Tuesday, 30 December 2025

Yoni Stotrams

Chanting Yoni Stotrams (hymns to the divine feminine source) brings benefits like wealth, wisdom, inner peace, fertility, spiritual awakening, protection, and liberation (moksha), by invoking the power of Goddess Shakti, symbolizing creation, and balancing masculine/feminine energies. Specific benefits include removing obstacles, gaining all-around prosperity, connecting to the Divine Mother (Kamakhya), and achieving spiritual liberation through intense devotion and practices like Yoni Puja, often requiring initiation. 

Important Considerations:
  • Initiation: Some powerful Yoni Stotras and Kavachams (armor mantras) require initiation (Deeksha) from a qualified guru due to their intense power.
  • Intent: Performing with selfless devotion (Nishkam Bhava) yields faster, deeper results, though specific desires can be sought with proper initiation. 

*श्री नृसिंह नक्षत्रमालिका स्तोत्र* 🌸

*श्री नृसिंह नक्षत्रमालिका स्तोत्र* 🌸🦁

*अश्विनी नक्षत्रे* —
अश्विनीकुमारपूज्यं तेजोमूर्तिं नमाम्यहम् ।
नृसिंहं शरणं प्रपद्ये रक्ष मां सर्वदा प्रभो ॥१॥

*भरणी नक्षत्रे* —
भरण्यां भारवाहं तं त्रैलोक्यपालकं प्रभुम् ।
नृसिंहं शरणं यामि दुःखनाशं दयानिधिम् ॥२॥

*कृत्तिका नक्षत्रे* —
कृत्तिकाज्वलनाकारं शस्त्रधारिणमव्ययम् ।
नृसिंहं प्रपद्येऽहं सर्वमङ्गलदायकम् ॥३॥

*रोहिणी नक्षत्रे* —
रोहिण्यां रोहणं दत्वा भक्तानां सुखवर्धनम् ।
नृसिंहं प्रणमाम्यद्य पावनं सर्वपातकात् ॥४॥

*मृगशीर्षे* —
मृगरूपधरं दैत्यं दंशितुं तेजसा युतम् ।
नृसिंहं नमाम्यद्य भीषणं भुवनत्रये ॥५॥

*आर्द्रा नक्षत्रे* —
आर्द्रकण्ठं करालं तं दानवानां निवारकम् ।
नृसिंहं नमाम्यद्य भक्तरक्षणतत्परम् ॥६॥

*पुनर्वसू नक्षत्रे* —
पुनर्वसूकरुणासिंधुं दयामृतप्रदायकम् ।
नृसिंहं शरणं यामि सर्वारिष्टविनाशकम् ॥७॥

*पुष्य नक्षत्रे* —
पुष्ये पुष्टिप्रदं देवं भक्तानां पालनं विभुम् ।
नृसिंहं नमाम्यद्य भद्रं सौख्यप्रदायकम् ॥८॥

*आश्लेषा नक्षत्रे* —
आश्लेषासर्पसंहारं दुष्टदर्पविनाशकम् ।
नृसिंहं शरणं यामि मुक्तिदं मोक्षदायकम् ॥९॥

*मघा नक्षत्रे* —
मघासने महीशं तं पीठाधीशं नमाम्यहम् ।
नृसिंहं शरणं यामि सर्वलोकनमस्कृतम् ॥१०॥

*पूर्वफाल्गुनी नक्षत्रे* —
पूर्वफाल्गुनसंयुक्तं कान्तिकारं नमाम्यहम् ।
नृसिंहं प्रणतो भूत्वा दुःखशोकविनाशकम् ॥११॥

*उत्तरफाल्गुनी नक्षत्रे* —
उत्तरफाल्गुनीनाथं धर्मपालं दयानिधिम् ।
नृसिंहं शरणं यामि भीषणं भयहारकम् ॥१२॥

*हस्त नक्षत्रे* —
हस्तसंयुक्तपद्मं तं वरदं भक्तपालकम् ।
नृसिंहं प्रणमाम्यद्य सुखसंपत्प्रदायकम् ॥१३॥

*चित्रा नक्षत्रे* —
चित्रारूपधरं देवं शोभितं दिव्यकान्तिभिः ।
नृसिंहं प्रणमाम्यद्य सर्वलक्षणलक्षणम् ॥१४॥

