Tuesday, 30 December 2025

Yoni Stotrams

Chanting Yoni Stotrams (hymns to the divine feminine source) brings benefits like wealth, wisdom, inner peace, fertility, spiritual awakening, protection, and liberation (moksha), by invoking the power of Goddess Shakti, symbolizing creation, and balancing masculine/feminine energies. Specific benefits include removing obstacles, gaining all-around prosperity, connecting to the Divine Mother (Kamakhya), and achieving spiritual liberation through intense devotion and practices like Yoni Puja, often requiring initiation. 

Important Considerations:
  • Initiation: Some powerful Yoni Stotras and Kavachams (armor mantras) require initiation (Deeksha) from a qualified guru due to their intense power.
  • Intent: Performing with selfless devotion (Nishkam Bhava) yields faster, deeper results, though specific desires can be sought with proper initiation. 

*श्री नृसिंह नक्षत्रमालिका स्तोत्र* 🌸

*श्री नृसिंह नक्षत्रमालिका स्तोत्र* 🌸🦁

*अश्विनी नक्षत्रे* —
अश्विनीकुमारपूज्यं तेजोमूर्तिं नमाम्यहम् ।
नृसिंहं शरणं प्रपद्ये रक्ष मां सर्वदा प्रभो ॥१॥

*भरणी नक्षत्रे* —
भरण्यां भारवाहं तं त्रैलोक्यपालकं प्रभुम् ।
नृसिंहं शरणं यामि दुःखनाशं दयानिधिम् ॥२॥

*कृत्तिका नक्षत्रे* —
कृत्तिकाज्वलनाकारं शस्त्रधारिणमव्ययम् ।
नृसिंहं प्रपद्येऽहं सर्वमङ्गलदायकम् ॥३॥

*रोहिणी नक्षत्रे* —
रोहिण्यां रोहणं दत्वा भक्तानां सुखवर्धनम् ।
नृसिंहं प्रणमाम्यद्य पावनं सर्वपातकात् ॥४॥

*मृगशीर्षे* —
मृगरूपधरं दैत्यं दंशितुं तेजसा युतम् ।
नृसिंहं नमाम्यद्य भीषणं भुवनत्रये ॥५॥

*आर्द्रा नक्षत्रे* —
आर्द्रकण्ठं करालं तं दानवानां निवारकम् ।
नृसिंहं नमाम्यद्य भक्तरक्षणतत्परम् ॥६॥

*पुनर्वसू नक्षत्रे* —
पुनर्वसूकरुणासिंधुं दयामृतप्रदायकम् ।
नृसिंहं शरणं यामि सर्वारिष्टविनाशकम् ॥७॥

*पुष्य नक्षत्रे* —
पुष्ये पुष्टिप्रदं देवं भक्तानां पालनं विभुम् ।
नृसिंहं नमाम्यद्य भद्रं सौख्यप्रदायकम् ॥८॥

*आश्लेषा नक्षत्रे* —
आश्लेषासर्पसंहारं दुष्टदर्पविनाशकम् ।
नृसिंहं शरणं यामि मुक्तिदं मोक्षदायकम् ॥९॥

*मघा नक्षत्रे* —
मघासने महीशं तं पीठाधीशं नमाम्यहम् ।
नृसिंहं शरणं यामि सर्वलोकनमस्कृतम् ॥१०॥

*पूर्वफाल्गुनी नक्षत्रे* —
पूर्वफाल्गुनसंयुक्तं कान्तिकारं नमाम्यहम् ।
नृसिंहं प्रणतो भूत्वा दुःखशोकविनाशकम् ॥११॥

*उत्तरफाल्गुनी नक्षत्रे* —
उत्तरफाल्गुनीनाथं धर्मपालं दयानिधिम् ।
नृसिंहं शरणं यामि भीषणं भयहारकम् ॥१२॥

*हस्त नक्षत्रे* —
हस्तसंयुक्तपद्मं तं वरदं भक्तपालकम् ।
नृसिंहं प्रणमाम्यद्य सुखसंपत्प्रदायकम् ॥१३॥

*चित्रा नक्षत्रे* —
चित्रारूपधरं देवं शोभितं दिव्यकान्तिभिः ।
नृसिंहं प्रणमाम्यद्य सर्वलक्षणलक्षणम् ॥१४॥

*स्वाती नक्षत्रे* —
स्वातीवायुप्रभं देवं दैत्यसंहारकारणम् ।
नृसिंहं नमाम्यद्य भक्तसौख्यप्रदायकम् ॥१५॥

*विशाखा नक्षत्रे* —
विशाखायुधसंयुक्तं त्रैलोक्यत्राणकारणम् ।
नृसिंहं शरणं यामि दुष्टदर्पविनाशकम् ॥१६॥

*अनुराधा नक्षत्रे* —
अनुराधार्चितं देवं भक्तानुग्रहकारकम् ।
नृसिंहं प्रणमाम्यद्य पावनं सर्वकर्मणाम् ॥१७॥

*ज्येष्ठा नक्षत्रे* —
ज्येष्ठराज्यं समास्थाय दानवानां विनाशकम् ।
नृसिंहं नमाम्यद्य भक्तसंपत्प्रदायकम् ॥१८॥

*मूळ नक्षत्रे* —
मूळसंहारकं देवं मूलाधारं नमाम्यहम् ।
नृसिंहं शरणं यामि मोक्षदं सुखदायकम् ॥१९॥

*पूर्वाषाढा नक्षत्रे* —
पूर्वाषाढार्चितं देवं जयदं ज्वलनप्रभम् ।
नृसिंहं नमाम्यद्य सर्वपापविनाशकम् ॥२०॥

*उत्तराषाढा नक्षत्रे* —
उत्तराषाढनाथं तं धर्मसंरक्षणं विभुम् ।
नृसिंहं प्रणमाम्यद्य सर्वमङ्गलदायकम् ॥२१॥

*श्रवण नक्षत्रे* —
श्रवणे श्रवणप्रियं भक्तवाक्यप्रसादकम् ।
नृसिंहं शरणं यामि पावनं भवभीषणात् ॥२२॥

*धनिष्ठा नक्षत्रे* —
धनिष्ठायंत्रसंयुक्तं नृत्यगानप्रियं प्रभुम् ।
नृसिंहं प्रणमाम्यद्य मोक्षसौख्यप्रदायकम् ॥२३॥

*शतभिषा नक्षत्रे* —
शतभिषज्वरसंहारं रोगदुःखनिवारणम् ।
नृसिंहं नमाम्यद्य आयुरारोग्यदायकम् ॥२४॥

*पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्रे* —
पूर्वाभाद्रपदं देवं भद्रं भक्तहिते रतम् ।
नृसिंहं शरणं यामि सर्वशत्रुनिवारणम् ॥२५॥

*उत्तराभाद्रपदा नक्षत्रे* —
उत्तराभद्रनाथं तं स्थैर्यदं भुवनेश्वरम् ।
नृसिंहं प्रणमाम्यद्य सर्वकामप्रदायकम् ॥२६॥

*रेवती नक्षत्रे* —
रेवत्यां रक्षणं दत्त्वा भक्तानां सुखवर्धनम् ।
नृसिंहं शरणं यामि सर्वानुग्रहकारकम् ॥२७॥

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📿 *फलश्रुती* 📿
एतां नृसिंहनक्षत्रमालिकां यो जपेत् श्रद्धयान्वितः ।
सर्वान्कामानवाप्नोति मुक्तिं च परमां लभेत् ॥

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Wednesday, 10 December 2025

मासिक कालाष्टमी आज

मासिक कालाष्टमी आज 
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सनातन धर्म में कालाष्टमी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। वैदिक पंंचांग के अनुसार यह व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। यह दिन काल भैरव को समर्पित होता है। काल भैरव भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं। दरअसल भैरव के तीन रूप हैं काल भैरव, बटुक भैरव और स्वर्णाकर्षण भैरव। कालाष्टमी  के दिन इनमें से काल भैरव की पूजा की जाती है। कहते हैं कि इस दिन भगवान शंकर के काल भैरव स्वरूप की उपासना करने से जीवन की सारी परेशानियां दूर होती है। साथ ही काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है। इस बार साल का अंतिम कालाष्टमी व्रत 11 दिसंबर को मनाया जाएगा।

