Thursday, 27 November 2025

अमावस्या पर करे ---

🌞  अमावस्या पर करे ---
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💵 जिनको पैसो की कमजोरी है तो तुलसी माता को 108 परिक्रमा करें | और  श्री हरि.... श्री हरि.... श्री हरि.... श्री हरि.... ‘श्री’ माना सम्पदा, ‘हरि’ माना भगवान की दया पाना | तो गरीबी चली जायेगी | 

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🌷 *ससुराल में तकलीफ़ हो तो* 🌷

👩अगर ससुराल में बहुत कष्ट है .... अपनी शुभ मनोकामनाएं पूरी न होने की पीड़ा है उनके लिए  माँ पार्वती का स्मरण करते हुए उनको मन ही मन प्रणाम करें .... " हे माँ मैं अपने घर में सुख ... शांति ... और समृद्धि की वृद्धि हेतुकर रही हूँ  "... सुबह ये संकल्प करें और  मंत्र से माँ पार्वती को प्रणाम करें ....
🌷 *ॐ पार्वतये नमः* 

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फ़िर 11माला जपे 

🌷 * ॐ गौरीशंकराय नम : "रुद्राक्ष की माला से 

🙏🏻 फिर भगवान गणपतिजी और कार्तिक स्वामी को मन ही मन प्रणाम कर दें ... हो सके तो 8 बत्ती वाला दीपक जलाएं .... और रात भर वो दीपक जलता रहे ।

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🙏अमावस्या के पर्व में स्नान-दान का बड़ा महत्त्व है।
इस दिन भी मौन रहकर स्नान करने से हजार गौदान का फल होता है।

इस दिन पीपल और भगवान विष्णु का पूजन तथा उनकी 108 प्रदक्षिणा करने का विधान है। 108 में से 8 प्रदक्षिणा पीपल के वृक्ष को कच्चा सूत लपेटते हुए की जाती है। 

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इस दिन तुलसी की 108 परिक्रमा करने से दरिद्रता मिटती है।
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🌷 *धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए* 🌷

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🔥  हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।
🍛सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गुगल, ७. गुड़, ८. देशी कपूर,  कण्डा।

🔥 विधि: कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त 8 वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर इसको जलाये ।

मार्गशीर्ष

#remedialpathmakinglifeeeasy

#मार्गशीर्ष
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☀️🍀🌿🍀🥀🌷✡️🌻🌸💐🌅🔯🌹🎊☀️🎉🌿🍀♥️🥀🌷
#मार्गशीर्ष #हिन्दू #पंचांग का #नौवां महीना है.इसे #अग्रहायण या #अगहन का #महीना भी कहते हैं. 
इस वर्ष 24 नवंबर 2018 (उत्तर भारत हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार) से मार्गशीर्ष का आरम्भ हो गया है। इसे हिन्दू शास्त्रों में सर्वाधिक पवित्र महीना माना जाता है. यह इतना पवित्र है कि भगवान गीता में कहते हैं कि - महीनों में, मैं #मार्गशीर्ष हूं. इसी महीने से सतयुग का आरम्भ माना जाता है.मार्गशीर्ष माह में मथुरा पुरी निवास करने का बहुत महत्व है।

 प्राचीन समय में मार्गशीर्ष से ही नववर्ष का प्रारम्भ माना जाता था। मार्गशीर्ष माह में #सनातन #संस्कृति के दो प्रमुख विवाह संपन्न हुए थे। शिव विवाह तथा राम विवाह। मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को राम विवाह तो सर्वविदित है ही साथ ही शिवपुराण, रुद्रसंहिता, पार्वतीखण्ड के अनुसार सप्तर्षियों के समझाने से हिमवान ने शिव के साथ अपनी पुत्री का विवाह मार्गशीर्ष माह में निश्चित किया था ।
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मार्गशीर्ष माह में मथुरापुरी निवास करने का बहुत महत्व है। स्कन्दपुराण में स्वयं श्रीभगवान, ब्रह्मा से कहते हैं -
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“पूर्णे वर्षसहस्रे तु तीर्थराजे तु यत्फलम् । 
तत्फलं लभते पुत्र सहोमासे मधोः पुरे ।।” 

