Monday, 5 December 2016

For successful professional life

It is difficult to make happy everyone. Some people considered you as good or bad person. If you have cuts under the first finger then you will face problems in office.

If there is gap between mind line and life line then you will have conflict in your office. If the under part of middle finger is downward then your colleagues create problems.

If there are cuts under the last finger then your subordinates will harass you. You may have problems in job if there is combination of Rahu-Saturn, Saturn-Sun and Rahu-Ketu.

You should increase the working hours. You have to work hard. Do not expect immediate result. You should do work with honesty and alertness.

Keep with you the yantra of goddess Baglamukhi tying up in yellow cloth. Always do tilak of turmeric and start work. You can get success in professional life by wearing 7-8 rati’s turquoise in throat or any finger.

Due to combination of Rahu-Saturn you speak rough and people opposed you. You can donate rice on Ekadashi, tryodashi or full moon day. Avoid taking banana. Donate guava and pomegranate to poor children on Tuesday.

You can get strength and avoid loss by wearing chain from mother on Monday. Do not eat salt on Friday and keep making distance. You should talk politely with everyone. Do not share your personal life with anyone.

Donate kheer on full moon day. Keep it in moonlight on full moon day and donate it in the next morning. You should eat little kheer on your own. You can wear Rudraksh. If possible then you can wear gold sun. Take water from graveyard and keep it in your worship place.

When your enemies become strong then you can donate chain of moonga to your idol or purohit. To get success you should do “Om Brum Bruhaspatey Namah”. Donate turmeric-rice or turmeric-jaggery regularly.

Extra Remedy: You can wear copper ring in fourth finger. You should drink more water and take medical advice.

Remedy for low confidence

It happens many times with children when they read they become uncertain and get low confidence. Take 5-6 teaspoon pomegranate juice and add ½ teaspoon rock salt and honey. You have to take this at least 2 times in a day. You have low confidence due to less power judgment.

You can wear iron ring in middle finger. Seat in the middle of the birds and feed them sweet chapatti. Birds cannot fly away from those whose Rahu is good. You must have to eat saunf and drink more water to take good conclusion/decision.

Keep pulp of banyan in pottery in night and eat in night. You can add mishri for taste. Do not add sugar in it. You can get mental peace by wearing root of banyan tree on Sunday. You should tie up it in white thread. It also helps us to increase the focus.

You reduce uncertainty by wearing copper ring in middle finger or thumb or copper ring in middle finger and silver ring in thumb.

Extra Remedy: Never wear locket in throat. Keep green gram in pottery and donate it to poor once in a month. You should do these remedies to avoid wasting time.

Sunday, 4 December 2016

नक्षत्र से रोग विचार तथा उपाय....

नक्षत्र से रोग विचार तथा उपाय....

हमारे ज्योतिष शास्त्र में नक्षत्र के अनुसार रोगों का वर्णन   किया गया है | व्यक्ति के कुंडली में नक्षत्र अनुसार रोगों का विवरण निम्नानुसार है | आपके कुंडली में नक्षत्र के अनुसार परिणाम आप देख सकते है

अश्विनी नक्षत्र : जातक को वायुपीड़ा, ज्वर, मतिभ्रम आदि से कष्ट.
उपाय : दान पुण्य, दिन दुखियों की सेवा से लाभ होता है |

भरणी नक्षत्र : जातक को शीत के कारण कम्पन, ज्वर, देह पीड़ा से कष्ट, देह में दुर्बलता, आलस्य व कार्य क्षमता का अभाव |
उपाय : गरीबोंकी सेवा करे लाभ होगा |

कृतिका नक्षत्र : जातक आँखों सम्बंधित बीमारी, चक्कर आना, जलन, निद्रा भंग, गठिया घुटने का दर्द, ह्रदय रोग, घुस्सा आदि |
उपाय : मन्त्र जप, हवन से लाभ |