कालाष्टमी तिथि 2025
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वैदिक पंचांग के अनुसार दिसंबर में अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 दिसंबर 2025, गुरुवार दोपहर 01:58 बजे होगी। वहीं इसका अंत  12 दिसंबर 2025, शुक्रवार सुबह 02:57 बजे होगा। इसलिए 2025 की आखिरी कालाष्टमी और कालभैरव जयंती 11 दिसंबर 2025, गुरुवार को मनाई जाएगी। 

कालाष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त 2025
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ज्योतिष पंचांग के मुताबिक कालाष्टमी पर अभिजीत का मुहूर्त बन रहा है। यह मुहूर्त 11 बजकर 54 मिनट से शुरू होगा और दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर खत्म होगा। इस बीच में आप पूजा- अर्चना कर सकते हैं।

कालाष्टमी पर जरूर करें इन मंत्रों का जाप
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1. ओम शिवगणाय विद्महे गौरीसुताय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात।।
2. ओम कालभैरवाय नम:
3. ओम भ्रां कालभैरवाय फट्
4. धर्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्। द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये।।

कालाष्टमी धार्मिक महत्व
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शास्त्रों के मुताबिक जो भी व्यक्ति पूरे दिन व्रत रखकर काल भैरव की पूजा- अर्चना करता है। उसके कष्ट बाबा काल भैरव हर लेते हैं। साथ ही काल भैरव की पूजा करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही अज्ञात भय खत्म होता है और गुप्त शत्रुओं का नाश होता है। वहीं काल भैरव की कृपा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं, भय मिटता है और साधक को शक्ति, साहस व सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह व्रत शनि और राहु के बुरे प्रभावों को कम करने में भी सहायक माना जाता है।

कालाष्टमी पूजा विधि
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कालाष्टमी व्रत के दिन भगवान काल भैरव की पूजा विधि में प्रातः स्नान और पूजा स्थल का शुद्धिकरण करने के बाद व्रत का संकल्प लें। पूजा में काल भैरव की मूर्ति या चित्र पर काले वस्त्र अर्पित कर, फूल, बेलपत्र, काले तिल, धूप, दीप और कपूर से पूजा करें। इसके बाद भैरव चालीसा का पाठ और "ॐ कालभैरवाय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें। भगवान को मिष्ठान्न, पंचामृत और फल का भोग लगाकर आरती करें। इस दिन काले कुत्तों को रोटी या दूध खिलाना शुभ माना जाता है। व्रत का पारण अगले दिन ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान देकर करें।

हल्दी से करें ये उपाय*

*विशेष उपाय -*
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*🥐हल्दी से करें ये उपाय*
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*⚜️1. धन प्राप्ति के लिए हल्दी उपाय*
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धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि घर में धन से जुड़ी समस्या चल रही हो या धन की बचत नहीं हो पा रही हो, तो आप हल्दी का एक ज्योतिषीय उपाय कर सकते हैं. इसके लिए एक लाल रंग का स्वच्छ कपड़ा लें और उसमें हल्दी की गांठ बांध दें. फिर इसे घर की तिजोरी में रख दें. माना जाता है कि इससे लक्ष्मी मां की कृपा बनी रहती है और धन संबंधी समस्याओं का नाश होता है.

*⚜️2. डर और रुके हुए काम दूर करने का उपाय*
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यदि आपको किसी चीज़ का डर सताता है या आपके काम बनते-बनते रुक जाते हैं, तो सुबह स्नान कर भगवान गणेश की पूजा करें और उन्हें हल्दी का तिलक लगाएं. इसके बाद वही तिलक अपने माथे पर लगाएं. मान्यता है कि इससे रुके हुए काम पूरे होते हैं और भय का नाश होता है.

*⚜️3. बुरे सपनों से मुक्ति*
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यदि आपको सोते समय बुरे सपने आते हैं या अंधेरा होते ही डर लगता है, तो सोते समय अपने तकिए के नीचे हल्दी की गांठ रखकर सोएं.

*⚜️4. पैसे भूल जाने या न टिकने की समस्या*
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यदि आप पैसे कहीं रखकर भूल जाते हैं या आपके पास पैसा नहीं टिकता, तो अपने पर्स में हल्दी की गांठ को कपड़े में बांधकर रखें. ऐसा करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं.

*🫑मिर्ची से करें ये उपाय*
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*⚜️1. नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए*
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घर से नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर दूर करने के लिए घर के मुख्य द्वार पर हरी मिर्च टांगनी शुभ मानी जाती है.

*⚜️2. बुरी नजर या काला जादू से बचाव*
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अगर आपको लगता है कि आप पर किसी ने काला जादू किया है या बुरी नजर लगी है, तो सूखी लाल मिर्च लें. इसे अपने चारों ओर 7 बार घुमाएं और फिर जला दें. माना जाता है कि इससे बुरी नजर दूर हो जाती है.

*⚜️3. नौकरी में आ रही रुकावटें दूर करें*
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यदि आप नौकरी संबंधी समस्याओं से गुजर रहे हैं, तो 7 सूखी लाल मिर्च, एक मिट्टी का दिया और सरसों का तेल लें. दिया जलाएं और उसमें मिर्ची डालें. इसके बाद थोड़ा सा नमक डाल दें. इसे अपने कमरे में उस स्थान के पास उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखें, जहाँ आप कार्य करते हैं
           *🚩#हरिऊँ🚩*

Friday, 5 December 2025

🔹 || खरमास || 🔹*

*🔹 || खरमास || 🔹*   
    *16 दिसंबर 2025, मंगलवार* 

"वर्ष 2025 में खरमास 16 दिसंबर 2025 (मंगलवार) से शुरू होगा, जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे, और यह 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को मकर संक्रांति के साथ समाप्त होगा, जिसके दौरान विवाह और अन्य शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं"

*☀️धनु राशि में प्रवेश करेंगे सूर्यदेव-:* 
* ग्रहों के राजा सूर्य16 दिसंबर 2025, मंगलवार के दिन वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में गोचर करेंगे। इसे धनु संक्रांति भी कहा जाता है क्योंकि सूर्य धनु राशि के लग्न भाव में गोचर करेंगे और करीब एक माह तक रहेंगे। खरमास के दिनों में सूर्य देव धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं। इसके साथ ही बृहस्पति ग्रह का प्रभाव कम हो जाता है। वहीं, बृहस्पति यानी गुरु ग्रह को शुभ कार्यों का कारक माना जाता है। विवाह के लिए शुक्र और गुरु दोनों का उदय होना आवश्यक होता है। अगर दोनों में से एक भी अस्त रहेगा, तो शुभ व मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है//

* ज्योतिष शास्त्र और सनातन धर्म में खरमास में कुछ कार्यों का संपादन वर्जित माना गया है। जैसे इस दौरान सभी प्रकार के मांगलिक कार्य, शादी-विवाह आदि वर्जित होते हैं। अक्सर मार्गशीर्ष और पौष मास के बीच खरमास लगता है। हाल ही में देवउठनी एकादशी के साथ 4 महीने का चातुर्मास समाप्त हुआ है। साथ ही शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य शुरू हो चुके हैं, लेकिन अब फिर शुभ कार्यों और लग्नों पर पूर्ण विराम लगने जा रहा है।

*🔹खरमास में करें ये काम-:* 
* शास्त्रों के अनुसार खरमास में सूर्य देव की उपासना की जानी चाहिए।

* इस दौरान तीर्थों में स्नान, दीपदान और जरूरतमंदों को उपयोगी चीजों का दान करना शुभ माना जाता है और इससे हर कार्य की सिद्धि होती है।

* आवश्यक होने पर व्यापार, नव वस्त्र, उपनयन संस्कार, नामकरण, नव रत्न धारण और कर्णवेध संस्कार भी सुचारू रूप से आप खरमास के दौरान भी कर सकते हैं।