अर्थात तीर्थराज प्रयाग में एक हजार वर्ष तक निवास करने से जो फल प्राप्त होता है, वह मथुरापुरी में केवल अगहन (मार्गशीर्ष) में निवास करने से मिल जाता है।

मार्गशीर्ष मास में केवल अन्नका दान करने वाले मनुष्यों को ही सम्पूर्ण अभीष्ट फलों की प्राप्ति हो जाती है | #मार्गशीर्षमास में अन्न का दान करने वाले मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं |
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शिवपुराण के अनुसार मार्गशीर्ष में #चाँदी का दान करने से वीर्य की वृद्धि होती है। शिवपुराण विश्वेश्वर संहिता के अनुसार #मार्गशीर्ष में #अन्नदान का सर्वाधिक महत्व है
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स्कन्द पुराण में बताया गया है कि भगवान की कृपा पाने के लिए घर पर रखी भागवत को दिन में एक बार पूजा-पाठ के दौरान जरूर प्रणाम करना चाहिए।
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श्रीकृष्ण ने गोपियां को मार्गशीर्ष माह की महत्ता बताई थी तथा उन्होंने कहा था कि मार्गशीर्ष के महीने में यमुना स्नान से मैं सहज ही प्राप्त हो जाता हूँ अत: इस माह में नदी स्नान का विशेष महत्व माना गया है
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- जो व्यक्ति मार्गशीर्ष मास में ब्रह्रा मुहुर्त में तीन दिन तक किसी पवित्र नदी में स्नान करता है उस पर भगवान की कृपा हमेशा बनी रहती है।
इस महीने से संध्याकाल की उपासना अवश्य करनी चाहिए। 
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जो प्रतिदिन एक बार भोजन करके समूचे मार्गशीर्ष को व्यतीत करता है और भक्तिपूर्वक ब्राह्मणों को भोजन कराता है, वह रोगों और पातकों से मुक्त हो जाता है।
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- अगहन मास में गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।
तुलसी के पत्तों का भोग लगाएं और उसेप्रसाद की तरह ग्रहण करें.

- पूरे महीने "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करें.
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- अगहन माह की पूर्णिमा तिथि को चन्द्रमा का पूजन अवश्य करना चाहिए।इस दिन चन्द्रमा को अमृत तत्व की प्राप्ति भी होती है.
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इस महीने में नित्य गीता का पाठ करें.
इस महीने में संतान के लिए वरदान बहुत सरलता से मिलता है

मार्गशीर्ष में चित्रा और विशाखा शून्य नक्षत्र हैं इनमें कार्य करने से धन का नाश होता है।

मार्गशीर्ष में सप्तमी, अष्टमी मासशून्य तिथियाँ हैं। मासशून्य तिथियों में मङ्गलकार्य करने से वंश तथा धन का नाश होता है।

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Tuesday, 25 November 2025

स्कंध षष्ठी आज

चंपाषष्ठी / स्कंध षष्ठी आज 
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मार्गशीर्ष (अगहन) माह की शुक्लपक्ष की षष्टी तिथि के दिन चंपा षष्ठी का पर्व मनाया जाता हैं। चंपा षष्ठी को चम्पा छठ, स्कंद षष्टी और बैंगन छठ के नाम से भी जाना जाता हैं। यह पर्व प्रमुख रूप से महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्य में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता हैं। इस दिन खंडोबा (खंडेराव) की पूजा की जाती है। खंडोबा को भगवान शिव का अवतार और चरवाहों, किसानों व शिकारियों का देवता माना जाता हैं।
इस दिन को स्कंद षष्टी भी कहा जाता हैं, दक्षिण भारत के कई स्थानों पर इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती हैं। इस दिन भगवान शिव के मार्कंडेय स्वरूप की उपासना करने से जातक का जीवन सुखमय हो जाता है और उसके इस जन्म व पूर्व जन्म के पापों का भी निवारण हो जाता हैं।