*स्वाती नक्षत्रे* —
स्वातीवायुप्रभं देवं दैत्यसंहारकारणम् ।
नृसिंहं नमाम्यद्य भक्तसौख्यप्रदायकम् ॥१५॥

*विशाखा नक्षत्रे* —
विशाखायुधसंयुक्तं त्रैलोक्यत्राणकारणम् ।
नृसिंहं शरणं यामि दुष्टदर्पविनाशकम् ॥१६॥

*अनुराधा नक्षत्रे* —
अनुराधार्चितं देवं भक्तानुग्रहकारकम् ।
नृसिंहं प्रणमाम्यद्य पावनं सर्वकर्मणाम् ॥१७॥

*ज्येष्ठा नक्षत्रे* —
ज्येष्ठराज्यं समास्थाय दानवानां विनाशकम् ।
नृसिंहं नमाम्यद्य भक्तसंपत्प्रदायकम् ॥१८॥

*मूळ नक्षत्रे* —
मूळसंहारकं देवं मूलाधारं नमाम्यहम् ।
नृसिंहं शरणं यामि मोक्षदं सुखदायकम् ॥१९॥

*पूर्वाषाढा नक्षत्रे* —
पूर्वाषाढार्चितं देवं जयदं ज्वलनप्रभम् ।
नृसिंहं नमाम्यद्य सर्वपापविनाशकम् ॥२०॥

*उत्तराषाढा नक्षत्रे* —
उत्तराषाढनाथं तं धर्मसंरक्षणं विभुम् ।
नृसिंहं प्रणमाम्यद्य सर्वमङ्गलदायकम् ॥२१॥

*श्रवण नक्षत्रे* —
श्रवणे श्रवणप्रियं भक्तवाक्यप्रसादकम् ।
नृसिंहं शरणं यामि पावनं भवभीषणात् ॥२२॥

*धनिष्ठा नक्षत्रे* —
धनिष्ठायंत्रसंयुक्तं नृत्यगानप्रियं प्रभुम् ।
नृसिंहं प्रणमाम्यद्य मोक्षसौख्यप्रदायकम् ॥२३॥

*शतभिषा नक्षत्रे* —
शतभिषज्वरसंहारं रोगदुःखनिवारणम् ।
नृसिंहं नमाम्यद्य आयुरारोग्यदायकम् ॥२४॥

*पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्रे* —
पूर्वाभाद्रपदं देवं भद्रं भक्तहिते रतम् ।
नृसिंहं शरणं यामि सर्वशत्रुनिवारणम् ॥२५॥

*उत्तराभाद्रपदा नक्षत्रे* —
उत्तराभद्रनाथं तं स्थैर्यदं भुवनेश्वरम् ।
नृसिंहं प्रणमाम्यद्य सर्वकामप्रदायकम् ॥२६॥

*रेवती नक्षत्रे* —
रेवत्यां रक्षणं दत्त्वा भक्तानां सुखवर्धनम् ।
नृसिंहं शरणं यामि सर्वानुग्रहकारकम् ॥२७॥

---

📿 *फलश्रुती* 📿
एतां नृसिंहनक्षत्रमालिकां यो जपेत् श्रद्धयान्वितः ।
सर्वान्कामानवाप्नोति मुक्तिं च परमां लभेत् ॥

---

Wednesday, 10 December 2025

मासिक कालाष्टमी आज

मासिक कालाष्टमी आज 
************************
सनातन धर्म में कालाष्टमी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। वैदिक पंंचांग के अनुसार यह व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। यह दिन काल भैरव को समर्पित होता है। काल भैरव भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं। दरअसल भैरव के तीन रूप हैं काल भैरव, बटुक भैरव और स्वर्णाकर्षण भैरव। कालाष्टमी  के दिन इनमें से काल भैरव की पूजा की जाती है। कहते हैं कि इस दिन भगवान शंकर के काल भैरव स्वरूप की उपासना करने से जीवन की सारी परेशानियां दूर होती है। साथ ही काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है। इस बार साल का अंतिम कालाष्टमी व्रत 11 दिसंबर को मनाया जाएगा।