* अगर यात्रा की तिथि पहले से तय है तो आप इस दौरान यात्रा कर सकते हैं।

* पूजा पाठ, कथा और व्रत करने में भी कोई दोष नहीं होता है।

* मान्यता है कि खरमास के पूरे माह में सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल देना चाहिए।

* इसके अलावा इस दौरान सूर्य पाठ और सूर्य के मंत्रों का जाप करना चाहिए। प्रातःकाल उगते हुए सूर्य को नमस्कार करना चाहिए।
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*🔹खरमास के दौरान इन कार्यों को न करें-:* 

* धर्म-शास्त्रों के अनुसार खरमास के दौरान तामसिक भोजन जैसे- नॉनवेज, शराब इत्यादि के सेवन बचना चाहिए।

* इस दौरान प्रतिदिन तांबे के पात्र में दूध और पानी रखकर पीना अशुभ व हानिकारक माना जाता है।

* इसके अलावा विवाह और नवीन गृह प्रवेश भी नहीं करना चाहिए।कोई भी नया कारोबार इस अवधि में शुरू नहीं करना चाहिए। 

*🔹खरमास में ये करें उपाय-:* 

खरमास के महीने में जप-तप और दान इत्यादि करने का फल जन्मों तक मिलता है। इस माह में तुलसी व पीपल पूजा, गौ सेवा, सूर्य उपासना, भगवान श्री विष्णुजी के नाम जप- मंत्र जप, श्रीगीता- श्री रामचरितमानस- श्री सत्यनारायण जी के पाठ करना काफी शुभ फलदायक होते हैं//

                           🕉️🚩🕉️

Wednesday, 3 December 2025

क्रोध शांति हेतु

क्रोध शांति हेतु
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जिन्हे बहुत अधिक क्रोध आता हो वे नित्य रात्रि में सोते समय एक ताम्बे के लोटे में जल भर दे और उसमे एक चाँदी का सिक्का डाल दे.प्रातः मुह आदि धोकर इस जल का सेवन करे.धीरे धीरे क्रोध में कमी आ जायेगी और आपका स्वभाव सोम्य होने लगेगा।

👉🏻नकारत्मक ऊर्जा को दूर करने हेतु
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यदि आप सदा मानसिक तनाव में रहते है.नित्य बुरे स्वप्न आते है.छोटी छोटी बाते आपको अधिक विचलित कर देती है.अकारण भय लगता रहता है तो ,रात्रि में सोते समय अपने तकिये के निचे एक छोटा सा फिटकरी का टुकड़ा रख ले.और सुबह उठकर उसे अपने सर से तीन बार घुमाकर घर के बहार फेक दे.सतत कुछ दिनों तक करे  अवश्य लाभ होगा।

👉🏻गृह कलह निवारण एवं शुद्धि हेतु
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यदि निरंतर घर में कलह का वातावरण बना रहता हो,अशांति बनी रहती हो.व्यर्थ का तनाव बना रहता हो तो.थोड़ी सी गूगल लेकर" ॐ ह्रीं मंगला दुर्गा ह्रीं ॐ "मंत्र का 108बार जाप कर गूगल को अभी मंत्रित कर दे और उसे कंडे पर जलाकर पुरे घर में घुमा दे.ये सम्भव न हो तो गूगल धूप पर भी ये प्रयोग किया जा सकता है.घर में शांति का वातावरण बनने लगेगा।

Tuesday, 2 December 2025

Karya Siddhi Yantra

The symbol shown in the image is a Karya Siddhi Yantra, also known as the Sarva Karya Siddhi Yantra. It is a sacred geometric diagram used in Hindu traditions. 

Purpose: The yantra is believed to help individuals achieve success in all endeavors, fulfill desires, and remove obstacles. "Karya" means actions or work, and "Siddhi" means fulfillment or success. 

Benefits: Worshipping or possessing this yantra is thought to bring good fortune, intelligence, knowledge, self-assurance, and overall well-being. 

Specific Symbols: The different sections of the yantra feature various symbols, each with a specific meaning: 

Star/Sun (number 61): Imparts power, authority, finances, and ensures the fulfillment of desires. 

Arrow (number 52): Stands for protection against evil eyes and other dangers for the individual and their family. 

Ship (number 33): Considered unique, this symbol induces courage and ensures success in all activities undertaken. 

Thursday, 27 November 2025

अमावस्या पर करे ---

🌞  अमावस्या पर करे ---
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💵 जिनको पैसो की कमजोरी है तो तुलसी माता को 108 परिक्रमा करें | और  श्री हरि.... श्री हरि.... श्री हरि.... श्री हरि.... ‘श्री’ माना सम्पदा, ‘हरि’ माना भगवान की दया पाना | तो गरीबी चली जायेगी | 

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🌷 *ससुराल में तकलीफ़ हो तो* 🌷

👩अगर ससुराल में बहुत कष्ट है .... अपनी शुभ मनोकामनाएं पूरी न होने की पीड़ा है उनके लिए  माँ पार्वती का स्मरण करते हुए उनको मन ही मन प्रणाम करें .... " हे माँ मैं अपने घर में सुख ... शांति ... और समृद्धि की वृद्धि हेतुकर रही हूँ  "... सुबह ये संकल्प करें और  मंत्र से माँ पार्वती को प्रणाम करें ....
🌷 *ॐ पार्वतये नमः* 

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फ़िर 11माला जपे 

🌷 * ॐ गौरीशंकराय नम : "रुद्राक्ष की माला से 

🙏🏻 फिर भगवान गणपतिजी और कार्तिक स्वामी को मन ही मन प्रणाम कर दें ... हो सके तो 8 बत्ती वाला दीपक जलाएं .... और रात भर वो दीपक जलता रहे ।

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🙏अमावस्या के पर्व में स्नान-दान का बड़ा महत्त्व है।
इस दिन भी मौन रहकर स्नान करने से हजार गौदान का फल होता है।

इस दिन पीपल और भगवान विष्णु का पूजन तथा उनकी 108 प्रदक्षिणा करने का विधान है। 108 में से 8 प्रदक्षिणा पीपल के वृक्ष को कच्चा सूत लपेटते हुए की जाती है। 

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इस दिन तुलसी की 108 परिक्रमा करने से दरिद्रता मिटती है।
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🌷 *धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए* 🌷

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🔥  हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।
🍛सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गुगल, ७. गुड़, ८. देशी कपूर,  कण्डा।

🔥 विधि: कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त 8 वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर इसको जलाये ।

मार्गशीर्ष

#remedialpathmakinglifeeeasy

#मार्गशीर्ष
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☀️🍀🌿🍀🥀🌷✡️🌻🌸💐🌅🔯🌹🎊☀️🎉🌿🍀♥️🥀🌷
#मार्गशीर्ष #हिन्दू #पंचांग का #नौवां महीना है.इसे #अग्रहायण या #अगहन का #महीना भी कहते हैं. 
इस वर्ष 24 नवंबर 2018 (उत्तर भारत हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार) से मार्गशीर्ष का आरम्भ हो गया है। इसे हिन्दू शास्त्रों में सर्वाधिक पवित्र महीना माना जाता है. यह इतना पवित्र है कि भगवान गीता में कहते हैं कि - महीनों में, मैं #मार्गशीर्ष हूं. इसी महीने से सतयुग का आरम्भ माना जाता है.मार्गशीर्ष माह में मथुरा पुरी निवास करने का बहुत महत्व है।

 प्राचीन समय में मार्गशीर्ष से ही नववर्ष का प्रारम्भ माना जाता था। मार्गशीर्ष माह में #सनातन #संस्कृति के दो प्रमुख विवाह संपन्न हुए थे। शिव विवाह तथा राम विवाह। मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को राम विवाह तो सर्वविदित है ही साथ ही शिवपुराण, रुद्रसंहिता, पार्वतीखण्ड के अनुसार सप्तर्षियों के समझाने से हिमवान ने शिव के साथ अपनी पुत्री का विवाह मार्गशीर्ष माह में निश्चित किया था ।
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मार्गशीर्ष माह में मथुरापुरी निवास करने का बहुत महत्व है। स्कन्दपुराण में स्वयं श्रीभगवान, ब्रह्मा से कहते हैं -
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“पूर्णे वर्षसहस्रे तु तीर्थराजे तु यत्फलम् । 
तत्फलं लभते पुत्र सहोमासे मधोः पुरे ।।” 