चंपा षष्ठी (चम्पा छठ) कब हैं?
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इस वर्ष चंपा षष्ठी का पर्व 26 नवम्बर 2025, बुधवार के दिन मनाया जायेगा।

चंपा षष्ठी का महत्व
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हिंदु मान्यता के अनुसार चंपा षष्ठी के दिन भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय का व्रत एवं पूजन करने से साधक को उनकी कृपा प्राप्त होती हैं। विधि अनुसार इस दिन का व्रत एवं पूजन करने से

• साधक के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।

• साधक जीवन की परेशानियों से मुक्त हो जाता हैं।

• साधक के कार्य बिना किसी बाधा के पूर्ण हो जाते हैं।

• सुखमय जीवन की प्राप्ति होती हैं।

• घर-परिवार में शांति होती हैं।

• धन-समृद्धि में वृद्धि होती हैं।

• संतान पर आने वाली विपत्तियों का नाश होता हैं। और उनका जीवन निष्कंटक हो जाता हैं।

• जातक जीवन के सभी सुखों को भोगकर मृत्यु के बाद मोक्ष को प्राप्त होता हैं।

• ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा और उनका व्रत करने से साधक को मंगल ग्रह की अनुकूलता प्राप्त होती हैं।


चंपा षष्टी की पूजा विधि
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• चंपा षष्ठी के दिन प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व ही स्नानादि नित्य क्रिया से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

• शिवालय जाकर दूध व गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें।

• शिवजी को बेलपत्र, फल-फूल अर्पित करें। चंदन से तिलक करें।

• भगवान शिव का ध्यान करें। शिवमहिम्नस्त्रोत्र और शिव चालीसा का पाठ करें।

• इस मंत्र का 108 बार जाप करें – ॐ श्रीं अर्धनारीश्वराय प्रेमतत्त्वमूर्तये नमः।

• भगवान शिव को भोग में देशी खाण्ड़, बाजरा और बैंगन अर्पित करें। फिर उसे भोग लगाकर निर्धन और जरूरतमंद लोगों में बाँट दें।

• संध्या (प्रदोष काल) के समय शिवालय में तेल के नौ दीपक जलायें।

चंपा षष्ठी की कथा
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पौराणिक कथा के अनुसार एक समय मणि-मल्ह नाम के दो राक्षस थे। वो दोनो सगे भाई थे। वो ब्रह्मा जी से वरदान पाकर बहुत शक्तिशाली और निरंकुश हो गये थे। उन्होने अपनी शक्ति के अभिमान में आकर ऋषि-मुनियों का जीवन दूभर कर दिया था। तब ऋषियों ने देवताओं से सहयता मांगी पर कोई लाभ ना हुआ। मणि-मल्ह दोनों भाइयों की शक्ति के सामने उनकी एक ना चली तब सभी मिलकर भगवान शिव की शरण में गये। तब भगवान शिव ने उनकी सहायता का वचन दिया।
भगवान शिव भैरव रूप में प्रकट हुये और देवी पार्वती ने शक्ति स्वरूप में प्रकट होकर खंडोबा नामक स्थान पर मणि-मल्ह नाम के दोनों दैत्य भ्राताओं से छह दिनों तक युद्ध करके उन्हे चम्पा षष्टी के ही दिन मृत्यु के घाट उतार दिया था। इस लिये इस दिन चम्पा षष्टी का पर्व बहुत धूम-धाम से मनाया जाता हैं। महाराष्ट्र में भगवान शिव के अवतार भैरव को मार्तंड-मल्लहारी व खंडोबा के नाम से पुकारा जाता हैं।


