का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति पैसों की तंगी का सामना करना रहा है तो उसे प्रति मंगलवार और शनिवार को पीपल के 11 पत्तों का यह उपाय अपनाना चाहिए।

उपाय इस प्रकार है-

सप्ताह के प्रति मंगलवार और शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त में उठें। इसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर किसी पीपल के पेड़ से 11 पत्ते तोड़ लें। ध्यान रखें पत्ते पूरे होने चाहिए, कहीं से टूटे या खंडित नहीं होने चाहिए। इन 11 पत्तों पर स्वच्छ जल में कुमकुम या अष्टगंध या चंदन मिलाकर इससे श्रीराम का नाम लिखें।

नाम लिखते समय हनुमान चालीसा का पाठ करें।

जब सभी पत्तों पर श्रीराम नाम लिख लें, उसके बाद राम नाम लिखे हुए इन पत्तों की एक माला बनाएं। इस माला को किसी भी हनुमानजी के मंदिर जाकर वहां बजरंगबली को अर्पित करें। इस प्रकार यह उपाय करते रहें। कुछ समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।

ध्यान रखें उपाय करने वाला भक्त किसी भी प्रकार के अधार्मिक कार्य न करें। अन्यथा इस उपाय का प्रभाव निष्फल हो जाएगा। उचित लाभ प्राप्त नहीं हो सकेगा। साथ ही अपने कार्य और कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहें।

हनुमान जी को प्रसन्न करने के अन्य उपाय

नारियल के उपाय

– किसी भी हनुमान मंदिर जाएं और अपने साथ नारियल लेकर जाएं। मंदिर में नारियल को अपने सिर पर सात बार वार लें। इसके बाद यह नारियल हनुमानजी के सामने फोड़ दें। इस उपाय से आपकी सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।
– शनिवार को हनुमानजी के मंदिर में 1 नारियल पर स्वस्तिक बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें।

हनुमानजी को सिंदूर का चोला चढ़वाएं

हनुमानजी को सिंदूर और तेल अर्पित करें। जिस प्रकार विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं, ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। जो भी व्यक्ति शनिवार को हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करता है उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।
अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी हनुमान मंदिर में बजरंग बली की प्रतिमा पर चोला चढ़वाएं। ऐसा करने पर आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएंगी।

चौमुखा दीपक का उपाय

हनुमानजी के सामने शनिवार की रात को चौमुखा दीपक लगाएं। यह एक बहुत ही छोटा लेकिन चमत्कारी उपाय है। ऐसा नियमित रूप से करने पर आपके घर-परिवार की सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं।

पीपल के नीचे करें ये उपाय

– किसी पीपल पेड़ को जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।

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