अर्थात तीर्थराज प्रयाग में एक हजार वर्ष तक निवास करने से जो फल प्राप्त होता है, वह मथुरापुरी में केवल अगहन (मार्गशीर्ष) में निवास करने से मिल जाता है।

मार्गशीर्ष मास में केवल अन्नका दान करने वाले मनुष्यों को ही सम्पूर्ण अभीष्ट फलों की प्राप्ति हो जाती है | #मार्गशीर्षमास में अन्न का दान करने वाले मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं |
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शिवपुराण के अनुसार मार्गशीर्ष में #चाँदी का दान करने से वीर्य की वृद्धि होती है। शिवपुराण विश्वेश्वर संहिता के अनुसार #मार्गशीर्ष में #अन्नदान का सर्वाधिक महत्व है
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स्कन्द पुराण में बताया गया है कि भगवान की कृपा पाने के लिए घर पर रखी भागवत को दिन में एक बार पूजा-पाठ के दौरान जरूर प्रणाम करना चाहिए।
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श्रीकृष्ण ने गोपियां को मार्गशीर्ष माह की महत्ता बताई थी तथा उन्होंने कहा था कि मार्गशीर्ष के महीने में यमुना स्नान से मैं सहज ही प्राप्त हो जाता हूँ अत: इस माह में नदी स्नान का विशेष महत्व माना गया है
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- जो व्यक्ति मार्गशीर्ष मास में ब्रह्रा मुहुर्त में तीन दिन तक किसी पवित्र नदी में स्नान करता है उस पर भगवान की कृपा हमेशा बनी रहती है।
इस महीने से संध्याकाल की उपासना अवश्य करनी चाहिए। 
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जो प्रतिदिन एक बार भोजन करके समूचे मार्गशीर्ष को व्यतीत करता है और भक्तिपूर्वक ब्राह्मणों को भोजन कराता है, वह रोगों और पातकों से मुक्त हो जाता है।
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- अगहन मास में गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।
तुलसी के पत्तों का भोग लगाएं और उसेप्रसाद की तरह ग्रहण करें.

- पूरे महीने "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करें.
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- अगहन माह की पूर्णिमा तिथि को चन्द्रमा का पूजन अवश्य करना चाहिए।इस दिन चन्द्रमा को अमृत तत्व की प्राप्ति भी होती है.
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इस महीने में नित्य गीता का पाठ करें.
इस महीने में संतान के लिए वरदान बहुत सरलता से मिलता है

मार्गशीर्ष में चित्रा और विशाखा शून्य नक्षत्र हैं इनमें कार्य करने से धन का नाश होता है।

मार्गशीर्ष में सप्तमी, अष्टमी मासशून्य तिथियाँ हैं। मासशून्य तिथियों में मङ्गलकार्य करने से वंश तथा धन का नाश होता है।

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Tuesday, 25 November 2025

स्कंध षष्ठी आज

चंपाषष्ठी / स्कंध षष्ठी आज 
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मार्गशीर्ष (अगहन) माह की शुक्लपक्ष की षष्टी तिथि के दिन चंपा षष्ठी का पर्व मनाया जाता हैं। चंपा षष्ठी को चम्पा छठ, स्कंद षष्टी और बैंगन छठ के नाम से भी जाना जाता हैं। यह पर्व प्रमुख रूप से महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्य में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता हैं। इस दिन खंडोबा (खंडेराव) की पूजा की जाती है। खंडोबा को भगवान शिव का अवतार और चरवाहों, किसानों व शिकारियों का देवता माना जाता हैं।
इस दिन को स्कंद षष्टी भी कहा जाता हैं, दक्षिण भारत के कई स्थानों पर इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती हैं। इस दिन भगवान शिव के मार्कंडेय स्वरूप की उपासना करने से जातक का जीवन सुखमय हो जाता है और उसके इस जन्म व पूर्व जन्म के पापों का भी निवारण हो जाता हैं।

चंपा षष्ठी (चम्पा छठ) कब हैं?
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इस वर्ष चंपा षष्ठी का पर्व 26 नवम्बर 2025, बुधवार के दिन मनाया जायेगा।

चंपा षष्ठी का महत्व
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हिंदु मान्यता के अनुसार चंपा षष्ठी के दिन भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय का व्रत एवं पूजन करने से साधक को उनकी कृपा प्राप्त होती हैं। विधि अनुसार इस दिन का व्रत एवं पूजन करने से

• साधक के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।

• साधक जीवन की परेशानियों से मुक्त हो जाता हैं।

• साधक के कार्य बिना किसी बाधा के पूर्ण हो जाते हैं।

• सुखमय जीवन की प्राप्ति होती हैं।

• घर-परिवार में शांति होती हैं।

• धन-समृद्धि में वृद्धि होती हैं।

• संतान पर आने वाली विपत्तियों का नाश होता हैं। और उनका जीवन निष्कंटक हो जाता हैं।

• जातक जीवन के सभी सुखों को भोगकर मृत्यु के बाद मोक्ष को प्राप्त होता हैं।

• ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा और उनका व्रत करने से साधक को मंगल ग्रह की अनुकूलता प्राप्त होती हैं।


चंपा षष्टी की पूजा विधि
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• चंपा षष्ठी के दिन प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व ही स्नानादि नित्य क्रिया से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

• शिवालय जाकर दूध व गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें।

• शिवजी को बेलपत्र, फल-फूल अर्पित करें। चंदन से तिलक करें।

• भगवान शिव का ध्यान करें। शिवमहिम्नस्त्रोत्र और शिव चालीसा का पाठ करें।

• इस मंत्र का 108 बार जाप करें – ॐ श्रीं अर्धनारीश्वराय प्रेमतत्त्वमूर्तये नमः।

• भगवान शिव को भोग में देशी खाण्ड़, बाजरा और बैंगन अर्पित करें। फिर उसे भोग लगाकर निर्धन और जरूरतमंद लोगों में बाँट दें।

• संध्या (प्रदोष काल) के समय शिवालय में तेल के नौ दीपक जलायें।

चंपा षष्ठी की कथा
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पौराणिक कथा के अनुसार एक समय मणि-मल्ह नाम के दो राक्षस थे। वो दोनो सगे भाई थे। वो ब्रह्मा जी से वरदान पाकर बहुत शक्तिशाली और निरंकुश हो गये थे। उन्होने अपनी शक्ति के अभिमान में आकर ऋषि-मुनियों का जीवन दूभर कर दिया था। तब ऋषियों ने देवताओं से सहयता मांगी पर कोई लाभ ना हुआ। मणि-मल्ह दोनों भाइयों की शक्ति के सामने उनकी एक ना चली तब सभी मिलकर भगवान शिव की शरण में गये। तब भगवान शिव ने उनकी सहायता का वचन दिया।
भगवान शिव भैरव रूप में प्रकट हुये और देवी पार्वती ने शक्ति स्वरूप में प्रकट होकर खंडोबा नामक स्थान पर मणि-मल्ह नाम के दोनों दैत्य भ्राताओं से छह दिनों तक युद्ध करके उन्हे चम्पा षष्टी के ही दिन मृत्यु के घाट उतार दिया था। इस लिये इस दिन चम्पा षष्टी का पर्व बहुत धूम-धाम से मनाया जाता हैं। महाराष्ट्र में भगवान शिव के अवतार भैरव को मार्तंड-मल्लहारी व खंडोबा के नाम से पुकारा जाता हैं।


हनुमानजी को सिंदूर का चोला चढ़वाएं

हनुमानजी को सिंदूर का चोला चढ़वाएं

हनुमानजी को सिंदूर और तेल अर्पित करें। जिस प्रकार विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं, ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। जो भी व्यक्ति शनिवार को हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करता है उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।
अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी हनुमान मंदिर में बजरंग बली की प्रतिमा पर चोला चढ़वाएं। ऐसा करने पर आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएंगी।