हनुमानजी को सिंदूर का चोला चढ़वाएं

हनुमानजी को सिंदूर का चोला चढ़वाएं

हनुमानजी को सिंदूर और तेल अर्पित करें। जिस प्रकार विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं, ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। जो भी व्यक्ति शनिवार को हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करता है उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।
अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी हनुमान मंदिर में बजरंग बली की प्रतिमा पर चोला चढ़वाएं। ऐसा करने पर आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएंगी।

चौमुखा दीपक का उपाय

हनुमानजी के सामने शनिवार की रात को चौमुखा दीपक लगाएं। यह एक बहुत ही छोटा लेकिन चमत्कारी उपाय है। ऐसा नियमित रूप से करने पर आपके घर-परिवार की सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं।

पीपल के नीचे करें ये उपाय

– किसी पीपल पेड़ को जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।

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tara chakra

1 जन्म तारा - चन्द्रमा जिस नक्षत्र मै है वह जन्म तारा नक्षत्र है इस तारा नक्षत्र मै इंसान को अपने कर्मो का फल महादशा अंतर दशा मै मिलता है, जो भी अच्छा बुरा करोगे उस का फल मिलेगा

2 सम्पत तारा - चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का  दूसरा नक्षत्र होता है वह सम्पत तारा नक्षत्र मै आता है इस नक्षत्र की महादशा ओर अंतर दशा मै धन ओर समृद्धि मिलती है

3 विपत् तारा - चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का  तीसरा नक्षत्र होता है वह विपत  तारा नक्षत्र मै आता है  इस नक्षत्र मै बैठे ग्रह की महादशा ओर अंतर दशा मै खतरे मुसीबत दुर्घटना आपदाए आ सकती है

4 शैम् तारा - चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का चौथा नक्षत्र होता है वह शेम तारा नक्षत्र मै आता है  इस नक्षत्र मै बैठे ग्रह की महादशा ओर अंतर दशा अच्छी ओर शुभ कामों मै जाति हे


5 प्रत्यारी तारा -  चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का पांचवा नक्षत्र होता है वह प्रत्यारी तारा नक्षत्र मै आता है  इस नक्षत्र मै बैठे ग्रह की महादशा ओर अंतर दशा मै बाधा ओर विफलता आती है

6 साधक तारा -  चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का छता नक्षत्र होता है वह प्रत्यारी तारा नक्षत्र मै आता है  इस नक्षत्र मै बैठे ग्रह की महादशा ओर अंतर दशा मै उपलब्धिया सफलता जीवन मै वृद्धि स्थिति मै सुधार आता है

7  वध तारा -  चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का सातवां नक्षत्र होता है वह वध तारा नक्षत्र मै आता है  इस नक्षत्र मै बैठे ग्रह की महादशा ओर अंतर दशा मै मृत्यु गंभीर कष्ट बीमारी मुसीबत ओर दुर्भाग्य का खतरा रहता है

8  मित्र तारा -  चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का आठव नक्षत्र होता है वह मित्र तारा नक्षत्र मै आता है  इस नक्षत्र मै बैठे ग्रह की महादशा ओर अंतर दशा मै उपलब्धिया सफलता जीवन मै वृद्धि सहायता दोस्ती खुशी ओर चिंता सै छुटकारा मिलता है

9  अति मित्र तारा -  चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का नवमा नक्षत्र होता है वह अतिमित्र तारा नक्षत्र मै आता है  इस नक्षत्र मै बैठे ग्रह की महादशा ओर अंतर दशा मै उपलब्धिया सफलता आसानी सै जीवन जीना, आराम दायक जिंदगी होती है हर तरफ सफलता मिलती है

राहु के लिए :

राहु के लिए : 
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समय रात्रिकाल 

भैरव पूजन या शिव पूजन करें। काल भैरव अष्टक का पाठ करें। 

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राहु के मूल मंत्र का जप रात्रि में 18,000 बार 40 दिन में करें। 

