Sunday, 20 January 2019

रूठे या घर से भागे व्यक्ति को वापस लाने के टोटके


रूठे या घर से भागे व्यक्ति को वापस लाने के टोटके

वर्तमान समय में युवा वर्ग में धेर्य और संयम की कमी साफ़ तौर पर देखी जा सकती हैं। जिसके चलते उनको समय के साथ होने वाले कामों में भी बाधा आती हैं। जीवन में कई परिस्थितियाँ ऐसी आती हैं जब व्यक्ति को संयम के साथ उनका सामना करना चाहिए। लेकिन इन विषम परिस्थितियों में वह कुछ गलत फैसले ले लेता हैं, जिसमें सबसे ऊपर आता हैं घर छोड़ कर भाग जाना। ऐसे में व्यक्ति के परिवार वालों को कई कष्टों का सामना करना पड़ता हैं और वे घर छोड़ कर भागे हुए व्यक्ति के वापस लौटने की कामना करते रहते हैं। भगवान से प्राथना के साथ कुछ उपाय करने की भी आवश्यकता होती है जिससे कि भगा हुआ व्यक्ति वापस लौट आये। तो आज हम आपको कुछ ऐसे टोटके बताने जा रहे हैं जो घर से भागे व्यक्ति को वापस लाने में आपकी मदद करेंगे। तो आइये जानते हैं उन उपायों के बारे में। 

* गुमशुदा व्यक्ति का अंग लगा हुआ कोई भी वस्त्र लेकर सिलबट्टे के नीचे रख कर उस पर देसी घी का दीया जलाएं। उसके समीप बैठकर हल्के-हल्के से सिल पर छड़ी से वार करें। घर से गायब व्यक्ति जैसी भी हालत में होगा आपको तीन दिन के भीतर उसका समाचार मिलेगा।

* एक साफ भोजपत्र लेकर उस पर जल छिडक कर स्वच्छ कर लें। लाल चंदन को घिस कर लेप बना लें। इस लेप से अनार की कलम द्वारा म्रि यंत्र भोजपत्र पर बना लें। यंत्र मे अमुक वाले स्थान पर गये हुए व्यक्ति का नाम लिख दें। फिर एक छोटा मिट्टी का नया कलश एवं उस पर ढक्कन ले आयें। इस कलश में यंत्र रख दें। कलश के मुंह पर ढक्कन रखें। ढक्कन में तांबें के 5 गोमती चक्र, 5 सिक्के एवं 9 कौडिया रखें। कलश को उस कमरे के ईशान कोण में भूमि पर जल छिडक कर रख दें, जहां वह व्यक्ति सोता था। यहीं पूर्व की ओर मुंह करके एक माला निम्र मंत्र की करें। मंत्र जाप के पत उपले की आंच पर बर्फी के प्रसाद का भोग लगावें। इससे भागा व्यक्ति आपके पास वापस आ जायेगा।

* कपूर की टिकिया जला कर उस पर मिट्टी का दीपक उल्टा रखकर काजल बना लें। इस काजल से गये हुए व्यक्ति के वस्त्र पर दाहिने हाथ की सबसे बडी अंगुली से यंत्र बनायें। यंत्र बनाने के पश्चात् इस वस्त्र को हाथ में लेकर यह भावना करते हुए उसका नाम उच्चारण करें कि वह शीघ्र वापस लौट आये अथवा सूचना दें। ऎसा करने के बाद इस वस्त्र को पूजा स्थल के नीचे भारी वस्तु से दबा कर रख दें। गया हुआ व्यक्ति शीघ्र अपने बाने में सूचना देगा या वापस लौट आयेगा। 