रोहिणी नक्षत्र : ज्वर, सिर या बगल में दर्द, चित्य में अधीरता |
उपाय : चिर चिटे की जड़ भुजा में बांधने से मन को शांति मिलती है |

मृगशिरा नक्षत्र : जातक को जुकाम, खांसी, नजला, से कष्ट |
उपाय : पूर्णिमा का व्रत करे लाभ होगा |

आद्रा नक्षत्र : जातक को अनिद्रा, सिर में चक्कर आना, अधासीरी का दर्द, पैर, पीठ में पीड़ा |
उपाय : भगवान शिव की आराधना करे, सोमवार का व्रत करे, पीपल की जड़ दाहिनी भुजा में बांधे लाभ होगा |

पुनर्वसु नक्षत्र : जातक सिर या कमर में दर्द से कष्ट |
रविवार को पुष्य नक्षत्र में आक का पौधा की जड़ अपनी भुजा मर बांधने से लाभ होगा |

पुष्प नक्षत्र : जातक निरोगी व स्वस्थ होता है | कभी तीव्र ज्वर से दर्द परेशानी होती है | कुशा की जड़ भुजा में बांधने से तथा पुष्प नक्षत्र में दान पुण्य करने से लाभ होता है |

अश्लेश नक्षत्र : जातक का दुर्बल देह प्राय: रोग ग्रस्त बना रहता है | देह में सभी अंग में पीड़ा, विष प्रभाव या प्रदुषण के कारण कष्ट |
उपाय : नागपंचमी का पूजन करे, पटोल की जड़ बांधने से लाभ होता है |

मघा नक्षत्र : जातक को अर्धसीरी या अर्धांग पीड़ा, भुत पिचाश से बाधा |
उपाय : कुष्ठ रोगी की सेवा करे | गरीबोंको मिष्ठान खिलाये |

पूर्व फाल्गुनी : जातक को बुखार,खांसी, नजला, जुकाम, पसली चलना, वायु विकार से कष्ट |
उपाय : पटोल या आक की जड़ बाजु में बांधे | नवरात्रों में देवी माँ की उपासना करे |

उत्तर फाल्गुनी : जातक को ज्वर ताप, सिर व बगल में दर्द, कभी बदन में पीड़ा या जकडन
उपाय : पटोल या आक की जड़ बाजु में बांधे | ब्राह्मण को भोजन कराये |

हस्त नक्षत्र : जातको पेट दर्द, पेट में अफारा, पसीने से दुर्गन्ध, बदन में वात पीड़ा आक या जावित्री की जड़ भुजा में बांधने से लाभ होगा |

चित्रा नक्षत्र : जातक जटिल या विषम रोगों से कष्ट पता है | रोग का कारण बहुधा समज पाना कठिन होता है | फोड़े फुंसी सुजन या चोट से कष्ट होता है |
उपाय : असंगध की जड़ भुजा में बांधने से लाभ होता है | तिल चावल जौ से हवन करे |

स्वाति नक्षत्र : वाट पीड़ा से कष्ट, पेट में गैस, गठिया, जकडन से कष्ट |
उपाय : गौ तथा ब्राह्मणों की सेवा करे, जावित्री की जड़ भुजा में बांधे |

विशाखा नक्षत्र : जातक को सर्वांग पीड़ा से दुःख | कभी फोड़े होने से पीड़ा |
उपाय : गूंजा की जड़ भुजा भुजा पर बांधना, सुगन्धित वास्तु से हवन करना लाभ दायक होता है |

अनुराधा नक्षत्र : जातक को ज्वर ताप, सिर दर्द, बदन दर्द, जलन, रोगों से कष्ट |
उपाय : चमेली, मोतिया, गुलाब की जड़ भुजा में बांधना से लाभ |