कालाष्टमी तिथि 2025
======================
वैदिक पंचांग के अनुसार दिसंबर में अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 दिसंबर 2025, गुरुवार दोपहर 01:58 बजे होगी। वहीं इसका अंत  12 दिसंबर 2025, शुक्रवार सुबह 02:57 बजे होगा। इसलिए 2025 की आखिरी कालाष्टमी और कालभैरव जयंती 11 दिसंबर 2025, गुरुवार को मनाई जाएगी। 

कालाष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त 2025
=================================
ज्योतिष पंचांग के मुताबिक कालाष्टमी पर अभिजीत का मुहूर्त बन रहा है। यह मुहूर्त 11 बजकर 54 मिनट से शुरू होगा और दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर खत्म होगा। इस बीच में आप पूजा- अर्चना कर सकते हैं।

कालाष्टमी पर जरूर करें इन मंत्रों का जाप
===============================
1. ओम शिवगणाय विद्महे गौरीसुताय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात।।
2. ओम कालभैरवाय नम:
3. ओम भ्रां कालभैरवाय फट्
4. धर्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्। द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये।।

कालाष्टमी धार्मिक महत्व
========================
शास्त्रों के मुताबिक जो भी व्यक्ति पूरे दिन व्रत रखकर काल भैरव की पूजा- अर्चना करता है। उसके कष्ट बाबा काल भैरव हर लेते हैं। साथ ही काल भैरव की पूजा करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही अज्ञात भय खत्म होता है और गुप्त शत्रुओं का नाश होता है। वहीं काल भैरव की कृपा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं, भय मिटता है और साधक को शक्ति, साहस व सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह व्रत शनि और राहु के बुरे प्रभावों को कम करने में भी सहायक माना जाता है।

कालाष्टमी पूजा विधि
=================
कालाष्टमी व्रत के दिन भगवान काल भैरव की पूजा विधि में प्रातः स्नान और पूजा स्थल का शुद्धिकरण करने के बाद व्रत का संकल्प लें। पूजा में काल भैरव की मूर्ति या चित्र पर काले वस्त्र अर्पित कर, फूल, बेलपत्र, काले तिल, धूप, दीप और कपूर से पूजा करें। इसके बाद भैरव चालीसा का पाठ और "ॐ कालभैरवाय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें। भगवान को मिष्ठान्न, पंचामृत और फल का भोग लगाकर आरती करें। इस दिन काले कुत्तों को रोटी या दूध खिलाना शुभ माना जाता है। व्रत का पारण अगले दिन ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान देकर करें।

हल्दी से करें ये उपाय*

*विशेष उपाय -*
*===============================*
*🥐हल्दी से करें ये उपाय*
*________________________________*
*⚜️1. धन प्राप्ति के लिए हल्दी उपाय*
*卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐*
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि घर में धन से जुड़ी समस्या चल रही हो या धन की बचत नहीं हो पा रही हो, तो आप हल्दी का एक ज्योतिषीय उपाय कर सकते हैं. इसके लिए एक लाल रंग का स्वच्छ कपड़ा लें और उसमें हल्दी की गांठ बांध दें. फिर इसे घर की तिजोरी में रख दें. माना जाता है कि इससे लक्ष्मी मां की कृपा बनी रहती है और धन संबंधी समस्याओं का नाश होता है.

*⚜️2. डर और रुके हुए काम दूर करने का उपाय*
*卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐*
यदि आपको किसी चीज़ का डर सताता है या आपके काम बनते-बनते रुक जाते हैं, तो सुबह स्नान कर भगवान गणेश की पूजा करें और उन्हें हल्दी का तिलक लगाएं. इसके बाद वही तिलक अपने माथे पर लगाएं. मान्यता है कि इससे रुके हुए काम पूरे होते हैं और भय का नाश होता है.

*⚜️3. बुरे सपनों से मुक्ति*
*卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐*
यदि आपको सोते समय बुरे सपने आते हैं या अंधेरा होते ही डर लगता है, तो सोते समय अपने तकिए के नीचे हल्दी की गांठ रखकर सोएं.

