Tuesday, 24 October 2023

कार्तिक मास में दीपदान से करें ग्रहों को प्रसन्न

कार्तिक मास में दीपदान से करें ग्रहों को प्रसन्न

सूर्य: सूर्य ग्रह को प्रसन्न करने के लिए हर रविवार तथा सप्तमी तिथि को तांबे का दीपक जलाए सरसों के तेल का प्रयोग करें। 

चंद्र: चंद्र ग्रह को प्रसन्न करने के लिए हर सोमवार चांदी का दीपक जलाएं । घी का प्रयोग करें। 

मंगल: मंगल ग्रह को मजबूत करने के लिए तांबे का दीपक जलाना चाहिए। इसके अतिरिक्त चुकंदर को दीपक के आकार में बनाकर उसमें घी, बत्ती डालकर जलाने से मंगल ग्रह शांत होता है। 

बुध: बुध ग्रह पूजन के लिए मिट्टी का दीपक जलाना चाहिए। घी का प्रयोग करें। 

गुरु: गुरु ग्रह को प्रसन्न करने के लिए पीतल का दीपक जलाना चाहिए (सोने का दीपक भी जला सकते हैं) । गाय घी का प्रयोग करें।

शुक्र: शुक्र ग्रह को प्रसन्न करने के लिए चावल के आटे का दीपक तथा नारियल के सख्त छिलके में शुद्ध घी व बत्ती डालकर दीप जलाना अत्यंत कल्याणकारी होता है। इससे शुक्र ग्रह की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। 

शनि: शनि ग्रह की शांति के लिए लोहे का दीपक प्रज्ज्वलित किया जाता है। तिल के तेल का प्रयोग करें।

राहु-केतु: राहु के लिए लोहे तथा केतु के लिए मिश्रित धातु का दिया जलाना चाहिए। अलसी के तेल का प्रयोग करें।

Tuesday, 19 September 2023

Line between Rahu and Ketu in Your Chart.

Draw a Line between Rahu and Ketu in Your Chart. Now observe the following:-

1) If Mars is on one side and Venus on the other side of this Nodal Axis, the natives MARRIED Life would not be smooth and harmonious. If they are on same side, then harmonious.
2) If Saturn and Jupiter are on opposite sides of this Rahu Ketu axis, then native is employed far away from his native place and has to struggle for positional status in Life.
3) If Saturn Mars conjunction on one side and Venus Jupiter conjunction on the other side, then native will suffer from great Calamity in his 49th year.
4) If this axis falls between Mercury and Jupiter, then native will often have disagreements with his own children.
5) If the axis falls between the Moon and Saturn, then disagreement with ones mother.
6) If the axis falls between the Sun and Saturn then disagreement with Father.

Other Important Points about Rahu and Ketu :-

1) Whenever Rahu in transit, touches the Natal positions of any Planet degrecally, good results would come to pass.
2) Whenever Ketu in transit, touches the Natal positions of any Planet degrecally, bad results would come to pass.
3) If Venus or the lord of the 7th house are in conjunction with, or trine to ketu in the Birth Chart, there is potential problem in the married Life. (If Spouse has Venus or Lord of 7th house in trine or in conjunction to Rahu, then this Dosha will be nullified).

The SUN-MERCURY-VENUS Arc

We all know that the Planets Mercury and Venus canot stay away from the Sun more than 28 degrees and 48 degrees respectively. So within an area (Arc) of maximum 76 degrees you will find these three planets together. Now whenever this point of the zodiac (Arc) is transited by Rahu in your Birth chart, then you will experience highly beneficial results in terms of profession and earnings, promotions in service etc. After 9 Years and 3 1/2 months when Ketu will transit through this same arc, be ready to face setbacks in professional field and earnings therefrom, and troubles in service.