जेष्ठा नक्षत्र : जातक को पित्त बड़ने से कष्ट | देह में कम्पन, चित्त में व्याकुलता, एकाग्रता में कमी, कम में मन नहीं लगना |
उपाय : चिरचिटे की जड़ भुजा में बांधने से लाभ | ब्राह्मण को दूध से बनी मिठाई खिलाये |

मूल नक्षत्र : जातक को सन्निपात ज्वर, हाथ पैरों का ठंडा पड़ना, रक्तचाप मंद, पेट गले में दर्द अक्सर रोगग्रस्त रहना |
उपाय : 32 कुओं (नालों) के पानी से स्नान तथा दान पुण्य से लाभ होगा |

पूर्वाषाढ़ नक्षत्र : जातक को देह में कम्पन, सिर दर्द तथा सर्वांग में पीड़ा | सफ़ेद चन्दन का लेप, आवास कक्ष में सुगन्धित पुष्प से सजाये | कपास की जड़ भुजा में बांधने से लाभ |

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र : जातक संधि वात, गठिया, वात शूल या कटी पीड़ा से कष्ट, कभी असहय वेदना |
उपाय : कपास की जड़ भुजा में बांधे, ब्राह्मणों को भोज कराये लाभ होगा |

श्रवन नक्षत्र : जातक अतिसार, दस्त, देह पीड़ा ज्वर से कष्ट, दाद, खाज खुजली जैसे चर्म रोग कुष्ठ, पित्त, मवाद बनना, संधि वात, क्षय रोग से पीड़ा |
उपाय : अपामार्ग की जड़ भुजा में बांधने से रोग का शमन होता है |

धनिष्ठा नक्षत्र : जातक मूत्र रोग, खुनी दस्त, पैर में चोट, सुखी खांसी, बलगम, अंग भंग, सुजन, फोड़े या लंगड़े पण से कष्ट |
उपाय : भगवान मारुती की आराधना करे | गुड चने का दान करे |

शतभिषा नक्षत्र : जातक जलमय, सन्निपात, ज्वर, वातपीड़ा, बुखार से कष्ट | अनिंद्रा, छाती पर सुजन, ह्रदय की अनियमित धड़कन, पिंडली में दर्द से कष्ट |
उपाय : यज्ञ, हवन, दान, पुण्य तथा ब्राह्मणों को मिठाई खिलानेसे लाभ होगा |

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र : जातक को उल्टी या वमन, देह पीड़ा, बैचेनी, ह्रदय रोग, टकने की सुजन, आंतो का रोग से कष्ट होता है |
उपाय : भृंगराज की जड़ भुजा में भुजा पर बांधे, तिल का दान करने से लाभ होता है |

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र : जातक अतिसार, वातपीड़ा, पीलिया, गठिया, संधिवात, उदरवायु, पाव सुन्न पड़ना से कष्ट हो सकता है |
उपाय : पीपल की जड़ भुजा पर बांधने से तथा ब्राह्मणों को मिठाई खिलाये लाभ होगा |

रेवती नक्षत्र : जातक को ज्वर, वाट पीड़ा, मति भ्रम, उदार विकार, मादक द्रव्य सेवन से उत्पन्न रोग किडनी के रोग, बहरापन, या कण के रोग पाव की अस्थि, मासपेशी खिचाव से कष्ट |
उपाय : पीपल की जड़ भुजा में बांधे लाभ होगा |

भागवतपुराण : इस श्राप के कारण स्त्रियों को होता है मासिक धर्म

भागवतपुराण : इस श्राप के कारण स्त्रियों को होता है मासिक धर्म

आधुनिक समय में स्त्रियों के प्रति लोगों के नजरिए में व्यापक स्तर से बदलाव आया है. बात करें स्त्रियों को होने वाले मासिक धर्म की तो, लोग आज इस विषय पर खुलकर बात करने लगे हैं. लेकिन आज के समय से, सदियों पहले की बात करें तो कई बार मन में एक प्रश्न बार-बार आता है कि आखिर स्त्रियों को मासिक धर्म क्यों होता है. क्या इससे कोई पौराणिक कथा जुड़ी हुई है. हमारे पुराणों में कई कथाएं मिलती हैं. जिनमें से भागवतपुराण में वर्णित कहानी के अनुसार स्त्रियों को होने वाला मासिक धर्म को श्राप से जोड़कर बताया गया है. भागवतपुराण की कहानी के अनुसार एक बार ‘बृहस्पति’ जो देवताओं के गुरु थे, वे इन्द्र देव से काफी क्रोधित हो गए.