*⚜️4. पैसे भूल जाने या न टिकने की समस्या*
*卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐*
यदि आप पैसे कहीं रखकर भूल जाते हैं या आपके पास पैसा नहीं टिकता, तो अपने पर्स में हल्दी की गांठ को कपड़े में बांधकर रखें. ऐसा करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं.

*🫑मिर्ची से करें ये उपाय*
🌶️🌶️🌶️🌶️🌶️🌶️🌶️🌶️🌶️🌶️
*⚜️1. नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए*
*卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐*
घर से नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर दूर करने के लिए घर के मुख्य द्वार पर हरी मिर्च टांगनी शुभ मानी जाती है.

*⚜️2. बुरी नजर या काला जादू से बचाव*
*卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐*
अगर आपको लगता है कि आप पर किसी ने काला जादू किया है या बुरी नजर लगी है, तो सूखी लाल मिर्च लें. इसे अपने चारों ओर 7 बार घुमाएं और फिर जला दें. माना जाता है कि इससे बुरी नजर दूर हो जाती है.

*⚜️3. नौकरी में आ रही रुकावटें दूर करें*
*卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐*
यदि आप नौकरी संबंधी समस्याओं से गुजर रहे हैं, तो 7 सूखी लाल मिर्च, एक मिट्टी का दिया और सरसों का तेल लें. दिया जलाएं और उसमें मिर्ची डालें. इसके बाद थोड़ा सा नमक डाल दें. इसे अपने कमरे में उस स्थान के पास उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखें, जहाँ आप कार्य करते हैं
           *🚩#हरिऊँ🚩*

Friday, 5 December 2025

🔹 || खरमास || 🔹*

*🔹 || खरमास || 🔹*   
    *16 दिसंबर 2025, मंगलवार* 

"वर्ष 2025 में खरमास 16 दिसंबर 2025 (मंगलवार) से शुरू होगा, जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे, और यह 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को मकर संक्रांति के साथ समाप्त होगा, जिसके दौरान विवाह और अन्य शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं"

*☀️धनु राशि में प्रवेश करेंगे सूर्यदेव-:* 
* ग्रहों के राजा सूर्य16 दिसंबर 2025, मंगलवार के दिन वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में गोचर करेंगे। इसे धनु संक्रांति भी कहा जाता है क्योंकि सूर्य धनु राशि के लग्न भाव में गोचर करेंगे और करीब एक माह तक रहेंगे। खरमास के दिनों में सूर्य देव धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं। इसके साथ ही बृहस्पति ग्रह का प्रभाव कम हो जाता है। वहीं, बृहस्पति यानी गुरु ग्रह को शुभ कार्यों का कारक माना जाता है। विवाह के लिए शुक्र और गुरु दोनों का उदय होना आवश्यक होता है। अगर दोनों में से एक भी अस्त रहेगा, तो शुभ व मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है//

* ज्योतिष शास्त्र और सनातन धर्म में खरमास में कुछ कार्यों का संपादन वर्जित माना गया है। जैसे इस दौरान सभी प्रकार के मांगलिक कार्य, शादी-विवाह आदि वर्जित होते हैं। अक्सर मार्गशीर्ष और पौष मास के बीच खरमास लगता है। हाल ही में देवउठनी एकादशी के साथ 4 महीने का चातुर्मास समाप्त हुआ है। साथ ही शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य शुरू हो चुके हैं, लेकिन अब फिर शुभ कार्यों और लग्नों पर पूर्ण विराम लगने जा रहा है।

*🔹खरमास में करें ये काम-:* 
* शास्त्रों के अनुसार खरमास में सूर्य देव की उपासना की जानी चाहिए।

* इस दौरान तीर्थों में स्नान, दीपदान और जरूरतमंदों को उपयोगी चीजों का दान करना शुभ माना जाता है और इससे हर कार्य की सिद्धि होती है।

* आवश्यक होने पर व्यापार, नव वस्त्र, उपनयन संस्कार, नामकरण, नव रत्न धारण और कर्णवेध संस्कार भी सुचारू रूप से आप खरमास के दौरान भी कर सकते हैं।

* अगर यात्रा की तिथि पहले से तय है तो आप इस दौरान यात्रा कर सकते हैं।

* पूजा पाठ, कथा और व्रत करने में भी कोई दोष नहीं होता है।

* मान्यता है कि खरमास के पूरे माह में सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल देना चाहिए।