चौमुखा दीपक का उपाय

हनुमानजी के सामने शनिवार की रात को चौमुखा दीपक लगाएं। यह एक बहुत ही छोटा लेकिन चमत्कारी उपाय है। ऐसा नियमित रूप से करने पर आपके घर-परिवार की सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं।

पीपल के नीचे करें ये उपाय

– किसी पीपल पेड़ को जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।

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tara chakra

1 जन्म तारा - चन्द्रमा जिस नक्षत्र मै है वह जन्म तारा नक्षत्र है इस तारा नक्षत्र मै इंसान को अपने कर्मो का फल महादशा अंतर दशा मै मिलता है, जो भी अच्छा बुरा करोगे उस का फल मिलेगा

2 सम्पत तारा - चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का  दूसरा नक्षत्र होता है वह सम्पत तारा नक्षत्र मै आता है इस नक्षत्र की महादशा ओर अंतर दशा मै धन ओर समृद्धि मिलती है

3 विपत् तारा - चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का  तीसरा नक्षत्र होता है वह विपत  तारा नक्षत्र मै आता है  इस नक्षत्र मै बैठे ग्रह की महादशा ओर अंतर दशा मै खतरे मुसीबत दुर्घटना आपदाए आ सकती है

4 शैम् तारा - चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का चौथा नक्षत्र होता है वह शेम तारा नक्षत्र मै आता है  इस नक्षत्र मै बैठे ग्रह की महादशा ओर अंतर दशा अच्छी ओर शुभ कामों मै जाति हे


5 प्रत्यारी तारा -  चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का पांचवा नक्षत्र होता है वह प्रत्यारी तारा नक्षत्र मै आता है  इस नक्षत्र मै बैठे ग्रह की महादशा ओर अंतर दशा मै बाधा ओर विफलता आती है

6 साधक तारा -  चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का छता नक्षत्र होता है वह प्रत्यारी तारा नक्षत्र मै आता है  इस नक्षत्र मै बैठे ग्रह की महादशा ओर अंतर दशा मै उपलब्धिया सफलता जीवन मै वृद्धि स्थिति मै सुधार आता है

7  वध तारा -  चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का सातवां नक्षत्र होता है वह वध तारा नक्षत्र मै आता है  इस नक्षत्र मै बैठे ग्रह की महादशा ओर अंतर दशा मै मृत्यु गंभीर कष्ट बीमारी मुसीबत ओर दुर्भाग्य का खतरा रहता है

8  मित्र तारा -  चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का आठव नक्षत्र होता है वह मित्र तारा नक्षत्र मै आता है  इस नक्षत्र मै बैठे ग्रह की महादशा ओर अंतर दशा मै उपलब्धिया सफलता जीवन मै वृद्धि सहायता दोस्ती खुशी ओर चिंता सै छुटकारा मिलता है

9  अति मित्र तारा -  चन्द्रमा के बाद जिस ग्रह का नवमा नक्षत्र होता है वह अतिमित्र तारा नक्षत्र मै आता है  इस नक्षत्र मै बैठे ग्रह की महादशा ओर अंतर दशा मै उपलब्धिया सफलता आसानी सै जीवन जीना, आराम दायक जिंदगी होती है हर तरफ सफलता मिलती है

राहु के लिए :

राहु के लिए : 
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समय रात्रिकाल 

भैरव पूजन या शिव पूजन करें। काल भैरव अष्टक का पाठ करें। 

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राहु के मूल मंत्र का जप रात्रि में 18,000 बार 40 दिन में करें। 

मंत्र : 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:'। 

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दान-द्रव्य : गोमेद, सोना, सीसा, तिल, सरसों का तेल, नीला कपड़ा, काला फूल, तलवार, कंबल । 

शनिवार का व्रत करना चाहिए। भैरव, शिव या चंडी की पूजा करें। 

8 मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

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Sunday, 23 November 2025

कैसे करे जप माला से ये जाने

कैसे करे जप माला से ये जाने :- 
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 🌹🌹जप करने वाले व्यक्ति को एक बार में 108 जाप पूरे करने चाहिए। इसके बाद सुमेरु से माला पलटकर पुनः जाप आरंभ करना चाहिए।

* किसी भी स्थिति में माला का सुमेरु लांघना नहीं चाहिए।माला को अंगूठे और अनामिका से दबाकर रखना चाहिए और मध्यमा उंगली से एक मंत्र जपकर एक दाना हथेली के अंदर खींच लेना चाहिए।

* तर्जनी उंगली से माला का छूना वर्जित माना गया है।

* माला के दाने कभी-कभी 54 भी होते हैं। ऐसे में माला फेर कर सुमेरु से पुनः लौटकर एक बार फिर एक माला अर्थात् 54 जप पूरे कर लेना चाहिए।

* मानसिक रूप से पवित्र होने के बाद किसी भी सरल मुद्रा में बैठें जिससे गर्दन और सिर एक सीधी रेखा में रहे।

* मंत्र जप पूरे करने के बाद अंत में माला का सुमेरु माथे से छुआकर माला को किसी पवित्र स्थान में रख देना चाहिए।

* मंत्र जप में कर-माला का प्रयोग भी किया जाता है।

* जिनके पास कोई माला नहीं है वह कर-माला से विधि पूर्वक जप करें। कर-माला से मंत्र जप करने से भी माला के बराबर जप का फल मिलता है।

भगवान सूर्य के लिए :
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माणिक्य, गारनेट, बिल की लकड़ी की माला का उपयोग करे |www.astroshaliini.com

भगवान शिव शंकर के लिए :
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इनके लिए रुद्राक्ष की माला काम में ले |पढ़े : रुद्राक्ष की उत्पति की कहानी

माँ दुर्गा के लिए :
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माँ शेरोवाली के लिए लाल चन्दन की माला से जप करे |

माँ लक्ष्मी के लिए :
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कमलट्टे की माला माँ लक्ष्मी की की गयी आराधना जल्दी सफल होती है |

भगवान हरि विष्णु के लिए :
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तुलसी या चन्दन की माला का प्रयोग करे |

माँ अम्बिका की पूजा में :
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स्फटिक माला काम में ले |

माँ काली के मंत्र जप :
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नील कमल या काली हल्दी की माला से मंत्र जाप करे |
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बगलामुखी :
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पीली हल्दी की माला माँ बगलामुखी को प्रिय है |

9 zones vastu sidhanta :-

9 zones vastu sidhanta :-

9 zones vastu sidhanta divides the plot/property in nine zones.
They are East, Southeast, South, Southwest, West, Northwest, North and East .The central part is called Space or Bhrahmasthana.

Theoretically main directions (E, S, W, N) effect more but practically the sub-directions (Se, Sw, Nw, Ne) affect more.

Significance of directions are as follows:-

East (E):-The energy generated by East Zone facilitates the Social Connectivity. It is the ideal Zone for a Drawing Room.

South-East (SE):- Also known as the Fire Zone, it is the Zone of Money.

South-West (SW):- It is the Zone of Skill, Marriage, Family Harmony, Bonding, Stability in life and Relationships.

West 
The energy of this Zone ensures that no action or effort made by you goes waste.

North-West (NW):- The North-West Zone generates the energy that attracts Supportive and Helpful people for any cause you pursue.

North (N):- As North Zone represents Money or Treasure, its energy helps you to generate New Opportunities to earn money
.
North-East (NE):-It is the Zone of Wisdom, Meditation and Inspiration. In Vastu, this Zone is ideal for Meditation.