इस कारण असुरों ने देवलोक पर आक्रमण कर दिया और इन्द्र को अपनी गद्दी छोड़कर भागना पड़ा. असुरों से खुद को बचाते हुए इन्द्र सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा से सहायता मांगी. तब ब्रह्मा ने उन्हें बताया कि उन्हें एक ब्रह्म-ज्ञानी की सेवा करनी चाहिए, यदि वह प्रसन्न हो जाए तभी उन्हें उनकी गद्दी वापस प्राप्त होगी. आज्ञानुसार इन्द्र देव एक ब्रह्म-ज्ञानी की सेवा में लग गए लेकिन वे इस बात को नहीं जानते थे कि उस ज्ञानी की माता एक असुर थी इसलिए उसके मन में असुरों के लिए एक विशेष स्थान था. इन्द्र देव द्वारा अर्पित की गई सारी हवन की सामग्री जो देवताओं को चढ़ाई जाती है, वह ज्ञानी उसे असुरों को चढ़ा रहा था.

इससे उनकी सारी सेवा भंग हो रही थी. जब इन्द्र देव को सब पता लगा तो वे बेहद क्रोधित हो गए और उन्होंने उस ब्रह्म-ज्ञानी की हत्या कर दी. एक गुरु की हत्या करना घोर पाप था, जिस कारण उन पर ब्रह्म-हत्या का पाप आ गाया. ये पाप एक भयानक राक्षस के रूप में इन्द्र का पीछा करने लगा. किसी तरह इन्द्र ने खुद को एक फूल के अंदर छुपाया और एक लाख साल तक भगवान विष्णु की तपस्या की. तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने इन्द्र देव को बचा तो लिया लेकिन उनके ऊपर लगे पाप की मुक्ति के लिए एक सुझाव दिया. इसके लिए इन्द्र को पेड़, जल, भूमि और स्त्री को अपने पाप का थोड़ा-थोड़ा अंश देना था.

इन्द्र के आग्रह पर सब तैयार तो हो गए लेकिन उन्होंने बदले में इन्द्र देव से उन्हें एक वरदान देने को कहा. सबसे पहले पेड़ ने उस पाप का एक-चौथाई हिस्सा ले लिया जिसके बदले में इन्द्र ने उसे एक वरदान दिया. वरदान के अनुसार पेड़ चाहे तो स्वयं ही अपने आप को जीवित कर सकता है. इसके बाद जल को पाप का हिस्सा देने पर इन्द्र देव ने उसे अन्य वस्तुओं को पवित्र करने की शक्ति प्रदान की. यही कारण है कि हिन्दू धर्म में आज भी जल को पवित्र मानते हुए पूजा-पाठ में इस्तेमाल किया जाता है.

तीसरा पाप इन्द्र देव ने भूमि को दिया इसके वरदान स्वरूप उन्होंने भूमि से कहा कि उस पर आई कोई भी चोट हमेशा भर जाएगी. अब आखिरी बारी स्त्री की थी. इस कथा के अनुसार स्त्री को पाप का हिस्सा देने के फलस्वरूप उन्हें हर महीने मासिक धर्म होता है लेकिन उन्हें वरदान देने के लिए इन्द्र ने कहा की ‘महिलाएं, पुरुषों से कई गुना ज्यादा काम का आनंद उठाएंगी’.