मंत्र : 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:'। 

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दान-द्रव्य : गोमेद, सोना, सीसा, तिल, सरसों का तेल, नीला कपड़ा, काला फूल, तलवार, कंबल । 

शनिवार का व्रत करना चाहिए। भैरव, शिव या चंडी की पूजा करें। 

8 मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

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Sunday, 23 November 2025

कैसे करे जप माला से ये जाने

कैसे करे जप माला से ये जाने :- 
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 🌹🌹जप करने वाले व्यक्ति को एक बार में 108 जाप पूरे करने चाहिए। इसके बाद सुमेरु से माला पलटकर पुनः जाप आरंभ करना चाहिए।

* किसी भी स्थिति में माला का सुमेरु लांघना नहीं चाहिए।माला को अंगूठे और अनामिका से दबाकर रखना चाहिए और मध्यमा उंगली से एक मंत्र जपकर एक दाना हथेली के अंदर खींच लेना चाहिए।

* तर्जनी उंगली से माला का छूना वर्जित माना गया है।

* माला के दाने कभी-कभी 54 भी होते हैं। ऐसे में माला फेर कर सुमेरु से पुनः लौटकर एक बार फिर एक माला अर्थात् 54 जप पूरे कर लेना चाहिए।

* मानसिक रूप से पवित्र होने के बाद किसी भी सरल मुद्रा में बैठें जिससे गर्दन और सिर एक सीधी रेखा में रहे।

* मंत्र जप पूरे करने के बाद अंत में माला का सुमेरु माथे से छुआकर माला को किसी पवित्र स्थान में रख देना चाहिए।

* मंत्र जप में कर-माला का प्रयोग भी किया जाता है।

* जिनके पास कोई माला नहीं है वह कर-माला से विधि पूर्वक जप करें। कर-माला से मंत्र जप करने से भी माला के बराबर जप का फल मिलता है।

भगवान सूर्य के लिए :
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माणिक्य, गारनेट, बिल की लकड़ी की माला का उपयोग करे |www.astroshaliini.com

भगवान शिव शंकर के लिए :
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इनके लिए रुद्राक्ष की माला काम में ले |पढ़े : रुद्राक्ष की उत्पति की कहानी

माँ दुर्गा के लिए :
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माँ शेरोवाली के लिए लाल चन्दन की माला से जप करे |

माँ लक्ष्मी के लिए :
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कमलट्टे की माला माँ लक्ष्मी की की गयी आराधना जल्दी सफल होती है |

भगवान हरि विष्णु के लिए :
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तुलसी या चन्दन की माला का प्रयोग करे |

माँ अम्बिका की पूजा में :
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स्फटिक माला काम में ले |

माँ काली के मंत्र जप :
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नील कमल या काली हल्दी की माला से मंत्र जाप करे |
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बगलामुखी :
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पीली हल्दी की माला माँ बगलामुखी को प्रिय है |

9 zones vastu sidhanta :-

9 zones vastu sidhanta :-

9 zones vastu sidhanta divides the plot/property in nine zones.
They are East, Southeast, South, Southwest, West, Northwest, North and East .The central part is called Space or Bhrahmasthana.

Theoretically main directions (E, S, W, N) effect more but practically the sub-directions (Se, Sw, Nw, Ne) affect more.

Significance of directions are as follows:-

East (E):-The energy generated by East Zone facilitates the Social Connectivity. It is the ideal Zone for a Drawing Room.

South-East (SE):- Also known as the Fire Zone, it is the Zone of Money.

South-West (SW):- It is the Zone of Skill, Marriage, Family Harmony, Bonding, Stability in life and Relationships.

West 
The energy of this Zone ensures that no action or effort made by you goes waste.

North-West (NW):- The North-West Zone generates the energy that attracts Supportive and Helpful people for any cause you pursue.

North (N):- As North Zone represents Money or Treasure, its energy helps you to generate New Opportunities to earn money
.
North-East (NE):-It is the Zone of Wisdom, Meditation and Inspiration. In Vastu, this Zone is ideal for Meditation.

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