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Sunday, 27 July 2025

पाशुपतास्त्र-मन्त्र

अग्नि पुराण का अध्याय 322, पाशुपतास्त्र-मन्त्र द्वारा शान्ति और पूजा का वर्णन करता है। इसमें महादेव (शिव) द्वारा स्कन्द को पाशुपतास्त्र-मन्त्र के उपयोग से शांति प्राप्त करने की विधि बताई गई है, जिसमें जप और हवन शामिल हैं। अध्याय 322 में, पाशुपतास्त्र-मन्त्र के जप और हवन के माध्यम से शांति प्राप्त करने की प्रक्रिया का वर्णन है। मुख्य बातें:
  • पाशुपतास्त्र-मन्त्र:
    यह एक शक्तिशाली मंत्र है जिसका उपयोग शांति और सुरक्षा के लिए किया जाता है।
  • जप और हवन:
    अध्याय में जप और हवन की विधि बताई गई है, जिसमें मंत्रों का पाठ और घी और गुग्गुल से आहुति देना शामिल है।
  • पूर्वकृत पुण्य का नाश:
    अध्याय में यह भी बताया गया है कि इस मन्त्र के आंशिक पाठ से पूर्वकृत पुण्य का नाश हो सकता है, लेकिन फडन्त सम्पूर्ण मन्त्र का जप आपत्ति आदि का नाश करता है।
  • असाध्य कार्यों की सिद्धि:
    घी और गुग्गुल से हवन करने से असाध्य कार्य भी पूरे किए जा सकते हैं। यह अध्याय अग्नि पुराण के महत्वपूर्ण भागों में से एक है जो शांति, सुरक्षा और आध्यात्मिक उन्नति के लिए पाशुपतास्त्र-मन्त्र के उपयोग पर प्रकाश डालता है। 

Wednesday, 23 July 2025

हरियाली अमावस आज ********************

हरियाली अमावस आज 
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सावन महीने का खास महत्व है। यह महीना बेहद पावन होता है। इस महीने में रोजाना देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही सावन सोमवार समेत विशेष शुभ अवसर पर साधक शिव-पार्वती के निमित्त व्रत रखते हैं।
सावन महीने में कई प्रमुख व्रत एवं त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें सावन शिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इसके अगले दिन हरियाली अमावस्या मनाई जाती है। इसे सावन अमावस्या भी कहा जाता है। 

कब है हरियाली अमावस्या?
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पंचांग के अनुसार, 24 जुलाई को देर रात 02 बजकर 28 मिनट पर सावन माह की अमावस्या तिथि शुरू होगी। वहीं, 25 जुलाई को देर रात 12 बजकर 40 मिनट पर सावन अमावस्या तिथि समाप्त होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। इस प्रकार 24 जुलाई को सावन अमावस्या मनाई जाएगी। सावन अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है।

सावन अमावस्या शुभ योग 
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ज्योतिषियों की मानें तो हरियाली अमावस्या पर हर्षण योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इनमें गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और शिववास योग प्रमुख हैं। इन योग में देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा करने से साधक की हर एक मनोकामना पूरी होगी। साथ ही सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलेगी।

शिववास योग
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हरियाली अमावस्या पर दुर्लभ शिववास योग का संयोग है। इस योग का निर्माण सुबह से हो रहा है। वहीं, शिववास योग देर रात 12 बजकर 40 मिनट तक है। इस दौरान भगवान शिव कैलाश पर जगत जननी देवी मां गौरी के साथ रहेंगे। इस समय में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी। साथ ही सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।

शुभ योग 
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हरियाली अमावस्या पर कई मंगलकारी शुभ योग बन रहे हैं। इनमें रवि पुष्य योग शाम 04 बजकर 43 मिनट से लेकर 25 जुलाई को सुबह 05 बजकर 39 मिनट तक है। सर्वार्थ सिद्धि योग और शिववास योग भी दिन भर है। साथ ही हर्षण योग सुबह 09 बजकर 51 मिनट तक है। वही, अमृत सिद्धि योग शाम 04 बजकर 43 मिनट से लेकर 25 जुलाई को सुबह 05 बजकर 39 मिनट तक है। वहीं, पुनर्वसु नक्षत्र शाम 04 बजकर 43 मिनट तक है। इसके बाद पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इन योग में देवों के देव महादेव की पूजा करने से साधक को पृथ्वी लोक पर स्वर्ग समान सुखों की प्राप्ति होगी।

हरियाली अमावस्या का महत्व
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पुराणों में उल्लेख है कि श्रावण मास में किया गया दान, स्नान, पूजन और तप विशेष पुण्यफल देने वाला होता है। हरियाली अमावस्या के दिन किया गया व्रत, पूजा-पाठ और तर्पण व्यक्ति को पूर्व जन्मों और वर्तमान जीवन में अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति दिलाता है। साथ ही यह दिन जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला माना जाता है।


Wednesday, 2 April 2025

अष्टकम (Ashtakam) का पाठ

अष्टकम (Ashtakam) का पाठ करने से मन को शांति मिलती है, जीवन के कष्ट कम होते हैं, और भगवान की कृपा प्राप्त होती है. 
विभिन्न अष्टकमों के लाभ:
नारायण अष्टकम:
नियमित पाठ से मन को शांति, आध्यात्मिक संतुष्टि मिलती है, जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है, पापों का नाश होता है, और धन-समृद्धि आती है. 
महालक्ष्मी अष्टकम:
भक्तिपूर्वक पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, पाप नष्ट होते हैं, और धन-अन्न की प्राप्ति होती है. 
श्री कृष्ण अष्टकम:
भगवान कृष्ण जल्दी प्रसन्न होते हैं, कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं, और सभी कार्यों में सफलता मिलती है. 
हनुमान अष्टक:
हनुमान जी को प्रसन्न करने से हर तरह के संकट दूर होते हैं, जीवन में खुशियां आती हैं. 
गोपाल अष्टकम:
संतान प्राप्ति के लिए नियमित पाठ करने से संतान योग बनते हैं. 
भवानी अष्टकम:
यह अष्टकम भक्तों को भगवान की शरण में रहने और उनसे सब कुछ पाने का संदेश देता है. 
अष्टकम पाठ के सामान्य लाभ:
मानसिक शांति:
नियमित पाठ से मन शांत और स्थिर होता है. 
कष्टों से मुक्ति:
अष्टकम पाठ जीवन के कष्टों और समस्याओं से मुक्ति दिलाने में सहायक है. 
पाप नाश:
अष्टकम पाठ से पापों का नाश होता है. 
भक्ति और भाव में वृद्धि:
अष्टकम पाठ से भगवान के प्रति भक्ति और भाव में बढ़ोतरी होती है. 
सफलता:
अष्टकम पाठ से सभी कार्यों में सफलता मिलती है. 
रोग और कष्टों से राहत:
अष्टकम पाठ से रोग और कष्टों से राहत मिलती है. 
साहस और आत्मविश्वास:
अष्टकम पाठ भय और चिंता को दूर कर साहस और आत्मविश्वास प्रदान करता है. 
धन-समृद्धि:
अष्टकम पाठ से जीवन में धन और समृद्धि का आगमन होता है.

अष्टकम (Ashtakam) का पाठ

अष्टकम (Ashtakam) का पाठ करने से मन को शांति मिलती है, जीवन के कष्ट कम होते हैं, और भगवान की कृपा प्राप्त होती है. 
विभिन्न अष्टकमों के लाभ:
नारायण अष्टकम:
नियमित पाठ से मन को शांति, आध्यात्मिक संतुष्टि मिलती है, जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है, पापों का नाश होता है, और धन-समृद्धि आती है. 
महालक्ष्मी अष्टकम:
भक्तिपूर्वक पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, पाप नष्ट होते हैं, और धन-अन्न की प्राप्ति होती है. 
श्री कृष्ण अष्टकम:
भगवान कृष्ण जल्दी प्रसन्न होते हैं, कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं, और सभी कार्यों में सफलता मिलती है. 
हनुमान अष्टक:
हनुमान जी को प्रसन्न करने से हर तरह के संकट दूर होते हैं, जीवन में खुशियां आती हैं. 
गोपाल अष्टकम:
संतान प्राप्ति के लिए नियमित पाठ करने से संतान योग बनते हैं. 
भवानी अष्टकम:
यह अष्टकम भक्तों को भगवान की शरण में रहने और उनसे सब कुछ पाने का संदेश देता है. 
अष्टकम पाठ के सामान्य लाभ:
मानसिक शांति:
नियमित पाठ से मन शांत और स्थिर होता है. 
कष्टों से मुक्ति:
अष्टकम पाठ जीवन के कष्टों और समस्याओं से मुक्ति दिलाने में सहायक है. 
पाप नाश:
अष्टकम पाठ से पापों का नाश होता है. 
भक्ति और भाव में वृद्धि:
अष्टकम पाठ से भगवान के प्रति भक्ति और भाव में बढ़ोतरी होती है. 
सफलता:
अष्टकम पाठ से सभी कार्यों में सफलता मिलती है. 
रोग और कष्टों से राहत:
अष्टकम पाठ से रोग और कष्टों से राहत मिलती है. 
साहस और आत्मविश्वास:
अष्टकम पाठ भय और चिंता को दूर कर साहस और आत्मविश्वास प्रदान करता है. 
धन-समृद्धि:
अष्टकम पाठ से जीवन में धन और समृद्धि का आगमन होता है.