Saturday, 3 December 2016

D 4 CHATURTHAMSA HOROSCOPE

D 4 CHATURTHAMSA HOROSCOPE

All divisional charts are derived out of birth horoscope only. Chaturthamsa divisional chart in the Shodashvarga scheme is considered 4th divisional chart as Shodashvarga takes birth chart also in divisional chart scheme. Chaturthamsa is a magnified view of fourth house of the birth horoscope and an important chart because it indicates happiness of all types.

In order to derive Chaturthamsa horoscope from the main birth chart, the simplest method by Parashar is as follows:

Any planet in the first part of sign from 0 to 7 degree 30 minutes remains in the same sign as occupied by planet in birth chart.Planet moves to 4th house from its position in birth chart when it is posited in birth chart from 7 degree 30 minutes to 15 degree.Planet moves to 7th house from its position in birth chart when it is posited in birth chart from 15 degree to 22 degree 30 minute.Planet moves to 10th house from its position in birth chart when it is posited in birth chart from 22 degree 30 minutes to 30 degree.

The indication from D4 horoscope houses are as follows, the results will vary depending upon the strength and weakness of houses. Iam mentioning below mostly positive traits those are based on the good strength of house only and NOT the weakness. For weakness reverse may be considered depending upon the gravity of weakness of house concerned.

The first house of D4 horoscope indicates as to how native will use wealth properly in the right manner for fulfilment of desires and happiness or enjoyments.The 2nd house of D4 horoscope indicates native capacity to accumulate wealth and seek enjoyment thru wealth.The 3rd house of D4 horoscope indicates native’s risk taking capacity or courage to earn wealth. This also indicates changes in place of living/ house for better status.The 4th house of D4 horoscope indicates native’s sense and inclination towards acquiring happiness and enjoyment. Indication of types of assets native creates whether such assets are of permanent nature or temporary nature.The 5th house of D4 horoscope indicates if native will acquire wealth based on past life karma, due to fate and whether native assets & happiness will be long lasting or not.The 6th house of D4 horoscope chart indicates whether native’s wealth will be lost due to enmity or will be distributed to others under some unavoidable circumstances.The 7th house of D4 horoscope chart indicates native’s wealth status or image as observed by outsiders, public and associates. Acquiring wealth thru partnership or joint ventures.The 8th house of D4 horoscope chart indicates loss of wealth in big way or permanently. As an exception, position of Mercury in 8th house indicates better financial results / status depending on its own strength or weakness.The 9th house of D4 horoscope chart indicates native’s attitude to use wealth in pious causes, religious activities and charities of any type. Prosperity of native thru blessings of saints & sages as well as luck.The 10th house of D4 horoscope chart indicates how native employs wealth in action or on what kind of karma. In case 10th house is weak and its lord is also weak, then native is prone to loose wealth solely because of self-decision & actions. In case Sun and Jupiter are also weak, native can loose substantial wealth due to Government penalties.The 11th house of D4 horoscope chart indicates gain of wealth, assets and goodwill. It also indicates increase of social status along with financial prosperity.The 12th house of D4 horoscope chart indicates financial losses on account of wrong doing and bad habits. All kinds of wasteful expenditures, losses on account of medical treatments, losses in overseas countries.

Apart from all above many other things are evaluated. For example, the D4 horoscope is also evaluated for seeing mother’s mutual love & affection. When lagan lord and 4th house lord are mutually well placed, great affection with mother is indicated.

Sale of inherited property and loss of wealth is seen when 4th house lord is associated with malefic and posited in weak 2nd house

ये सात छोटे-छोटे तांत्रिक उपाय बदल सकते हैं आपकी किस्मत....

ये सात छोटे-छोटे तांत्रिक उपाय बदल सकते हैं आपकी किस्मत....