* "ओम नमो काली कलिका, को आकर्शय आकर्शय। बड़े वेग आकर्शय जिन वाटे जाई सोई वाट खिलूँ। ओम श्रीं ह्रीं आकर्षण आकर्षण स्वाहा।" इस मंत्र का जाप 1000 की संख्या मे करना चाहिये जाप आप खुद भी कर सकते हो या किसी अच्छे कर्म कांड करने वाले ब्राह्मण से भी करवा सकते हो। जाप के पस्चात हवन करना जरूरी है। हवन हर रोज भी किया जा सकता है। 108 आहुति देते हुये हर रोज हवन कर सकते है खाली जगह पर उसका नाम लें जिसको बुलाना हो। काली पूजन करें काली मंदिर मे हर रोज सरसों के तेल का दीपक जलाएं इसके साथ 15 का यंत्र भी प्रयोग करे तो कार्य अति शीघ्र पूर्ण होगा ।

Thursday, 17 January 2019

Red colour

Red colour is related to with courage.
enthusiasm. liking. love and affection. When therelations are spoiled because of impolite dealings,expectations are not fulfilled and no plan succeeds
then the red colour dominates the mental center. Whenthe colour center ofthe brain is overpowered with the
red colour. everything starts appearing tobe reddish incolour. When the colour ofthe red center loses its tone
it indicates one's undue emotional attachment  or ofthe
hurt feelings. The people having this colour in moderate quantity are helpful for the others. like to
appIy their potential to their maximum and care about
their offspring and the fellow beings.

विवाह में देरी ओर ज्योतिष शास्त्र*

*विवाह में देरी ओर ज्योतिष शास्त्र*
✍🏻1.-सप्तम में बुध और शुक्र दोनो के होने पर विवाह वादे चलते रहते है, विवाह आधी उम्र में होता है। 2.चौथा या लगन भाव मंगल (बाल्यावस्था) से युक्त हो,सप्तम में शनि हो तो कन्या की रुचि शादी में नही होती है। 3.सप्तम में शनि और गुरु शादी देर से करवाते हैं। 4.चन्द्रमा से सप्तम में गुरु शादी देर से करवाता है, यही बात चन्द्रमा की राशि कर्क से भी माना जाता है। 5.सूर्य, मंगल, बुध लगन या राशिपति को देखता हो, और गुरु बारहवें भाव में बैठा हो तो आध्यात्मिकता अधिक होने से विवाह में देरी होती है। 6.लगन में सप्तम में और बारहवें भाव में गुरु या शुभ ग्रह योग कारक नही हों, परिवार भाव में चन्द्रमा कमजोर हो तो विवाह नही होता है, अगर हो भी जावे तो संतान नही होती है। 7.राहु की दशा में शादी हो, या राहु सप्तम को पीडित कर रहा हो, तो शादी होकर टूट जाती है..इत्यादि..!!