Wednesday, 12 March 2025

होलिका दहन स्तोत्र ।।

सभी देशवासियों को
        पावन होलिका दहन पर्व
                 की हार्दिक शुभकामनाएं !

।। होलिका दहन स्तोत्र ।।

होली जलाते समय या होली जलाने के बाद तीन या पांच परिक्रमा करने के पश्चात होलिका को दोनों हाथो से नमस्कार करके यह स्तोत्र बोलने से होलिका माता मनुष्य के सभी पापो को हर लेती है, सभी सन्तापों को हर लेती है, और सभी प्रकार से कल्याण करती है होलिका जगन्माता बन के सर्वसिद्धियाँ प्रदान करती हैं, सुखशान्ति प्रदान करती हैं।

                 * होलिका दहन स्तोत्र *

ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्निदेवाय धीमहि। तन्नो अग्निः प्रचोदयात्।

अर्थ-
ॐ, मैं उस महान् ज्योति का, अग्निदेव का ध्यान करता हूँ। वह (शुभ) अग्नि हमें (समृद्धि और कल्याण की ओर) प्रेरित करे।

पापं तापं च दहनं कुरु कल्याणकारिणि।
होलिके त्वं जगद्धात्री होलिकायै नमो नमः।।

होलिके त्वं जगन्माता सर्वसिद्धिप्रदायिनी।
ज्वालामुखी दारूणा त्वं सुखशान्तिप्रदा भव।।

वन्दितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च।
अतस्त्वं पाहिनो देवि भूते भूतिप्रदा भव।।

अस्माभिर्भय सन्त्रस्तैः कृत्वा त्वं होलि बालिशैः।
 अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव।।

 त्वदग्नि त्रिः परिक्रम्य गायन्तु च हसंतु च।
होलिके त्वं जगद्धात्री होलिकायै नमो नमः।।

होलिके त्वं जगन्माता सर्वसिद्धिप्रदायिनी।
ज्वालामुखी दारूणा त्वं सुखशान्तिप्रदा भव।।

 वन्दितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च।
अतस्त्वं पाहिनो देवि भूते भूतिप्रदा भव।।

अस्माभिर्भय सन्त्रस्तैः कृत्वा त्वं होलि बालिशैः।
अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव।।

त्वदग्नि त्रिः परिक्रम्य गायन्तु च हसंतु च।
जल्पन्तु स्वेछ्या लोकाः निःशङ्का यस्य यन्मतम्।।

ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय महाचक्राय महाज्वालाय दीप्तिरूपाय सर्वतो रक्ष रक्ष मां महाबलाय नमः।

ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परम पुरूषाय परमात्मने परकर्म मंत्र यंत्र औषध अस्त्र शस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय ओम नमो भगवते सुदर्शनाय दीप्ते ज्वालादित्याय, सर्वदिक् क्षोभण कराय हूं फट् ब्रहणे परं ज्योतिषे नमः।

ॐ नमो भगवते सुदर्शनाय वासुदेवाय, धन्वंतराय अमृतकलश हस्ताय, सकला भय विनाशाय, सर्व रोग निवारणाय त्रिलोक पतये, त्रिलोकीनाथाय ॐ श्री महाविष्णु स्वरूपाय ॐ श्रीं ह्मीं ऐं औषधि चक्र नारायणाय फट्!!

ॐ ऐं ऐं अपराजितायै क्लीं क्लीं नमः।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं हूं हूं त्रैलोक्यमोहन विष्णवे नमः।

ॐ त्रैलोक्यमोहनाय च विद्महे, आदिकामदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु: प्रचोदयात्।

ॐ तेजोरूपाय च विद्महे, विष्णु पत्न्यै धीमहि। तन्नो श्री: प्रचोदयात्।

इस साल होलिका दहन १३ मार्च २०२५ गुरुवार और १४ मार्च २०२५ को होली खेली जाएगी। होलिका दहन के लिए लकड़ी और उपले आदि एकत्रित किए जाते हैं। होलिका दहन से पूर्व उसमें गुलाल समेत अन्य सामग्रियां डाली जाती हैं। होलिका की अग्नि को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि होलिका की अग्नि में कुछ विशेष चीजों को डालने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

   ।। पावनपर्व होलिका दहन की शुभकामनाएं ।।

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 🌼🍃 शिवपार्वतीपत्य नमः 🍃🌼
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Friday, 10 January 2025

रवि पुष्य योग



रवि पुष्य योग (रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र) में गूलर के फूल एवं कपास की रूई मिलाकर बत्ती बनाएं तथा उस बत्ती को मक्खन से जलाएं | फिर जलती हुई बत्ती की ज्वाला से काजल निकालें | इस काजल को रात में अपनी आंखें में लगाने से समस्त जग वश में हो जाता है | ऐसा काजल किसी को नहीं देना चाहिए |

मन्त्र



:-स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए नित्य एक माला महामृत्युंजय की जाप अवश्य करें। 40 दिन बाद से परिणाम दिखने प्रारंभ हो जायेगा।

:-जिन व्यक्तियों को कर्ज से राहत न मिल रही हो या खर्च ज्यादा हो, आवक कम हो, वे लक्ष्मीजी का  मंत्र प्रारंभ कर दें।  ऐश्वर्य, लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

मंत्र:-श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा

:- इस वर्ष गुरु उच्च के हो रहे हैं अत: जिन्हें भी दीक्षा लेने की इच्छा हो, व विद्वान से सलाह लेकर इस समय का लाभ उठा सकते हैं।

जिन व्यक्तियों के किसी भी कार्य में रुकावट हो, वे बसंत पंचमी से नित्य एक माला करें।

मंत्र- ॐ श्रीं श्रीं ॐ ॐ श्रीं श्रीं हूं फट् स्वाहा। ।

जिन व्यक्तियों को राज्य से या बड़े व्यक्तियों से कार्य में अड़चन आ रही हो, वे एक माला मकर संक्रांति से नित्य करें।

मंत्र- ॐ नमो भास्कराय त्रिलोकात्मने।
महपति वश्यं कुरु-कुरु स्वाहा। ।

महा वशीकरण मन्त्र :-



महा वशीकरण मन्त्र :-

ॐ पुरुष-क्षोभनी सर्व-शत्रु विद्रान्वी ॐ आम् क्रौम् ह्रीं जो ही मोह्य मोह्य क्षोभय क्षोभय अमुकी वशी कुरु वशी कुरु स्वाहा ||

प्रयोग करने से पहले मन्त्र का शुभ रात्रि में एकांत में नग्न होकर 3008 बार मन्त्र जप करके सिद्ध करे | फिर बाद में इसी विधि से रोज मन्त्र का इतनी ही मात्रा में नाम जोडकर जप करे जब तक की आपका काम न हो जाए | जल्द ही आपका कार्य पूरा होगा |

स्तम्भन मंत्र:-



स्तम्भन मंत्र:-

सिद्धि करने के बिधि :-
माला :-रुद्राक्ष (साधारण तरीके से संकरित )
दिशा:- पश्चिम
आसान /बस्त्र:- लाल
दिन :- अमाबस्या के मध्यरात्रि से सुरु
21 माला जाप से मंत्र सिद्धि होगा
सामान्य गुरु, गणेश पूजन करके गुरु मंत्र का एक माला और गणेश मंत्र का एक माला जाप करें फिर मूल मंत्र का जाप सुरु करें
घी का दिया और धुपबत्ती जलाके जाप करें
1 रात मे जाप पूरा करें
सात्विक भोजन और ब्राह्मचार्य का पालन करें