यदि कड़ी मेहनत के बाद भी आपकी पैसों की कमी दूर नहीं हो रही है या आप और अधिक पैसा कमाना चाहते हैं तो यहां कुछ तांत्रिक उपाय बताए जा रहे हैं। इन उपायों को करने पर पैसों की तंगी दूर हो जाती है।

ऐसा माना जाता है कि तंत्र शास्त्र के उपाय बहुत जल्दी असर दिखाना शुरू कर देते हैं। तांत्रिक उपाय को टोटका भी कहा जाता है। इस प्रकार के उपाय करते समय पूर्ण सावधानी रखनी होती है एवं गोपनीयता बनाए रखना भी बहुत जरूरी है। जो भी व्यक्ति ये उपाय करता है, उसे किसी और व्यक्ति से इस संबंध में चर्चा नहीं करनी चाहिए। अन्यथा ये उपाय निष्फल हो जाते हैं।
जानिए कुछ तांत्रिक उपाय...

रविवार को करें दूध का ये तांत्रिक उपाय
किसी भी सप्ताह के रविवार को एक गिलास दूध का तांत्रिक उपाय करेंगे तो आपकी पैसों से जुड़ी समस्याएं खत्म हो सकती हैं...

यह तांत्रिक उपाय करने के लिए आपको रविवार की रात सोते समय 1 गिलास में दूध भरकर अपने सिर के पास रखकर सोना है। दूध सावधानी से रखें, नींद में दूध ढुलना नहीं चाहिए।

सुबह उठने के बाद नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद इस दूध को किसी बबूल के पेड़ की जड़ में डाल दें। ऐसा हर रविवार की रात की करें।

यह एक तांत्रिक उपाय है और इससे आपके ऊपर लगी बुरी नजर दूर होगी। नकारात्मक शक्तियों का असर खत्म होगा और कार्यों में सफलता मिलने लगेगी। पैसों की कमी दूर हो जाएगी।

सोमवार को करें ये उपाय
यदि आप पैसों की तंगी से परेशान हैं और ईमानदारी से मेहनत करने के बाद भी फल नहीं मिल रहा है तो किसी भी सोमवार को यह उपाय करें।

उपाय के अनुसार सोमवार की रात जब चंद्रोदय हो जाए तो उसके बाद अपने पलंग के चारों कोनों में चांदी की कील ठोक दें। चांदी की कील छोटी-छोटी भी लगाई जा सकती है। यह एक चमत्कारी तांत्रिक उपाय है और इससे आपके घर के आसपास की नकारात्मक ऊर्जा भी नष्ट हो जाती है। पैसों की समस्याएं दूर होने लगती हैं।

सोमवार को शिवलिंग पर चढ़ाएं दूध
मालामाल होने के लिए कच्चे दूध का 1 अन्य उपाय करें। हर सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठें। उठने के बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर पवित्र हो जाएं। इसके बाद आपके घर के आसपास किसी भी शिव मंदिर जाएं और वहां शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं।

यदि ऐसा हर सोमवार को किया जाए तो आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएंगी। यह बहुत ही सरल और चमत्कारी उपाय है।

मंगलवार के दिन ध्यान रखें ये बातें
यदि कोई व्यक्ति कर्ज के कारण परेशान है और कर्ज का भुगतान नहीं कर पा रहा है तो उसे यह तांत्रिक उपाय करना चाहिए। ऋण की किश्तों का भुगतान मंगलवार के दिन ही करें। इसके अलावा इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बुधवार और गुरुवार को किसी को ऋण के रुपए नहीं देना चाहिए। मंगलवार का दिन ऋण की किश्ते चुकाने के लिए श्रेष्ठ है। इस बात का ध्यान रखेंगे तो कर्ज जल्दी खत्म हो जाएगा।

बुधवार को करें ये उपाय
मालामाल होने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति बुधवार को यह तांत्रिक उपाय करें। उपाय के अनुसार बुधवार के दिन सात साबूत कौडिय़ां लें। कौडिय़ां बाजार में पूजन सामग्री की दुकानों पर आसानी से मिल जाती है। इसके साथ ही एक मुट्ठी हरे खड़े मूंग लें। दोनों को एक हरे कपड़े में बांध लें और किसी मंदिर की सीढिय़ों पर चुपचाप रख आएं।
ध्यान रखें इस बात को किसी को बताए नहीं, अन्यथा उपाय निष्फल हो जाएगा।