विवाह_सुख_कैसा_होगा

||#विवाह_सुख_कैसा_होगा?||                                            कुंडली का सातवा भाव वैवाहिक जीवन और जीवनसाथी का है।यह भाव और इस भाव का स्वामी +लड़के की कुंडली में शुक्र और लड़की की कुंडली में गुरु विवाह का सुख है या नही इसकी पूरी तरह जानकारी दे देते है।सबसे पहले कुंडली का सातवा भाव और इस भाव का स्वामी देखेंगे यदि सप्तम भाव पर या सप्तमेश पर कम से कम दो या दो से ज्यादा पाप/क्रूर ग्रहो शनि मंगल राहु केतु ग्रहो का प्रभाव है और विवाह कारक शुक्र गुरु भी इन्ही पाप/क्रूर ग्रहो की चपेट में है तब विवाह सुख नही मिलता शादी होने के बाद भी उसमे दिक्कते होगी या पति-पत्नी अलग-अलग रहेंगे।यदि सप्तम भाव सप्तमेश पाप ग्रहो के प्रभाव में है लेकिन सप्तम भाव गुरु से द्रष्ट है तब पति-पत्नि दोनों अलग न हो लेकिन वैवाहिक जीवन सही नह चलेगा।सप्तमेश अस्त, नीच राशि या पाप ग्रहो से युक्त होकर अशुभ स्थिति में होगा तब वैवाहिक जीवन सही नही रहेगा।इसके विपरीत सप्तमेश और सप्तम भाव में जितना ज्यादा गुरु शुक्र बुध का प्रभाव होगा उतना ही वैवाहिक जीवन बढ़िया रहेगा।सप्तम भाव सप्तमेश जितने ज्यादा पाप ग्रहो से बचे होंगे गुरु शुक्र बली होंगे लड़की-लड़के की कुंडली में उतना ही वैवाहिक जीवन मधुर और सुखमय होगा।विवाह संबंधी ग्रह सप्तमेश केंद्र त्रिकोण में कारक गुरु शुक्र भी केंद्र त्रिकोण में या लग्न अनुसार अपने शुभ भाव में होंगे उतना ही वैवाहिक जीवन बढ़िया रहेगा।इसके आलावा नवमांश कुंडली का लग्न लग्नेश+सप्तम भाव सप्तमेश और वही कारक लड़के के लिए शुक्र+लड़की के लिए गुरु बली होंगे और नवमांश कुंडली का सप्तम भाव, नवमांश लग्न, लग्नेश इन्ही ग्रहो से युक्त होगा उतना ही वैवाहिक जीवन सुख रहेगा, पाप ग्रहो के प्रभाव में होंगे से शुभ ग्रहो के प्रभाव में न होंने से वैवाहिक जीवन में दिक्कते रहेगी।लग्न कुंडली और नवमांश कुंडली दोनों में ही शादी की स्थिति बढ़िया होने से सोने पर सुहागा जैसे फल मिलेंगे यदि लग्न और नवमांश दोनों में ही शादी की स्थिति ख़राब होगी तो लाख कोशिश करने के बाद भी विवाह सुख नही मिलेगा।यदि लग्न और नवमांश दोनों कुंडलियो में से एक भी शादी के लिए अनुकूल है तब शादी सामान्य ठीक ही रहेगी।इसके आलावा कुंडली का दूसरा भाव, चौथा भाव और बारहवां भाव भी वैवाहिक जीवन के सुख वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दूसरा भाव परिवार वृद्धि का है, परिवारिक सुख है, चौथा भाव घर गृहस्थी है तो बारहवा भाव शैय्या सुख है यह भाव और सभी सुख वैवाहिक जीवन के सहयोगी भाव और वैवाहिक सुख के अंग है यदि इन चीजो में भी कमी है तब वैवाहिक जीवन में तनाब या सुख में कमी होना अनिवार्य हो जाता है।केवल सप्तम भाव और सप्तमेश शुभ है लेकिन यह भावेश शुभ स्थिति में नही होंगे तो शादी तो चलेगी लेकिन किसी न किसी कारण से परिवार सुख(द्वितीय भाव) घर-गृहस्थी(चतुर्थ भाव), शैय्या सुख(द्वादश भाव)में कमी रहेगी।इस तरह वैवाहिक जीवन की पूरी जीवनी कैसी रहेगी यह जातक की कुंडली में बनने वाली भाव और ग्रहो की स्थिति पर निर्भर करता है।

Wednesday, 16 January 2019

खुशहाली  के लिये कुछ  वास्तु टिप्स

खुशहाली  के लिये कुछ  वास्तु टिप्स
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जिन कन्याओं के विवाह में विलंब हो रहा है, उन्हें वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) के कमरे में रहना चाहिए। इससे उनका विवाह अच्छे और समृद्ध परिवार में होगा।

* विवाह पत्रिका कभी भूलकर भी न फाड़े क्योंकि इससे व्यक्ति को गुरु और मंगल का दोष लग जाता है।

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* रात को सोते वक्त व्यक्ति का सिर हमेशा दक्षिण दिशा में होना चाहिए। कभी भी उत्तर दिशा की ओर सिर करके नहीं सोना चाहिए। इससे अनिद्रा रोग होने की संभावना होती है साथ ही व्यक्ति की पाचन शक्ति पर विपरीत असर पड़ता है।

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* उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को हमेशा साफ-सुथरा रखें ताकि सूर्य की जीवनदायिनी किरणें घर में प्रवेश कर सकें।