मंत्र :-
ॐ वं वं बं ह हं हं घ्रां ठः ठः।

इस मंत्र को सिद्ध करने के बाद ही इसका प्रयोग करें। निगोही के बीज को 21 बार अभिमंत्रित करके जिस व्यक्ति पर भी फेंका जाए, वह स्तम्भित हो जाता है। यदि इसका प्रयोग रविवार या मंगलवार को किया जाए तो इसका प्रभाव अधिक दिखाई देता है।

कवच

कवच:-
 
इष्ट देवों की उपासनाओं में उनके नामों द्वारा उनका अपने शरीर में निवास तथा रक्षा की प्रार्थना करते हुए जो न्यास किये जाते है, वे ‘कवच' कहे जाते हैं । ये कवच न्यास और कवच स्तोत्रों के पाठ द्वारा सिद्ध होते हैं। सिद्ध होने पर साधक किसी भी रोगी पर इनके द्वारा झाड़ने-फूंकने की क्रिया करता है । कवच- स्तोत्र पाठ जप के पश्चात होता है । भोज-पत्र पर कवच लेखन, तिलक, जल अभिमंत्रण या ताबीज तथा अन्य चीजों को अभिमंत्रण (मंत्र से युक्त) करने का कार्य भी ‘कवच स्तोत्र' से होता है ।
जब मनुष्य को अपनी शारीरिक एवं मानसिक शक्तियों द्वार किसी कार्य की सिद्धि में सफलता नहीं मिलती तो वह अलौकिक शक्तियों का सहारा ढूंढ़ता है, इन अलौकिक शक्तियों को प्रसन्न करके अपना कार्य सिद्ध करना चाहता है । ऐसी शक्तियों को तंत्र, मंत्र एवं स्तोत्रों द्वारा प्रसन्न किया जाता है । किसी भी कामना-सिद्धि के लिए इन तंत्रों, मंत्री और स्तोत्रों को सिद्ध करना अत्यन्त आवश्यक है । इसके लिए विधि-विधान की आवश्यकता होती हे 

नजर झाड़ने का मंत्र:-

गुरु चरण दिया मन, श्री हरि मोक्ष कारण, देव-दानव-दैत्यादि, खाई नरसिंह वरा आसी सब उड़ाई आलाली पालाली चोटी चोटी हंकारे फूंकारि उड़ाव मारी शलि लेकर पांव पांव टुकरियां जाए, अनुकार अगे, डाईनेर दृष्टि, पलायकरा अक्षा वीर नरा सिंह आज्ञा।

विधिः सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण, दीपावली, होली, दिवाली, नवरात्री में 108 बार मंत्र पढ़ने से सिद्ध होगा माला :- रुद्राक्ष 
आसान/बस्त्र:- काला 
दिशा:-पश्चिम 
रात के समय करें जाप 
मंत्र सिद्धि के बाद झाड़ा लोगाने केलिए पानी का छिटा मारे(7 बार मन्त्र पढ़के पानी को अभिमत्रित करके )या मौर पँख से झाड़ा लोगये झाड़ने का विधान है। इसी तरह इस मंत्र का प्रयोग करके दूसरे के साथ अपने ऊपर लगी नजर को झाड़ा जा सकता है।

श्री सूर्य देव भगवान जी की पूजा विधि



श्री सूर्य देव भगवान जी की पूजा विधि

रविवार के दिन सूर्य देव की पूजा का
विधान है।

हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव प्रत्यक्ष रूप से दर्शन देने वाले देवता हैं।

हिंदू धर्म में सूर्य की उपासना अति शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है।

रविवार के दिन सूर्यदेव की पूजा के लिए करने के लिए प्रातः जल्दी सोकर उठें।
जब सूर्य उदय हो तब सूर्य देव को प्रणाम करें और ‘ॐ सूर्याय नमः’ या ‘ॐ घृणि सूर्याय नम:’ कहकर सूर्यदेव को जल अर्पित करें।

सूर्य को अर्पित किए जाने वाले जल में लाल रोली, लाल फूल मिलाकर अर्घ्य दें।
सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात्प लाल आसन में बैठकर पूर्व दिशा में मुख करके सूर्य के मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
सूर्य को जल देने के बाद मन ही मन प्रणाम करें और सद्बुद्धि देने की कामना करें।
सूर्य देव के मंत्र जाप से सरकारी काम या सरकारी नौकरी या राजयोग बोनता हे जीवन मे इंसान सारे भौतिक सुख भोगता हे। 🙏🙏

महालक्ष्मी मंत्र (अक्षय भंडार) दिवाली के रात या धनतेरस के रात कर सकते हे

महालक्ष्मी मंत्र (अक्षय भंडार) दिवाली के रात या धनतेरस के रात कर सकते हे

ॐ श्रीं ह्रीं क्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

विधिः शुभ तिथि व शुभ दिन प्रातः जप करना प्रारम्भ कर दें। कम-से-कम 1100 जप या ज्यादा से ज्यादा 11000 जाप करें हमेशा आपके बरकत लगा रहेगा जैसे दिन दुगुनी रात चौगुनी

माला -रुद्राक्ष
दिशा -पश्चिम
लाल -आसान /बस्त्र
11 माला जाप करें दिवाली या किसी शुभ मुहूर्त पे
गुरु, गणेश, माता लक्ष्मी के पूजन के बाद एक एक माला गुरु गणेश का जाप करते हुए मूल मंत्र का जाप करें आप पांचउपचार पूजन के बाद जाप सुरु करें

व्यापार वृद्धि के लिए

ब्यपार बृद्धि करने के मंत्र :-

व्यापार का दैनिक कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व यदि इस मंत्र का 108 बार उच्चारण करके दुकान खोलें और व्यापार का दैनिक कार्य प्रारंभ करें तो उस दिन बिक्री बढ़ती है और किसी प्रकार का कोई उपद्रव या परेशानी नहीं आती। इस मंत्र को सिद्ध करने की कोई आवश्यकता नहीं है। नित्य दुकान खोलने से पूर्व एक माला फेरनी पर्याप्त है।
माला:- रुद्राक्ष।
समय:- दुकान खोलने के समय।
स्नान और साफ कपडे पहने और दुकान मे प्रबेश करें।
माला नहीं होने पर ऊँगली पे गिनती करते हुए मंत्र पढ़ सकते हे।
दुकान के गद्दी पे बैठ कर या दुकान खोलने के बाद मंत्र पढ़ कर ब्यपार सुरु करें आप।

मंत्रः- 
 ॐ श्री शुक्ले महाशुक्ले कमलदल निवासे महालक्ष्म्यै नमः

sidh mantra

 मंत्रः ॐ नमः वज्र का कोठा, जिसमें पिंड हमारा पैठा। ईश्वर कुंजी ब्रह्मा का ताला, मेरे आठों याम का यतो हनुमंत रखवाला।

1000 मंत्र जप करने से इसे सिद्ध करने के बाद 3 बार मंत्र के उच्चारण से कार्य संपन्न होता है।
और यह मंत्र से आप अपने सुरक्षा भी कर सकते हे जैसे आप अपने हातोली पे फूँक मारके के अपने शरीर पे हाथ फेरने से आपका रक्षा होता हे

सफ़ेद या काला रंग का आसान या बस्त्र का इस्तेमाल करें
सँस्कारित रुद्राक्ष माला जाप मे इस्तेमाल करें
भोग मे आपके सामने एक कोटोरी मे लड्डू रखें हनुमानजी केलिए
यह धुपबत्ती और घी का दीपक सामने रखें
फिर आप आसान के ऊपर बैठ कर माला जाप करें
किसी शुभ मुहूर्त मे यह अनुष्ठान कर सकते हे आप, या मंगलबार या शनिवार को करें।।