गुरुवार को पहनें पीले वस्त्र
धन संबंधी परेशानियां दूर करने के लिए सप्ताह के हर गुरुवार को यह तांत्रिक उपाय करें। उपाय के अनुसार हर गुरुवार को आप पीले वस्त्र पहनें। खाने में पीले रंग की मिठाई खाएं। इसके साथ ही पीले रंग की वस्तु का दान करें। पीले रंग की वस्तु जैसे पीले रंग का कपड़ा, पीला फल आम, हल्दी आदि। इस उपाय से भी धन की कमी दूर होती है।

रोज करें ये उपाय
एक अन्य टोटके के अनुसार यदि संभव हो तो हमेशा चांदी के बर्तन में पानी पीएं। चांदी बर्तन ना हो तो गिलास में पानी भरें और उसमें चांदी की अंगुठी डालकर पानी पीएं। यह प्राचीन, सरल और बहुत चमत्कारी तांत्रिक उपाय है। इससे निश्चित की धन संबंधी मामलों में राहत मिलती है।
यहां बताए गए सभी उपाय तंत्र शास्त्र के अनुसार दिए गए हैं। ऐसे उपाय चुपचाप बिना किसी को बताए किए जाए तो अधिक प्रभावी सिद्ध होते हैं। अत: इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसके साथ ही इन उपायों के संबंध में किसी भी प्रकार की शंका या संदेह न करें। यह पूरी तरह आस्था और विश्वास के उपाय हैं।

रुद्राक्ष

रुद्राक्ष
रुद्राक्ष हमारे लिए कितना लाभकारी है, यह हमारे पूर्वज जानते थे और रुद्राक्ष प्रयोग करते थे। क्योकि रुद्राक्ष मे एक अनोखे तरह का स्पदंन होता है। जो शरीर मे ऊर्जा का एक सुरक्षा कवच बना देता है, जिससे बाहरी ऊर्जाएं आपको परेशान नहीं कर पातीं। रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर 27-मुखी तक होते हैं, जिन्हें अलग-अलग प्रयोजन के लिए पहना जाता है। जैसे..... 

एक मुखी रुद्राक्ष : इसके मुख्य ग्रह सूर्य होते हैं। इसे धारण करने से हृदय रोग, नेत्र रोग, सिर दर्द का कष्ट दूर होता है। चेतना का द्वार खुलता है, मन विकार रहित होता है और भय मुक्त रहता है। लक्ष्मी की कृपा होती है। 

दो मुखी रुद्राक्ष : मुख्य ग्रह चन्द्र हैं यह शिव और शक्ति का प्रतीक है मनुष्य इसे धारण कर फेफड़े, गुर्दे, वायु और आंख के रोग को बचाता है। यह माता-पिता के लिए भी शुभ होता है।
 
तीन मुखी रुद्राक्ष : मुख्य ग्रह मंगल, भगवान शिव त्रिनेत्र हैं। भगवती महाकाली भी त्रिनेत्रा है। यह तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करना साक्षात भगवान शिव और शक्ति को धारण करना है। यह अग्रि स्वरूप है इसका धारण करना रक्तविकार, रक्तचाप, कमजोरी, मासिक धर्म, अल्सर में लाभप्रद है। आज्ञा चक्र जागरण (थर्ड आई) में इसका विशेष महत्व है। 

चार मुखी रुद्राक्ष : चार मुखी रुद्राक्ष के मुख्य देवता ब्रह्मा हैं और यह बुधग्रह का प्रतिनिधित्व करता है इसे वैज्ञानिक, शोधकर्त्ता और चिकित्सक यदि पहनें तो उन्हें विशेष प्रगति का फल देता है। यह मानसिक रोग, बुखार, पक्षाघात, नाक की बीमारी में भी लाभप्रद है। 