* इसके अलावा इस दौरान सूर्य पाठ और सूर्य के मंत्रों का जाप करना चाहिए। प्रातःकाल उगते हुए सूर्य को नमस्कार करना चाहिए।
     _____________________

*🔹खरमास के दौरान इन कार्यों को न करें-:* 

* धर्म-शास्त्रों के अनुसार खरमास के दौरान तामसिक भोजन जैसे- नॉनवेज, शराब इत्यादि के सेवन बचना चाहिए।

* इस दौरान प्रतिदिन तांबे के पात्र में दूध और पानी रखकर पीना अशुभ व हानिकारक माना जाता है।

* इसके अलावा विवाह और नवीन गृह प्रवेश भी नहीं करना चाहिए।कोई भी नया कारोबार इस अवधि में शुरू नहीं करना चाहिए। 

*🔹खरमास में ये करें उपाय-:* 

खरमास के महीने में जप-तप और दान इत्यादि करने का फल जन्मों तक मिलता है। इस माह में तुलसी व पीपल पूजा, गौ सेवा, सूर्य उपासना, भगवान श्री विष्णुजी के नाम जप- मंत्र जप, श्रीगीता- श्री रामचरितमानस- श्री सत्यनारायण जी के पाठ करना काफी शुभ फलदायक होते हैं//

                           🕉️🚩🕉️

Wednesday, 3 December 2025

क्रोध शांति हेतु

क्रोध शांति हेतु
=^=^=^=^=^
जिन्हे बहुत अधिक क्रोध आता हो वे नित्य रात्रि में सोते समय एक ताम्बे के लोटे में जल भर दे और उसमे एक चाँदी का सिक्का डाल दे.प्रातः मुह आदि धोकर इस जल का सेवन करे.धीरे धीरे क्रोध में कमी आ जायेगी और आपका स्वभाव सोम्य होने लगेगा।

👉🏻नकारत्मक ऊर्जा को दूर करने हेतु
=^=^=^=^=^=^=^=^=^=^=^=^
यदि आप सदा मानसिक तनाव में रहते है.नित्य बुरे स्वप्न आते है.छोटी छोटी बाते आपको अधिक विचलित कर देती है.अकारण भय लगता रहता है तो ,रात्रि में सोते समय अपने तकिये के निचे एक छोटा सा फिटकरी का टुकड़ा रख ले.और सुबह उठकर उसे अपने सर से तीन बार घुमाकर घर के बहार फेक दे.सतत कुछ दिनों तक करे  अवश्य लाभ होगा।

👉🏻गृह कलह निवारण एवं शुद्धि हेतु
=^=^=^=^=^=^=^=^=^^=^=^^
यदि निरंतर घर में कलह का वातावरण बना रहता हो,अशांति बनी रहती हो.व्यर्थ का तनाव बना रहता हो तो.थोड़ी सी गूगल लेकर" ॐ ह्रीं मंगला दुर्गा ह्रीं ॐ "मंत्र का 108बार जाप कर गूगल को अभी मंत्रित कर दे और उसे कंडे पर जलाकर पुरे घर में घुमा दे.ये सम्भव न हो तो गूगल धूप पर भी ये प्रयोग किया जा सकता है.घर में शांति का वातावरण बनने लगेगा।

Tuesday, 2 December 2025

Karya Siddhi Yantra

The symbol shown in the image is a Karya Siddhi Yantra, also known as the Sarva Karya Siddhi Yantra. It is a sacred geometric diagram used in Hindu traditions. 

Purpose: The yantra is believed to help individuals achieve success in all endeavors, fulfill desires, and remove obstacles. "Karya" means actions or work, and "Siddhi" means fulfillment or success. 

Benefits: Worshipping or possessing this yantra is thought to bring good fortune, intelligence, knowledge, self-assurance, and overall well-being. 

Specific Symbols: The different sections of the yantra feature various symbols, each with a specific meaning: 

Star/Sun (number 61): Imparts power, authority, finances, and ensures the fulfillment of desires. 

Arrow (number 52): Stands for protection against evil eyes and other dangers for the individual and their family. 

Ship (number 33): Considered unique, this symbol induces courage and ensures success in all activities undertaken.