Tuesday, 12 September 2023

मंगल काँटा

मंगल काँटा मछली से प्राप्त होता है, अगर कोई मांगलिक हैं जिससे शादी में परेशानी हैं, मंगल की दशा और शनि की साढ़ेसाती, ढईया, दशा के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। बार बार एक्सीडेंट होता हो तो ।

कब धारण करे मंगल कांटा –

1. जिनका व्यापार ना चलता हो।
2. पैसे रुक गये हो।
3. लोगों से अनबन, मनमुटाव हो।
4. कोर्ट कचहरी से बचना हो।
5. दाम्पत्य जीवन से अनबन, मनमुटाव दूर करना हो।
6. प्रेम संबंध को मजबूत करना हो।
7. काला जादू (ब्लेक मेजिक) बुरी नजर से छुटकारा पाना हो।
8. दूसरों के लिए करके भी बुराई मिलती हो।
9. पढाई में मन लगता ना हो।
10. रातों को नींद नहीं आती हो तो।

धारण विधि –

मंगलवार के दिन विधिवत कच्ची दूध एवं गंगाजल से शुद्ध कर पंचोपचार पूजन करें उसके उपरांत मंगल कांटा को धारण करें।

Sunday, 9 July 2023

पति पत्नी में #कलेश दूर करने के लिए

पति पत्नी में #कलेश दूर करने के लिए

👉 श्री #गणेश जी और शक्ति की उपासना करे |
👉सोते समय  साउथ की तरफ सिरहाना होना चाहिए |

👉चींटियों को शक्कर डालना चाहिए |
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👉यदि पत्नी हमेशा अपने हाथ में पीली चूड़ी पहेंन के रखे तो दाम्पत्या जीवन सुखी रहेगा|

👉 यदि विवाहिता प्रतिदिन #दुर्गा चालीसा का पाठ करें तो उस स्त्री का परिवार खुशहाल व दाम्पत्या प्रेम अटूट ब्ना रहेगा|
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Monday, 19 June 2023

10 maha vidya

Worshipping Goddess Matangi is beneficial to strengthen weak sun, afflicted sun or sun-Rahu, sun- ketu, sun-saturn combination in the birth chart.
For mental peace, happiness, concentration, sound sleep and to improve weak moon (moon conjunct with or aspected by malefic like sun, mars, saturn, rahu,  ketu) one should worship Goddess Bhuvaneshwari.
By worshipping Goddess Kali one can reduce the malefic effects of planet Saturn.
People born with badly placed mercury in the birth chart should worship Goddess Shodashi or Tripurasundari.
Goddess Tara controls planet Jupiter. By worshipping her one can enhance the good effects of Jupiter.
To gain all comforts, luxuries, and material pleasure in life, one should worship Goddess Kamala as she controls planet Venus.
People born with debilitated mars or mars-saturn, mars-rahu combination in the birth chart should worship Goddess Bagalamukhi to reduce the bad effects of planet Mars.
To pacify planet Rahu and to attain material success one can worship Goddess Chinnamasta.
Goddess Dhumavati controls planet Ketu. By worshipping her one can attain moksha or salvation.
People born with weak Lagna (ascendant) that is Lagna lord debilitated, rahu placed in Lagna or Lagna lord in the eighth or twelfth house of the birth chart should worship Goddess Bhairavi to strengthen their Lagna.

Thursday, 18 May 2023

ज्येष्ठ अमावस्या आज

ज्येष्ठ अमावस्या आज
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ज्येष्ठ माह में आने वाली 30वीं तिथि “ज्येष्ठ अमावस्या” कहलाती है। इस अमावस्या तिथि के दौरान पूजा पाठ और स्नान दान का विशेष आयोजन किया जाता है। हिन्दू पंचांग में अमावस्या तिथि को लेकर कई प्रकार के मत प्रचलित हैं ओर साथ ही इस तिथि में किए जाने वाले विशेष कार्यों को करने की बात भी की जाती है। ज्येष्ठ अमावस्या को जेठ अमावस्या, दर्श अमावस्या, भावुका अमावस्या इत्यादि नामों से पुकारा जाता है।

ज्येष्ठ अमावस्या का पूजा मुहूर्त
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इस वर्ष 19 मई 2023 को शुक्रवार के दिन ज्येष्ठ अमावस्या मनाई जाएगी। ज्येष्ठ अमावस के दौरान चंद्रमा की शक्ति निर्बल होती है। अंधकार की स्थिति अधिक होती है। इस वातावरण में नकारात्मकता का प्रभाव भी अधिक होता है। इसलिए इस समय पर तंत्र से संबंधित कार्य भी किए जाते हैं। ऐसा कहा जाता है तांत्रिकों के लिए ये रात खास होती है, जब वे अपनी सिद्धियों से विभिन्न शक्तियों को जाग्रत करते हैं।