पांच मुखी रुद्राक्ष : यह साक्षात भगवान शिव का प्रसाद एवं सुलभ भी है। यह सर्व रोग हरण करता है। मधुमेह, ब्लडप्रैशर, नाक, कान, गुर्दा की बीमारी में धारण करना लाभप्रद है। यह बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। 

छ: मुखी रुद्राक्ष : शिवजी के पुत्र कार्तिकेय का प्रतिनिधित्व करता है। इस पर शुक्रग्रह सत्तारूढ़ है। शरीर के समस्त विकारों को दूर करता है, उत्तम सोच-विचार को जन्म देता है, राजदरबार में सम्मान विजय प्राप्त कराता है। 

सात मुखी रुद्राक्ष : इस पर शनिग्रह की सत्तारूढ़ता है। यह भगवती महालक्ष्मी, सप्त ऋषियों का प्रतिनिधित्व करता है। लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, हड्डी के रोग दूर करता है, यह मस्तिष्क से संबंधित रोगों को भी रोकता है। 

आठ मुखी रुद्राक्ष : भैरव का स्वरूप माना जाता है, इसे धारण करने वाला व्यक्ति विजय प्राप्त करता है। गणेश जी की कृपा रहती है। त्वचा रोग, नेत्र रोग से छुटकारा मिलता है, प्रेत बाधा का भय नहीं रहता। इस पर राहू ग्रह सत्तारूढ़ है। 

नौ मुखी रुद्राक्ष :  नवग्रहों के उत्पात से रक्षा करता है। नौ देवियों का प्रतीक है। दरिद्रता नाशक होता है। लगभग सभी रोगों से मुक्ति का मार्ग देता है।
 
दस मुखी रुद्राक्ष : भगवान विष्णु का प्रतीक स्वरूप है। इसे धारण करने से परम पवित्र विचार बनता है। अन्याय करने का मन नहीं होता। सन्मार्ग पर चलने का ही योग बनता है। कोई अन्याय नहीं कर सकता, उदर और नेत्र का रोग दूर करता है। 

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष : रुद्र के ग्यारहवें स्वरूप के प्रतीक, इस रुद्राक्ष को धारण करना परम शुभकारी है। इसके प्रभाव से धर्म का मार्ग मिलता है। धार्मिक लोगों का संग मिलता है। तीर्थयात्रा कराता है। ईश्वर की कृपा का मार्ग बनता है।
 
बारह मुखी रुद्राक्ष : बारह ज्योतिर्लिंगों का प्रतिनिधित्व करता है। शिव की कृपा से ज्ञानचक्षु खुलता है, नेत्र रोग दूर करता है। ब्रेन से संबंधित कष्ट का निवारण होता है। 

तेरह मुखी रुद्राक्ष : इन्द्र का प्रतिनिधित्व करते हुए मानव को सांसारिक सुख देता है, दरिद्रता का विनाश करता है, हड्डी, जोड़ दर्द, दांत के रोग से बचाता है। 

चौदह मुखी रुद्राक्ष : भगवान शंकर का प्रतीक है। शनि के प्रकोप को दूर करता है, त्वचा रोग, बाल के रोग, उदर कष्ट को दूर करता है। शिव भक्त बनने का मार्ग प्रशस्त करता है। 

रुद्राक्ष को अभिमंत्रित करने से वह अपार गुणशाली होता है। अभिमंत्रित रुद्राक्ष से मानव शरीर का प्राण तत्व अथवा विद्युत शक्ति नियमित होती है। भूतबाधा, प्रेतबाधा, ग्रहबाधा, मानसिक रोग के अतिरिक्त हर प्रकार के शारीरिक कष्ट का निवारण होता है।