* भोजन बनाते समय गृहिणी का हमेशा मुख पूर्व की ओर होना चाहिए। इससे भोजन सुपाच्य और स्वादिष्ट बनता है। साथ ही पूर्व की ओर मुख करके भोजन करने से व्यक्ति की पाचन शक्ति में वृद्धि होती है।

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डिप्रेशन

डिप्रेशन : कारण और उपाय

आइए जाने डिप्रेशन है क्या है. जब हमारी चेतना पुरानी घटनाओं में पुरानी कड़वी यादों में अटक के रह जाती है ,तो ऊर्जा का सही फ़्लो  बॉडी में नहीं हो पाता .खासतौर पर आनंदमय कोष से होती हुई उर्जा मनोमय कोष तक डिस्टर्ब हो जाती है , और हमारा मन और माइंड एनर्जी  फील नहीं करता .और उस घर में रहने वाले व्यक्ति को जीवन के आनंद में नहीं रहता है.
डिप्रेशन के चार मुख्य कारण माने गये हैं .
डिप्रेशन के मूल कारण क्या है?
सबसे बड़ा कारण है व्यक्ति का डिप्रेशन जोन अर्थात WNW में सोना .
दूसरा सबसे बड़ा कारण है कि   disposal जोन में मंदिर का होना .
तीसरा कारण है नॉर्थ ईस्ट में स्टोरेज का होना और
चौथा कारण है नॉर्थ ईस्ट में टॉयलेट का होना .

उपायों की दृष्टि से शुरू के दो कारणों को हम उन activities को किसी दूसरे पॉजिटिव जोन में रीलोकेट कराके प्राप्त कर सकते हैं .
तीसरे कारण के लिए हम वहां पर पिरामिड लगाकर उसकी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं और
चौथे कारण के लिए हमें नॉर्थईस्ट से टॉयलेट को हटाना ही होगा अगर आप टॉयलेट हटा नहीं सकते तो उसका इस्तेमाल बिल्कुल बंद कर दीजिए.
इन उपायों के साथ में डिप्रेसन  के जोन में अगर आप वाशिंग मशीन रख देते हैं और फ्लोर पर 1 ब्रास डियर सेंटर की तरफ फेस करते हुए रख देते हैं तो निश्चित ही आप अपनी पुरानी कड़वी यादों और पुराने बुरे अनुभवों को बहुत जल्दी ही दूर कर पाएंगे और एक फ्रेश और लाइवली स्टार्ट ले पाएंगे.

मंगल ग्रह की शांति  के लिए 

मंगल ग्रह की शांति  के लिए 

मंगल का स्वभाव क्रूर  है वहीं दूसरी तरफ वह पराक्रम का भी प्रतीक है। ज्योतिष शास्त्र में केतु को मंगल के सदृश माना गया है। मांगलिक योग व अंगारक योग भी मंगल के कारण ही बनता है।

जन्मपत्रिका के लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, द्वादश भाव में स्थित मंगल मांगलिक योग का कारण बनता है। यदि आपकी जन्मपत्रिका में मंगल अशुभ भावों का स्वामी है तब मंगल के शांति उपाय कर आप लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
 

मंगल-

-मंगल का एकाक्षरी मंत्र- ॐ अं अंगारकाय नम:
 

-मंगल के दान सामग्री : लाल वस्त्र,गुड़,मूंगा,लाल पुष्प,तांबा, रक्त चंदन, मसूर की दाल।
 

-मंगल के दान का समय: सूर्योदय से 48 मिनट पश्चात पूरा दिन
 

-मंगल के दान का दिन: मंगलवार

उपाय:

-250 ग्राम बताशे मंगलवार के दिन बहते जल में प्रवाहित करें।

-मंगलवार को हनुमान जी को सिन्दूर (चोला) अर्पण करें।

-लाल वस्त्रों का प्रयोग ना करें।

-प्रति मंगलवार सुंदरकांड का पाठ करें।

-मंगलवार को किसी से कुछ भेंट इत्यादि ना लें।

-ताम्रपत्र पर मंगल यंत्र उत्कीर्ण करा कर नित्य पूजा करें।

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Shalini malhotra 


9910057645