ज्येष्ठ अमावस्या पर स्नान का महत्व
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किसी भी अमावस्या के दौरान पवित्र नदियों में स्नान करने की महत्ता अत्यंत ही प्राचीन काल से चली आ रही है। पूर्णिमा के समान ही अमावस्या पर भी पवित्र नदियों में स्नान का महत्व है। इस दिन स्नान करने पर शरीर में मौजूद नकारात्मक तत्व दूर होते है। मानसिक बल मिल मिलता है और विचारों में शुद्धता आती है। शरीर निरोगी बनता है वहीं बुरी शक्तियां भी दूर रहती हैं। स्नान करने से विशेष ग्रह नक्षत्रों का भी लाभ प्राप्त होता है।

ज्येष्ठ अमावस्या पर क्या नहीं करना चाहिए
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व्यक्ति को मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
धन उधार नहीं लेना चाहिए।
कोई नई वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए।

ज्येष्ठ अमावस्या का प्रभाव माह के अनुसार और ग्रह नक्षत्रों के द्वारा विभिन्न राशियों के लोगों पर भी पड़ता है। इसलिए इस दिन गलत कार्यों से दूरी रखनी चाहिए और व्रत-उपासना इष्ट देव की आराधना करनी चाहिए।

ज्येष्ठ अमावस्या पर दान पुण्य का फल
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निर्णय सिंधु जैसे ग्रथों में ज्येष्ठ अमावस्या के दिन दान की महत्ता के विषय में कहा गया है। इस दिन असमर्थ एवं गरीबों को दान करने। ब्राह्मणों को भोजन करवाने से सहस्त्र गोदान का पुण्य फल प्राप्त होता है। अमावस्या के दिन दूध से बनी वस्तुओं अथावा श्वेत वस्तुओं का दान करना चंद्र ग्रह के शुभ फल देने वाला होता है।

ज्येष्ठ अमावस्या के उपाय
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अमावस्या के अवसर पर सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है पितरों के निम्मित दान। इस समय पर पितृ शांति के कार्य किये जाते हैं। इस तिथि के समय पर प्रात:काल समय पितरों के लिए सभी कार्यों को किया जाना चाहिये। इस दान को करने से नवग्रह दोषों का नाश होता है। ग्रहों की शांति होती है, कष्ट दूर होते हैं।

ज्येष्ठ अमावस्या में क्या करें
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ज्येष्ठ अमावस्या पर गाय, कुते और कौओं को खाना खिलाना चाहिए।
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पीपल और बड़ के वृक्ष का पूजन करना चाहिए।
पितरों के लिए तर्पण के कार्य करने चाहिए।
पीपल पर सूत बांधना चाहिये, कच्चा दूध चढ़ाना चाहिये।
काले तिल का दान करना चाहिए।
दीपक भी जलाना चाहिये।

ज्येष्ठ अमावस्या के लाभ
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इस दिन उपासना से हर तरह के संकटों का नाश होता है।
संतान प्राप्ति और संतान सम्बन्धी समस्याओं का निवारण होता है।
अपयश और बदनामी के योग दूर होते हैं।
हर प्रकार के कार्यों की बाधा दूर होती है।
कर्ज सम्बन्धी परेशानियां दूर होती हैं।

ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि जयन्ती
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ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही शनि जयंती भी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन ही शनि देव का जन्म हुआ था। ऎसे में इस दिन शनि जयंती होने कारण शनि देव का पूजन होता है। इस दिन शनि के मंत्रों व स्तोत्रों को पढ़ा जाता है। ज्योतिष दृष्टि में नौ मुख्य ग्रहों में से एक शनि देव को न्यायकर्ता के रुप में स्थान प्राप्त है। मनुष्य के जीवन के सभी अच्छे ओर बुरे कर्मों का फल शनि देव ही करते हैं। इस दिन शनि पूजन करने पर पाप प्रभाव कम होते हैं और शनि से मिलने वाले कष्ट भी दूर होते हैं।

शनि जयंती पर उनकी पूजा - आराधना और अनुष्ठान करने से शनिदेव विशिष्ट फल प्रदान करते हैं। इस अमावस्या के अवसर पर शनिदेव के निमित्त विधि-विधान से पूजा पाठ, व्रत व दान पूण्य करने से शनि संबंधी सभी कष्ट दूर होते हैं ओर शुभ कर्मों की प्राप्ति होती है। शनिदेव पूजा के लिए प्रात:काल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर शनिदेव के निमित्त सरसों या तिल के तेल का दीपक पीपल के वृक्ष के नीचे जलाना चाहिए। साथ ही शनि मंत्र "ॐ शनिश्चराय नम:" का जाप करना चाहिए। शनिदेव से संबंधित वस्तुओं तिल , उड़द, काला कंबल, लोहा,वस्त्र, तेल इत्यादि का दान करना चाहिए।

ज्येष्ठ अमावस्या के दिन होता है वट सावित्री व्रत
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ज्येष्ठ अमावस्या के दिन “वट सावित्र” एक अन्य महत्वपूर्ण दिवस भी आता है। वट सावित्री व्रत स्त्रीयों द्वारा अखंड सौभाग्य एवं पति की लम्बी आयु के लिए रखा जाता है। इस दिन स्त्यवान और सावित्री की कथा सुनी जाती है और पीपल के वृक्ष का पूजन होता है। ज्येष्ठ अमावस्या पर विशेष तौर पर शिव-पार्वती के पूजन करने से भगवान की सदैव कृपा बनी रहती है। इस व्रत को करने से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। कुंवारी कन्याएं इस दिन पूजा करके मनचाहा वर पाती हैं और सुहागन महिलाओं को सुखी दांपत्य जीवन और अपने पति की लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शाम के समय नदी के किनारे या मंदिर में दीप दान करने का भी विधान है। इसी के साथ पीपल के वृक्ष का पूजन उस पर दीप जलाना ओर उसकी प्रदक्षिणा करना अत्यंत आवश्यक होता है और शुभ लाभ मिलता है। इस दिन प्रातः उठकर अपने इष्टदेव का ध्यान करना चाहिए। शास्त्रों में इस दिन पीपल लगाने और पूजा का विधान बताया गया है। जिसको संतान नहीं है, उसके लिए पीपल वृक्ष को लगाना और उसका पूजन करना अत्यंत चमत्कारिक होता है। पीपल में ब्रह्मा, विष्णु व शिव अर्थात त्रिदेवों का वास होता है। पुराणों में कहा गया है कि पीपल का वृक्ष लगाने से सैंकड़ों यज्ञ करने के समान फल मिलता है और पुण्य कर्मों की वृद्धि होती है। पीपल के दर्शन से पापों का नाश, छुने से धन-धान्य की प्राप्ति एवं उसकी परिक्रमा करने से आयु में वृद्धि होती है।


Tuesday, 25 April 2023

यह रत्न कभी भी एक साथ धारण नहीं करना चाहिए*

*यह रत्न कभी भी एक साथ धारण नहीं करना चाहिए*
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*✍🏻१:-माणिक्य के साथ-* नीलम, गोमेद, लहसुनिया वर्जित है। 
*२:-मोती के साथ-* हीरा, पन्ना, नीलम, गोमेद, लहसुनिया वर्जित है। 
*३:-मूंगा के साथ-* पन्ना, हीरा, गोमेद, लहसुनिया वर्जित है। 
*४:-पन्ना के साथ-* मूंगा, मोती वर्जित है। 
*५:-पुखराज के साथ-* हीरा, नीलम, गोमेद वर्जित है। 
*६:-हीरे के साथ-* माणिक्य, मोती, मूंगा, पुखराज वर्जित है। 
*७:-नीलम के साथ-* माणिक्य, मोती, पुखराज वर्जित है। 
*८:- गोमेद के साथ-* माणिक्य, मूंगा, पुखराज वर्जित है। 
*९:-लहसुनिया के साथ-* माणिक्य, मूंगा, पुखराज, मोती वर्जित है।